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बनारस के व्यापारी अशोक कुमार गुप्ता ने बताया स्वर्णिम अवसर, ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला



 21/Feb/26

वाराणसी/नई दिल्ली। बनारस के वरिष्ठ व्यवसायी और व्यापारिक संगठन के अध्यक्ष अशोक कुमार गुप्ता ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ आदेश को गैरकानूनी घोषित किए जाने के बाद इसे भारतीय निर्यातकों के लिए एक स्वर्णिम अवसर बताया है। गुप्ता ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि अमेरिका में आयात शुल्क को लेकर आया यह फैसला भारतीय व्यापार जगत के लिए सकारात्मक संकेत है और 150 दिनों की अस्थायी टैरिफ अवधि का लाभ उठाते हुए लंबित निर्यात ऑर्डरों को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 6-3 के बहुमत से निर्णय दिया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ राष्ट्रपति की कानूनी शक्तियों की सीमा से बाहर थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि आयात शुल्क लगाने का मूल अधिकार अमेरिकी कांग्रेस के पास है और राष्ट्रपति आपातकालीन प्रावधानों का उपयोग सीमित परिस्थितियों में ही कर सकते हैं। न्यायालय ने माना कि ट्रंप द्वारा लागू किए गए व्यापक वैश्विक शुल्क उन संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन करते हैं, इसलिए उन्हें निरस्त किया जाता है।

फैसले के बाद ट्रंप ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे निराशाजनक बताया और वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों के तहत नई व्यवस्था लागू करने की घोषणा की। उन्होंने 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत अधिकांश आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का अस्थायी वैश्विक टैरिफ लागू करने का निर्णय लिया, जो 24 फरवरी से 150 दिनों तक प्रभावी रहेगा। इस नई व्यवस्था के तहत भारतीय वस्तुओं पर लागू प्रभावी शुल्क दर पहले की तुलना में कम हो सकती है, जिससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा में राहत मिलने की संभावना है।

अशोक कुमार गुप्ता ने अपने बयान में कहा कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के इस दौर में भारतीय निर्यात समुदाय को रणनीतिक रूप से आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि अमेरिकी बाजार में स्थिर और समयबद्ध आपूर्ति भारत की साख को मजबूत कर सकती है। उन्होंने व्यापारियों से अपील की कि वे लंबित शिपमेंट्स को निर्धारित अवधि के भीतर पूरा करने की योजना बनाएं ताकि बदलती नीतिगत परिस्थितियों का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।

यह पूरा मामला केवल टैरिफ दरों का विवाद नहीं है, बल्कि अमेरिकी संवैधानिक ढांचे में राष्ट्रपति और कांग्रेस की शक्तियों के संतुलन का भी प्रश्न है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि व्यापार नीति से जुड़े बड़े फैसलों में अंतिम अधिकार कांग्रेस के पास है और आपातकालीन शक्तियों का उपयोग सीमित दायरे में ही किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस निर्णय को अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थागत संतुलन की एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, वहीं भारत जैसे निर्यातक देशों के लिए यह स्थिति अवसर और चुनौती दोनों लेकर आई है।


 


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