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वाराणसी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 6 अवैध कॉल सेंटर ध्वस्त, 76 साइबर अपराधी गिरफ्तार, 9.5 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस



 11/Feb/26

साइबर अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल की समीक्षा बैठक, Lien Time 4 घंटे से घटकर 14 मिनट

वाराणसी | साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से 10 फरवरी 2026 को पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल ने साइबर सेल एवं जनपद के सभी थानों के साइबर हेल्प डेस्क प्रभारियों के साथ समीक्षा गोष्ठी आयोजित की। बैठक में वर्ष 2025 एवं वर्ष 2026 की अब तक की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

समीक्षा के दौरान सामने आया कि वर्ष 2025 में वाराणसी पुलिस ने 6 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ करते हुए 76 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। ये अपराधी वाराणसी से कॉल सेंटर संचालित कर देश और विदेश के लोगों को ठगी का शिकार बना रहे थे। वाराणसी में इस प्रकार की कार्रवाई पहली बार की गई, जिसे बड़ी उपलब्धि माना गया।

इसके अतिरिक्त म्यूल अकाउंट खोलने वाले 44 अभियुक्तों के विरुद्ध कार्रवाई की गई तथा फर्जी नाम से सिम कार्ड जारी करने वाली 15 फर्मों को चिन्हित कर उनके संचालकों को जेल भेजा गया।

साइबर सेल ने वर्ष 2025 में साइबर फ्रॉड के 9.5 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस कराए। वहीं 01 जनवरी 2026 से 10 फरवरी 2026 तक लगभग 1 करोड़ रुपये की साइबर ठगी राशि होल्ड/फ्रीज कराई गई।

तकनीकी कार्रवाई के तहत वर्ष 2025 से अब तक 5273 मोबाइल नंबर ब्लॉक किए गए, 1290 मोबाइल फोन (IMEI) डिएक्टिवेट किए गए तथा 115 फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट निष्क्रिय किए गए।

शिकायतों के निस्तारण दर को 44 प्रतिशत से बढ़ाकर 87 प्रतिशत तक पहुंचाया गया। पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में Lien Time को 4 घंटे से घटाकर मात्र 14 मिनट करना समन्वय और त्वरित कार्रवाई का परिणाम बताया गया।

बैठक में IMEI ब्लॉकिंग, मोबाइल नंबर ब्लॉकिंग, लीन अमाउंट में वृद्धि, फर्जी POS मशीन संचालकों व अवैध सिम जारी करने वालों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रतिबिम्ब पोर्टल की प्रभावी मॉनिटरिंग हेतु एक नए सेल का गठन किया गया, जिसकी नियमित समीक्षा स्वयं पुलिस आयुक्त करेंगे।

समन्वय पोर्टल पर प्रत्येक अभियुक्त का पूर्ण एवं सही विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए, जिससे भविष्य में अपराधियों का सटीक डाटाबेस तैयार किया जा सके।

साइबर फ्रॉड के प्रत्येक मामले की गुणवत्ता आधारित गहन समीक्षा कर साप्ताहिक मॉनिटरिंग की व्यवस्था लागू की गई है। आमजन को साइबर अपराध से बचाने के लिए सोशल मीडिया, विद्यालयों, जनसंपर्क कार्यक्रमों एवं गोष्ठियों के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) आलोक प्रियदर्शी, अपर पुलिस उपायुक्त साइबर अपराध नीतू सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

 


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