उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए ₹9,12,696 करोड़ का बजट पेश कर दिया है। यह सिर्फ एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि विकास की दिशा तय करने वाला रोडमैप है। पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.9 प्रतिशत अधिक इस बजट में सबसे अधिक ध्यान जिस क्षेत्र पर गया है, वह है- एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम)।
क्यों अहम है एमएसएमई?
उत्तर प्रदेश पहले से ही एमएसएमई इकाइयों की संख्या के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। यही क्षेत्र रोजगार, निर्यात और स्थानीय उत्पादन की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में 3,822 करोड़ का प्रावधान- जो पिछले वर्ष से लगभग 19 प्रतिशत अधिक है- यह संकेत देता है कि सरकार छोटे उद्योगों को आर्थिक इंजन बनाना चाहती है।
युवा उद्यमिता: हर साल 1 लाख नए उद्यम का लक्ष्य
“मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना” के लिए 1,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। लक्ष्य है- हर वर्ष 1 लाख नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करना।
अगर यह योजना ज़मीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो प्रदेश में स्वरोजगार की नई लहर देखी जा सकती है।
औद्योगिक ढांचे पर बड़ा निवेश
27,103 करोड़ का औद्योगिक अवसंरचना प्रावधान यह दर्शाता है कि सरकार केवल योजनाएं नहीं, बल्कि उनके लिए आधारभूत ढांचा भी तैयार कर रही है।
इसके अलावा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए ₹2,059 करोड़ और “उत्तर प्रदेश एआई मिशन” के लिए ₹225 करोड़ का प्रावधान भविष्य की अर्थव्यवस्था की ओर संकेत करता है।
ऊर्जा सुधार: उद्योगों के लिए राहत
₹65,926 करोड़ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश उद्योगों को स्थिर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति देगा।
₹1,500 करोड़ सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और 17 सोलर सिटी विकसित करने की योजना से उत्पादन लागत में कमी आने की संभावना है — जो सीधे एमएसएमई को प्रतिस्पर्धी बनाएगी।
ODOP को नई मजबूती
“एक जनपद एक उत्पाद” योजना के लिए ₹75 करोड़ का प्रावधान पारंपरिक और जिला-विशिष्ट उद्योगों को नई पहचान और बाजार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव दीपक कुमार बजाज के अनुसार,
यह बजट एमएसएमई क्षेत्र को नई ऊर्जा देगा और प्रदेश को औद्योगिक एवं विनिर्माण हब बनाने की दिशा में ठोस आधार तैयार करेगा।
बजट में योगी सरकार ने बनारस और विंध्याचल धाम के लिए खोला खजाना, 200 करोड़ से संवरेगा
उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बुधवार को बजट पेश किया है। 9 लाख 12 हजार 696 करोड़ 35 लाख रुपये का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया गया है। यह बजट पिछले वर्षों की तुलना में एक लाख करोड़ रुपये ज्यादा है। यह बजट वाराणसी जिले के लिए कई सौगातें लेकर आया है। इस बजट के जरिये काशी के पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। वाराणसी और विंध्याचल में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के विस्तार की बड़ी तैयारी है।
विंध्यवासिनी देवी धाम और वाराणसी में पर्यटक सुविधाओं के विस्तार के लिए 100-100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। जिससे वाराणसी-मिर्जापुर क्षेत्र को एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सके। इन प्रावधानों से संपर्क, सुविधाओं और पर्यटक अनुभव में काफी सुधार होगी। वहीं बनारस गोरखपुर और प्रयागराज के लिए मेट्रो की सुविधा भी प्रस्तावित है।
Clown Times विश्लेषण
यह बजट स्पष्ट संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश अब केवल कृषि आधारित अर्थव्यवस्था नहीं रहना चाहता, बल्कि औद्योगिक और तकनीकी विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ना चाहता है।
यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ, तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में शामिल हो सकता है।
एमएसएमई को दी गई यह प्राथमिकता केवल आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में रणनीतिक कदम है।