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एका - द वन वाराणसी पहुँची योगिनी और काल भैरव की पावन भूमि पर



 02/Mar/26

 डॉ. बीना एस. उन्नीकृष्णन द्वारा सृजित 64 योगिनियों की संपूर्ण समकालीन
चित्रश्रृंखला पर आधारित राष्ट्रीय भ्रमणशील प्रदर्शनी "एका द वन" अपने 16 राज्यों की 81 दिवसीय अखिल भारतीय यात्रा के 10वें पड़ाव के रूप में वाराणसी पहुँची है। आगागी छह राज्यों में आयोजित होने वाली यह प्रदर्शनी भारत की एक अत्यंत गहन किंतु अपेक्षाकृत कम चर्चित आध्यात्मिक परंपरा के पुनर्जीवन हेतु समर्पित सांस्कृतिक अभियान को आगे बढ़ा रही है।
यह प्रदर्शनी आहिवासी आर्ट गैलरी, फैकल्टी ऑफ विजुअल आर्ट्स, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी में 02, 03 एवं 05 मार्च को प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक आयोजित की जाएगी।
विश्व की प्राचीनतम जीवित नगरियों में से एक वाराणसी न केवल भारत की आध्यात्मिक राजधानी है, बल्कि यह एक सशक्त तांत्रिक एवं शक्ति परंपरा का भी केंद्र रही है। काशी के उग्र रक्षक काल भैरव से पारंपरिक रूप से संबद्ध यह नगर व्यापक शैव शाक्त आध्यात्मिक धारा के अंतर्गत योगिनी एवं गूढ़ देवी परंपराओं से भी गहरे रूप में जुड़ा हुआ है।
वाराणसी में 64 योगिनियों की प्रस्तुति इस प्रदर्शनी को उस पवित्र भूगोल में स्थापित करती है जहाँ भैरव और योगिनी ऊर्जाएँ प्रतीकात्मक रूप से सह-अस्तित्व में हैं संरक्षण और शक्ति, अनुशासन और दिव्य स्त्री ऊर्जा का संगम ।
"एका - द वन" पहली ऐसी समकालीन कलात्मक व्याख्या है जिसमें एक ही कलाकार द्वारा सभी 64 योगिनियों को पूर्ण रूप से साकार किया गया है। 9वीं से 12वीं शताब्दी के मध्य निर्मित भारत के ऐतिहासिक वृत्ताकार योगिनी मंदिरों से प्रेरित यह प्रदर्शनी योगिनियों को सृष्टि, रूपांतरण और पुनर्नवीनता की ब्रह्मांडीय स्त्री शक्ति - 'शक्ति' के सजीव स्वरूप के रूप में पुनः प्रस्तुत करती है।
तीन दिवसीय इस विशेष प्रस्तुति में 64 चित्रों की संपूर्ण श्रृंखला, मार्गदर्शित व्याख्यान, संदर्भ शोध-आधारित जानकारी तथा दर्शकों के साथ संवाद सत्र शामिल हैं। इसके साथ प्रदर्शित की जा रही डॉक्यूमेंट्री "Y64: व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन", जिसका निर्देशन डॉ. जैन जोसेफ ने किया है और निर्माण डॉ. बीना एस. उन्नीकृष्णन द्वारा किया गया है, योगिनी परंपरा के ऐतिहासिक एवं समकालीन आयामों को प्रस्तुत करती है।
कांकली ट्रस्ट फॉर आर्ट्स एंड कल्चरल इकोनॉमिक डेवलपमेंट (KT-ACED) के तत्वावधान में डॉ. बीना एस. उन्नीकृष्णन द्वारा परिकल्पित यह परियोजना कला, विरासत शोध और सांस्कृतिक संवाद का समन्वय है। पौराणिक संदर्भों से आगे बढ़ते हुए, योगिनी परंपरा को स्त्री-पुरुष ऊर्जा, अंतर्ज्ञान और तर्क, शक्ति और करुणा के संतुलन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सांस्कृतिक रणनीतिकार श्री शाहज़ादा कुर्रम इस परियोजना में डॉ. बीना उन्नीकृष्णन के क्यूरेटोरियल सलाहकार हैं।
डॉ. बीना एस. उन्नीकृष्णन कलाकार, फिल्म निर्माता, लेखिका तथा G100 ग्लोबल चेयर (आर्ट्स लीडरशिप एवं फिल्म्स) - इस प्रदर्शनी को एक दशक लंबी आध्यात्मिक एवं कलात्मक साधना का राष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रसाद मानती हैं, जो अब देशव्यापी रूप में साकार हो रहा है।


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