वाराणसी। 35वें शिवरात्रि संगीत महोत्सव की दूसरी निशा शिव-शक्ति की आराधना को समर्पित रही। दुर्गाकुण्ड स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय परिसर में आयोजित इस भव्य सांस्कृतिक संध्या में देश के ख्यात कलाकारों ने गायन, वादन एवं नृत्य के माध्यम से भगवान नटराज की उपासना की। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सेठ किशोरीलाल जालान सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रहे इस महोत्सव में शास्त्रीय कला का अद्भुत संगम देखने को मिला।
भरतनाट्यम से शिव-शक्ति की भावपूर्ण प्रस्तुति
अहमदाबाद से आईं सुप्रसिद्ध नृत्यांगना कृपा रवि ने भरतनाट्यम की मनोहारी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गणेश वंदना के साथ आरंभ करते हुए उन्होंने शिव-शक्ति आधारित ‘सौंदर्य लहरी’ के प्रथम स्तोत्र “शिव शक्ति एकम्” पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। इसके पश्चात “महिषासुर मर्दिनी” में शक्ति के विविध स्वरूपों का प्रभावशाली चित्रण किया। नाथ सम्प्रदाय के ‘अलख निरंजन’ (पंढरीनाथ स्तोत्र, कन्नड़ भाषा) पर प्रस्तुति ने आध्यात्मिक वातावरण सृजित किया। अंत में “भो शम्भो” के साथ उन्होंने अपनी प्रस्तुति का समापन किया।
वायलिन की सुरधारा में रागों का रंग
काशी के ख्यात वायलिन वादक पं. सुखदेव मिश्र ने अपनी मधुर वादन शैली से श्रोताओं को रससिक्त कर दिया। उन्होंने राग जोग में अद्धा ताल की बंदिश “रे मन सीताराम सुमिर ले” से आरंभ किया। इसके बाद ताल वाद्य में “गंगा” की प्रस्तुति दी। राग मिश्र खमाज में बनारसी दादरा और टप्पा सुनाकर उन्होंने कार्यक्रम को नई ऊँचाई दी। संगत में तबले पर ललित कुमार, मृदंगम पर सत्यवर प्रसाद, सितार पर अमरेंद्र मिश्र तथा गिटार पर अर्णव त्रिवेदी रहे।
आगरा-ग्वालियर घराने की गायकी से सजी निशा
पुणे से आईं आगरा-ग्वालियर घराने की विदुषी मंजूषा पाटिल ने शास्त्रीय गायन से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। राग बागेश्री में बड़े ख्याल “कौन गत भई” से उन्होंने शुरुआत की। तत्पश्चात द्रुत तीनताल में “जा रे बदरा तू जा” तथा एकताल में “ना डारो रंग” प्रस्तुत किया। अंत में राग शंकरा में “ऐसो निडर” सुनाकर द्वितीय निशा का समापन किया। संगत में तबले पर पं. विनोद लेले, संवादिनी पर डॉ. विनय मिश्रा एवं तानपुरे पर श्रेया और श्रीदेवी रहीं।
संत आशीर्वाद और गरिमामयी उपस्थिति
प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु रमेश भाई ओझा भाईश्री ने कलाकारों को आशीर्वाद प्रदान किया। अतिथियों का स्वागत केशव जालान, कृष्ण कुमार जालान एवं भगीरथ जालान ने किया। कार्यक्रम का संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।