तकनीकी सत्र में दी गई विशेष जानकारी
कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में डॉल्फिन गणना के दौरान उपयोग किए जाने वाले उपकरणों और वैज्ञानिक विधियों की विस्तृत जानकारी विशेषज्ञों द्वारा दी गई। इस दौरान सर्वेक्षण पद्धति, जीपीएस ट्रैकिंग, विजुअल काउंटिंग तकनीक और डाटा संकलन प्रक्रिया पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
द्वितीय एवं अंतिम सत्र में प्रतिभागियों को नमो घाट पर गंगा नदी में डॉल्फिन गणना का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया, जिससे अधिकारियों को वास्तविक परिस्थितियों में सर्वेक्षण प्रक्रिया की समझ मिल सके।
2025–2027 तक चलेगा डॉल्फिन गणना अभियान
डॉल्फिन गणना वर्ष 2025 से 2027 तक भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा राज्य वन विभाग के सहयोग से गंगा एवं उसकी समस्त सहायक नदियों में की जा रही है। यह अभियान 03 मार्च 2025 को अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव दिवस के अवसर पर प्रारंभ किया गया था।
इन वन प्रभागों के अधिकारियों ने लिया भाग
कार्यशाला में निम्न वन प्रभागों के क्षेत्रीय वनाधिकारी, उप क्षेत्रीय वनाधिकारी, वन दरोगा एवं वन रक्षक उपस्थित रहे:
कार्यक्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. विनीत सिंह अपनी टीम के साथ उपस्थित रहे।
प्रभागीय वनाधिकारी बी. शिवशंकर तथा उप प्रभागीय वनाधिकारी अरविन्द कुमार ने भी डॉल्फिन संरक्षण के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए और इसे गंगा पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण सूचक बताया।
क्यों महत्वपूर्ण है गंगा डॉल्फिन संरक्षण?
गंगा डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है। यह प्रजाति गंगा नदी की स्वच्छता और जैव विविधता का संकेतक मानी जाती है। नियमित गणना और वैज्ञानिक सर्वेक्षण से इनके संरक्षण की रणनीतियों को और मजबूत बनाया जा सकेगा।
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