भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अल्पकालिक पाठ्यक्रम–सह–कार्यशाला “समग्र स्वास्थ्य हेतु आयुर्वेद (Ayurveda for Holistic Health)” की प्रथम कक्षा एवं उद्घाटन सत्र आज अत्यंत गरिमामय, प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में देश-विदेश से जुड़े प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने आयोजन को विशेष ऊँचाई प्रदान की तथा अकादमिक ऊर्जा का सजीव वातावरण निर्मित किया।
प्रथम दिवस के सत्र में यह प्रतिपादित किया गया कि आयुर्वेद केवल औषधि या उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि संतुलित जीवनशैली, मानसिक शांति, नैतिक आचरण एवं समग्र जीवन-दृष्टि का वैज्ञानिक आधार है। पाठ्यक्रम का उद्देश्य इसी समग्र स्वास्थ्य-दृष्टि को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना तथा स्वस्थ एवं जागरूक जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है। प्रथम दिवस के माननीय वक्ता प्रो. बृज किशोर द्विवेदी ने अपने गहन ज्ञान, सरल एवं प्रभावशाली भाषा तथा जीवनोपयोगी उदाहरणों के माध्यम से आयुर्वेद की मूल भावना को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे प्रतिभागियों में विशेष जिज्ञासा, प्रेरणा एवं संवादात्मक सहभागिता का वातावरण बना।
इस अवसर पर पाठ्यक्रम की समन्वयक डॉ. गीता योगेश भट्ट (Centenary Visiting Fellow, भारत अध्ययन केन्द्र, BHU) ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए इस आयोजन को ज्ञान, अनुशासन एवं संस्कारों के समन्वय का सशक्त मंच बताया। उन्होंने भारत अध्ययन केन्द्र के समन्वयक आदरणीय प्रो. शार्दिन्दु कुमार तिवारी के दूरदर्शी मार्गदर्शन एवं सतत सहयोग PRADAAN की। साथ ही आदरणीय प्रो. सी. बी. झा के स्नेहिल निर्देशन, विद्वत्ता एवं प्रेरक उपस्थिति को आयोजन की प्रमुख शक्ति के रूप में रेखांकित किया।
कार्यक्रम में भारत अध्ययन केन्द्र के अध्यापकगण — अमित पाण्डेय जी, ज्ञानेंद्र जी, जया जी, मलय जी सहित अन्य विद्वानजन एवं समस्त प्रतिभागीगण की गरिमामयी उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिसने आयोजन को अकादमिक एवं सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से समृद्ध किया।
सांस्कृतिक एवं व्यवस्थात्मक सहयोग के अंतर्गत — कुलगीत प्रस्तुत करने वाली छात्रा अनुराधा उपाध्याया एवं उनकी नन्ही बिटिया श्री की मधुर प्रस्तुति ने वातावरण को पावन एवं भावपूर्ण बनाया। मंगलाचरण केशव मिश्रा द्वारा शांत एवं स्पष्ट उच्चारण में प्रस्तुत किया गया, जिसने कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम का कुशल संचालन रिशिका एवं आकांक्षा द्वारा द्विभाषिक (हिंदी-अंग्रेज़ी) शैली में किया गया, जिससे आयोजन सुव्यवस्थित एवं आकर्षक बना रहा। विदेशी प्रतिभागियों की सुविधा हेतु आदित्य कुमार द्वारा कक्षा के विषय का अंग्रेज़ी अनुवाद प्रस्तुत किया गया, जो अत्यंत सराहनीय रहा। पृष्ठभूमि में सतत सहयोग देने वाली अर्पणा सहित तकनीकी दल, कर्मचारियों एवं समस्त सहयोगियों के निष्ठापूर्ण प्रयासों की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की गई।
उद्घाटन सत्र का समापन राष्ट्रगान “जन गण मन” की गरिमामयी प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने कार्यक्रम को राष्ट्रीय एकात्मता, अनुशासन एवं सांस्कृतिक ऊँचाई प्रदान की।
इस प्रकार प्रथम सत्र केवल एक शैक्षणिक कक्षा न रहकर ज्ञान, अनुशासन, समन्वय एवं संस्कार का सुंदर संगम सिद्ध हुआ, जिसने आगामी सत्रों के लिए उत्साह, प्रेरणा एवं सकारात्मक ऊर्जा का सुदृढ़ आधार निर्मित किया।