MENU

प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ POCSO कोर्ट का आदेश: यौन शोषण के आरोप में FIR दर्ज करने के निर्देश की पूरी कहानी



 22/Feb/26

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है, जहां विशेष POCSO अदालत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिगों के कथित यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह मामला साधारण पुलिस शिकायत से नहीं, बल्कि अदालत में दायर याचिका के आधार पर आगे बढ़ा।

प्रयागराज की विशेष POCSO अदालत का आदेश
प्रयागराज की विशेष POCSO कोर्ट ने 21 फरवरी 2026 को आदेश जारी करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ कथित यौन शोषण के मामले में FIR दर्ज की जाए। अदालत ने यह आदेश याचिका, प्रस्तुत साक्ष्यों और नाबालिगों के रिकॉर्ड किए गए बयानों के आधार पर दिया।

मुकदमा किसकी याचिका पर दर्ज हुआ ? 
यह पूरा मामला आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा दायर की गई याचिका से शुरू हुआ। उन्होंने अदालत में आवेदन देकर कहा कि दो नाबालिग बच्चों ने उनके समक्ष कथित यौन शोषण की बात कही है। उनका आरोप था कि इस संबंध में पुलिस से शिकायत किए जाने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
इसी के बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया और POCSO कोर्ट में याचिका दायर की। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए नाबालिगों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की।

घटनाक्रम की टाइमलाइन : 
18 जनवरी 2026: माघ मेले के दौरान कथित घटना होने का आरोप लगाया गया।
24 जनवरी 2026: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा झूंसी थाना, प्रयागराज में शिकायत दिए जाने की बात कही गई, लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई।
28 जनवरी 2026: विशेष POCSO कोर्ट में याचिका दायर की गई।
13 फरवरी 2026: दो नाबालिगों के बयान अदालत में रिकॉर्ड किए गए और उनकी वीडियोग्राफी भी की गई।
20 फरवरी 2026: अदालत ने आदेश सुरक्षित रखा।
21 फरवरी 2026: अदालत ने FIR दर्ज करने का निर्देश जारी किया।

झूंसी थाना में दर्ज होगी FIR : 
अदालत के आदेश के बाद मामला झूंसी थाना, प्रयागराज में दर्ज किया जाना है। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच प्रारंभ की जाए। अब पुलिस विवेचना की प्रक्रिया शुरू करेगी, जिसमें साक्ष्य संकलन, संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ और अन्य कानूनी औपचारिकताएं शामिल होंगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार अदालत ने माना पाया कि दो नाबालिगों के बयान न्यायालय के समक्ष दर्ज किए गए।
बयान रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया का वीडियोग्राफिक साक्ष्य मौजूद है। पुलिस द्वारा पूर्व में FIR दर्ज नहीं की गई थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला दर्ज करने का निर्देश देना उचित समझा।

आरोपी पक्ष की प्रतिक्रिया :
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से आरोपों को खारिज किया गया है। उन्होंने इन आरोपों को साजिश बताया है और कहा है कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की अपेक्षा जताई है।

कानूनी प्रक्रिया अब आगें कैसे बढ़ेगी ? 
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस की जांच औपचारिक रूप से शुरू होगी। नाबालिगों के बयान दोबारा दर्ज किए जा सकते हैं। मेडिकल और अन्य फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए जा सकते हैं व आरोपियों से पूछताछ की जा सकती है। आवश्यक होने पर गिरफ्तारी या नोटिस जारी किया जा सकता है।
जांच पूरी होने पर पुलिस अदालत में चार्जशीट दाखिल करेगी या साक्ष्य के आधार पर अंतिम रिपोर्ट पेश करेगी। इसके बाद मामला नियमित ट्रायल की प्रक्रिया में प्रवेश करेगा।

POCSO कानून के तहत मामला :
यह मामला बाल यौन अपराध संरक्षण कानून (POCSO Act) के दायरे में आता है, जो नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित विशेष प्रावधान करता है। इस कानून के तहत मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में की जाती है और नाबालिगों की पहचान गोपनीय रखी जाती है।

मामले का सामाजिक और कानूनी महत्व :
धार्मिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के खिलाफ इस प्रकार के आरोप सामने आने से सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो जाती है। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि FIR दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर ही लिया जाएगा।


इस खबर को शेयर करें

Leave a Comment

8913


सबरंग