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सनबीम एकेडमी में रंगमंचीय कार्यशाला ‘बाल रंगशाला’ का प्रेरणादायी एवं सफल आयोजन



 30/Jan/26

सनबीम एकेडमी, वाराणसी द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए दो दिवसीय थिएटर वर्कशॉप ‘बाल रंगशाला’ का सफल एवं प्रभावशाली आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यशाला का संचालन प्रख्यात रंगकर्मी, फिल्म एवं रंगमंच अभिनेता तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), के पूर्व छात्र श्री चित्तरंजन गिरि द्वारा किया गया।

श्री चित्तरंजन गिरि भारतीय रंगमंच और सिनेमा की एक सशक्त पहचान हैं। उन्होंने समानांतर सिनेमा से लेकर मुख्यधारा की फ़िल्मों और वेब सीरीज़ तक अपने अभिनय से विशेष छाप छोड़ी है। वे Lathe Joshi, 1971, Gulaal, Manjhi – The Mountain Man, Kasoor जैसी चर्चित फ़िल्मों के साथ-साथ लोकप्रिय वेब सीरीज़ Farzi में भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नज़र आ चुके हैं। उनके अभिनय की गहराई, सहजता और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी भूमिकाओं के लिए उन्हें दर्शकों एवं समीक्षकों से समान रूप से सराहना प्राप्त हुई है। रंगमंच और सिनेमा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान और प्रशंसा मिल चुकी है।

यह कार्यशाला 29 एवं 30 जनवरी 2026 को सनबीम एकेडमी, समनेघाट, परिसर में आयोजित की गई, जिसमें विद्यालय के विभिन्न शाखाओं के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ‘बाल रंगशाला’ का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर छिपी रचनात्मक प्रतिभा को निखारना, आत्मविश्वास बढ़ाना तथा उन्हें प्रभावी संवाद, मंचीय प्रस्तुति और भाव-अभिव्यक्ति की कला से परिचित कराना रहा।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को अभिनय की मूलभूत तकनीकों के साथ-साथ शरीर भाषा, आवाज़ के उतार-चढ़ाव, मंच पर उपस्थिति, टीमवर्क और कल्पनाशील सोच जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विभिन्न अभ्यासों, खेलों और लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों को यह सिखाया गया कि किस प्रकार रंगमंच न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि व्यक्तित्व विकास और आत्म-अभिव्यक्ति का सशक्त मंच भी है।कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों द्वारा दी गई लघु प्रस्तुतियों ने दर्शकों को अत्यंत प्रभावित किया। सनबीम एकेडमी प्रबंधन ने बताया कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, संवेदनशीलता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में सहायक सिद्ध होती हैं।

कार्यशाला में भाग लेने वाले विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने इस अनुभव को अत्यंत प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक एवं स्मरणीय बताया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन की सराहना की।


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