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SPEL Programme 3.0 के तहत छात्र-छात्राओं को IPS चयन प्रक्रिया और साइबर अपराध से बचाव की दी जानकारी



 10/Feb/26

पुलिस आयुक्त वाराणसी के निर्देशन तथा अपर पुलिस उपायुक्त महिला अपराध नम्रिता श्रीवास्तव के कुशल पर्यवेक्षण में स्टूडेंट पुलिस एक्सपीरिएंशियल लर्निंग (SPEL) Programme 3.0 के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को आईपीएस (IPS) की चयन प्रक्रिया और साइबर अपराध से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। यह कार्यक्रम कमिश्नरेट वाराणसी के कुल 18 थानों पर संचालित किया जा रहा है।

भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के निर्देशन में चल रहे इस 30 दिवसीय SPEL Programme 3.0 का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं की संज्ञानात्मक क्षमता (Cognitive Skill) और लोक कौशल (People Skill) को विकसित करना है। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को कानून व आपराधिक प्रक्रिया, आपराधिक अनुसंधान, यातायात नियंत्रण, साइबर क्राइम, मानव तस्करी, कानून-व्यवस्था आदि विषयों पर प्रतिदिन 4 घंटे के प्रशिक्षण के माध्यम से कुल 120 घंटे की अनुभवात्मक सीख प्रदान की जा रही है।

सभी प्रतिभागियों का पंजीकरण mybharat.gov.in पोर्टल पर कराया गया है। चयनित 18 थानों पर एक-एक उप निरीक्षक को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। थाना स्तर पर 20 दिनों तक 02–10 छात्र/छात्राओं को यह अनुभवात्मक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

आज दिनांक 10.02.2026 को कमिश्नरेट वाराणसी के यातायात सभागार में सहायक पुलिस आयुक्त मानसी दहिया (IPS) द्वारा छात्र-छात्राओं को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा (CSE) के माध्यम से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयन की पूरी प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।

उप निरीक्षक हिमांशु त्रिपाठी ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करें। इसके अलावा नजदीकी थाने के साइबर हेल्प डेस्क या साइबर सेल में भी शिकायत की जा सकती है।

साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

पुलिस/CBI/नारकोटिक्स/कस्टम विभाग के नाम से आने वाले ब्लैकमेलिंग कॉल या मैसेज से सावधान रहें।

मेल या मैसेज के माध्यम से आए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही APK फाइल डाउनलोड करें।

गूगल पर उपलब्ध कस्टमर केयर नंबरों पर बिना सत्यापन विश्वास न करें।

डर या लालच में कोई निर्णय न लेंयहीं से साइबर अपराध की शुरुआत होती है।

सोशल मीडिया के सेफ्टी फीचर्स जैसे टू-स्टेप वेरिफिकेशन और प्राइवेसी सेटिंग्स का उपयोग करें।

सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति से मित्रता न करें और न ही अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करें।

 


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