काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्वतन्त्रता भवन संस्कृत विभाग, कला संकाय, द्वारा भारत अध्ययन केन्द्र तथा उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में महाकवि भास द्वारा रचित सुप्रसिद्ध संस्कृत नाटक ‘मध्यमव्यायोग’ का मंचन किया गया। संस्कृत भाषा में प्रस्तुत इस नाटक में सभी पात्रों की भूमिका संस्कृत विभाग, के विद्यार्थियों द्वारा निभाई गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने संस्कृत भाषा में अपना उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए आयोजन की सफलता हेतु शुभकामनाएँ दीं तथा इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों को भारतीय परंपरा और सृजनात्मक अभिव्यक्ति के संवर्धन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। प्रो. चतुर्वेदी ने कलाकारों को उनके समर्पण एवं रचनात्मक प्रस्तुति के लिए बधाई देते हुए कहा कि रंगमंच समाज में संवेदनशीलता, संवाद और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है।
महाकवि भास द्वारा रचित सुप्रसिद्ध संस्कृत नाटक ‘मध्यमव्यायोग’ महाभारत की पृष्ठभूमि पर आधारित एक प्रभावशाली एकांकी नाटक है, जिसमें वीरता, कर्तव्यबोध और पारिवारिक संवेदनाओं का मार्मिक चित्रण किया गया है। इस नाटक के मंचन में विशेष रूप से भीम और उनके पुत्र घटोत्कच के अप्रत्याशित मिलन के माध्यम से मानवीय संबंधों, त्याग और धर्म के गहन भावों को प्रस्तुत किया गया।
नाट्य-निर्देशन डॉ. शिल्पा सिंह, संस्कृत विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, द्वारा किया गया। नाटक की प्रशिक्षिका डॉ. दिव्या श्रीवास्तव रहीं।
नाटक के मंचन के अवसर पर प्रो. शरदिन्दु कुमार तिवारी, समन्वयक, भारत अध्ययन केन्द्र, प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी, विभागाध्यक्ष, संस्कृत विभाग, प्रो. श्रीकिशोर मिश्र, पूर्व संकाय प्रमुख, कला संकाय, के साथ अन्य गणमान्य अतिथि, शिक्षक तथा विद्यार्थि उपस्थित रहे।