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बीएचयू में पशु जीवविज्ञान पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ICAB-2026 का शुभारंभ



 29/Jan/26

वाराणसी, 29.01.2026. काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अपने वैज्ञानिक कार्यों को उत्पादों के रूप में विकसित करने का प्रयास करें, ताकि शोध वास्तव में प्रभावी और सार्थक सिद्ध हो सके। प्रो. चतुर्वेदी पशु जीवविज्ञान: चुनौतियाँ एवं अवसर (ICAB-2026)’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। यह सम्मेलन विज्ञान संस्थान के जन्तु विज्ञान विभाग और जूलॉजिकल सोसाइटी, कोलकाता के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। संस्थान के एस. एस. जोशी सभागार में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति ने कहा कि यह सम्मेलन विशेष रूप से जन्तु विज्ञान के क्षेत्र में सीमाओं को तोड़ने तथा पशु चिकित्सा विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान एवं संबद्ध अनुशासनों के साथ सहयोग को विस्तार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रो. चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में कहा कि मूल विज्ञान को केवल बौद्धिक साधना या आत्म-प्रशंसा के माध्यम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे समाज पर प्रत्यक्ष, सार्थक और दीर्घकालिक प्रभाव उत्पन्न करने वाले सशक्त उपकरण के रूप में समझा जाना चाहिए। उन्होंने अकादमिक जीवन में इनक्यूबेशन की बढ़ती महत्ता को भी रेखांकित किया। उन्होंने बीएचयू परिसर में सशक्त इनक्यूबेशन केंद्र की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए सहयोगियों से आग्रह किया कि वे अपने वैज्ञानिक अनुसंधान की बाजार संभावनाओं के प्रति सजग रहें।

जूलॉजिकल सोसाइटी, कोलकाता के अध्यक्ष प्रो. सुमित होमचौधुरी ने जन्तु विज्ञान को आगे बढ़ाने में अकादमिक सहयोग, वैज्ञानिक संवाद और नवाचार की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन सोसाइटी द्वारा कोलकाता विश्वविद्यालय, मद्रास विश्वविद्यालय, जेएनयू, विश्व-भारती तथा अब काशी हिंदू विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थानों के सहयोग से संचालित दीर्घकालिक अकादमिक गतिविधियों की परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं को वरिष्ठ वैज्ञानिकों से सक्रिय संवाद करने, उनके अनुभवों से सीखने तथा युवा नवाचार को वैज्ञानिक नैतिकता और ईमानदारी के साथ जोड़ने के लिए प्रेरित किया।

विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. राजेश कुमार श्रीवास्तव ने विज्ञान संस्थान का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने मूल विज्ञानों की सशक्त स्थिति और विभागों के सतत प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा कि बीएचयू के जीवन विज्ञान, जिनमें वनस्पति विज्ञान और प्राणीशास्त्र शामिल हैं, अब भारत और एशिया के शीर्ष संस्थानों में सम्मिलित हैं। जन्तु विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अरविंद कुमार सिंह ने विभाग का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

सम्मेलन की संयोजक प्रो. स्वाती मित्तल ने अपने स्वागत संबोधन में कार्यक्रम के उद्देश्यों और संरचना का उल्लेख करते हुए इसकी अंतर्विषयक प्रकृति और शैक्षणिक महत्ता को रेखांकित किया। उद्घाटन सत्र का समापन सम्मेलन की सार-संक्षेप पुस्तिका (एब्स्ट्रैक्ट बुक) के विमोचन के साथ हुआ, जिसके पश्चात आयोजन सचिव डॉ. गौतम गीता जे. द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. श्रुति आर. हंसदा द्वारा किया गया।

तीन दिवसीय यह सम्मेलन (29–31 जनवरी, 2026) पशु जीवविज्ञान के विविध क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों और अवसरों पर वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के बीच गहन विचार-विमर्श हेतु एक सशक्त मंच प्रदान करेगा।

 


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