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चिकित्सा विज्ञान संस्थान,-बीएचयू में  मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) द्वारा क्लीनिकल ट्रायल कार्यशाला का शुभारंभ



 23/Feb/26

चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय क्लीनिकल ट्रायल कार्यशाला का आज गरिमामय वातावरण में शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR), भारत सरकार एवं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के तत्वावधान में सेंटर फॉर क्रॉनिक डिजीज कंट्रोल (CCDC), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित की जा रही है।

कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वैज्ञानिक अनुसंधान, विशेषकर क्लीनिकल ट्रायल, चिकित्सा क्षेत्र की गुणवत्ता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता की आधारशिला हैं। उन्होंने एमआरयू की सक्रिय भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ संस्थान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध मानकों के अनुरूप सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस अवसर पर आईएमएस-बीएचयू के निदेशक प्रो. एस. एन. संखवार, अधिष्ठाता प्रो. संजय गुप्ता तथा डीन (अनुसंधान) प्रो. मनोज पांडेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एमआरयू की स्थापना के पश्चात संस्थान में अनुसंधान गतिविधियों को नई दिशा मिली है तथा यह कार्यशाला चिकित्सकों, संकाय सदस्यों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। कार्यशाला में एम्स गोरखपुर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर, आईसीएमआर-रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर गोरखपुर, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रयागराज तथा आईएमएस-बीएचयू के विभिन्न विभागों से आए संकाय सदस्य एवं शोधार्थी सहभागी बन रहे हैं।

एमआरयू की नोडल अधिकारी प्रो. रॉयना सिंह ने स्वागत वक्तव्य में बताया कि डीएचआर-आईसीएमआर द्वारा समर्थित एमआरयू का उद्देश्य संस्थान में बहुविषयक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना, अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाएँ उपलब्ध कराना तथा गुणवत्तापूर्ण क्लीनिकल ट्रायल को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों को क्लीनिकल ट्रायल की संपूर्ण प्रक्रियाअध्ययन की रूपरेखा, नैतिक स्वीकृति, डेटा प्रबंधन, जैव-सांख्यिकी विश्लेषण एवं वैज्ञानिक लेखनके विषय में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि एमआरयू शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने और युवा वैज्ञानिकों को सक्षम बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

कार्यशाला के अंतर्गत सेंटर फॉर क्रॉनिक डिजीज कंट्रोल (CCDC), नई दिल्ली के प्रतिष्ठित विशेषज्ञोंप्रो. डी. प्रभाकरन, प्रो. सैलेश मोहन, डॉ. निखिल एस.वी., डॉ. कविता सिंह, डॉ. डिंपल कोंडल एवं डॉ. अंबालम एम. चंद्रशेखरनद्वारा क्लीनिकल ट्रायल डिज़ाइन, महामारी विज्ञान, बायोस्टैटिस्टिक्स, डेटा प्रबंधन तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान एवं प्रशिक्षण सत्र संचालित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के सफल आयोजन मेंपद्मश्री प्रो. सरोज चरणानी, प्रो टी एम महापात्रा एवं सह-नोडल अधिकारी डॉ. एस.पी. मिश्रा एवं आयोजन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह तीन दिवसीय कार्यशाला प्रतिभागियों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करेगी, बल्कि व्यावहारिक कौशल विकसित करने का सशक्त मंच भी उपलब्ध कराएगी।


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