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मानव विकास पर अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान में ऑस्ट्रेलिया के ग्रिफिथ विश्वविद्यालय के साथ साझा अध्ययन करेगा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय



 03/Feb/26

· ग्रिफिथ विश्वविद्यालय के उत्कृष्टता केन्द्र को ऑस्ट्रेलियाई अनुसंधान परिषद् से मिला है 85 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान

· बीएचयू के जन्तु विज्ञान विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे साझेदार अन्वेषक के रूप में होंगे शामिल

वाराणसी, 03.02.3026: काशी हिंदू विश्वविद्यालय को ग्रिफ़िथ विश्वविद्यालय के मानव विकास शोध के रूपांतरण हेतु एआरसी उत्कृष्टता केंद्रमें भागीदार संस्थान के रूप में शामिल किया गया है। इस केन्द्र को ऑस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल की ओर से सात वर्षों (2026–2032) के लिए 85 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि स्वीकृत की गई है। ग्रिफ़िथ विश्वविद्यालय ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में शामिल है और इसका एआरसी केंद्र ऑस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल द्वारा वित्तपोषित है। 85 मिलियन अमेरिकी डॉलर का यह महत्वपूर्ण वित्तीय अनुदान मानव विकास अध्ययन के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी शोध पहलों में से एक है।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की ओर से जन्तु विज्ञान विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे परियोजना में भागीदार अन्वेषक (पार्टनर इन्वेस्टिगेटर) के रूप में कार्य करेंगे। जनसंख्या आनुवंशिकी, प्राचीन डीएनए तथा दक्षिण एशियाई जनसंख्याओं के इतिहास में उनकी विशेषज्ञता इस परियोजना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। प्रो. चौबे ने बताया कि वे इस पहल में योगदान देने हेतु बीएचयू के पुरातात्विक विशेषज्ञों जैसे डॉ. सचिन कुमार तिवारी, डॉ. जोस टोम रैफेल और प्रतीक पांडे को भी शामिल करेंगे।

इस केन्द्र का लक्ष्य यह समझना है कि आधुनिक मानव प्रजाति, होमो सेपियन्स, हमारे ग्रह पर एकमात्र जीवित मानव क्यों और कैसे है? यह परियोजना अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के ऐसे क्षेत्रों पर अध्ययन के लिए विषेशज्ञों को एक साथ ला रही है, जिन क्षेत्रों में अधिक अनुसंधान नहीं हुआ है। इस साझेदारी से पता चलेगा कि पिछले 300,000 वर्षों में हुए गहरे पर्यावरणीय बदलावों को अनुकूलित करते हुए, हम कैसे एक बहुमुखी, विश्व स्तर पर फैली हुई प्रजाति बने?

अपेक्षित परिणामों में नए वैज्ञानिक मॉडल और हमारे इतिहास, एक-दूसरे के साथ हमारे जैविक और सांस्कृतिक संबंधों, और हमने दुनिया भर में इकोसिस्टम को कैसे नया आकार दिया है, इसके बारे में सार्वजनिक शिक्षा और नीतियों में संशोधन शामिल हैं। लाभों में समाज की बेहतरी के लिए मानव उत्पत्ति का एक बदला हुआ, नैतिक रूप से जुड़ा हुआ अध्ययन शामिल है।

इस शोध के मुख्य प्रबंधक ग्रिफिथ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर माइकल पेट्राग्लिया ने भारतीय उपमहाद्वीप के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसने प्राचीन दुनिया की आबादी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि बीएचयू और अन्य भागीदारों के साथ यह सहयोग मानव यात्रा को अधिक विस्तार से जानने में बहुत उपयोगी होगा।

सात साल का यह अनुदान उच्च-गुणवत्ता वाले सहयोगी रिसर्च को बढ़ावा देगा, विद्यार्थी और शोधकर्ता आदान-प्रदान (ग्लोबल साउथ पर विशेष जोर के साथ) को सुविधाजनक बनाएगा, और बीएचयू सहित सहयोगी संस्थानों में रिसर्च क्षमता-निर्माण और सुविधाओँ के विकास का समर्थन करेगा।

बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह साझेदारी जीवन विज्ञान, आनुवंशिकी तथा मानव उत्पत्ति और प्रवासन पर अंतःविषयक अनुसंधान में उत्कृष्टता के प्रति बीएचयू की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करती है। इससे बीएचयू के विद्यार्थियों और शिक्षकों को मानवता के साझा अतीत से जुड़े मूलभूत प्रश्नों पर केंद्रित अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में सहभागिता के महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त होंगे।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय, अन्ना विश्वविद्यालय (चेन्नई) के साथ, सेंटर के भागीदार संगठनों में भारत का प्रतिनिधित्व करती है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, केन्या, सऊदी अरब, चीन, इंडोनेशिया, श्रीलंका, यूरोप, यूके और कई स्वदेशी संगठनों के प्रमुख संस्थान भी शामिल हैं।

 


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