वाराणसी। कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध व्यापार से जुड़े मामले में पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। शुभम जायसवाल के करीबी तीन अभियुक्तों को थाना कोतवाली पुलिस और एस.आई.टी. की संयुक्त टीम ने नेपाल बार्डर रोड, सिद्धार्थनगर से गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त वाराणसी के दिशा-निर्देश और पुलिस उपायुक्त काशी ज़ोन एवं अपर पुलिस उपायुक्त काशी ज़ोन के पर्यवेक्षण में की गई।
गिरफ्तार अभियुक्तों में आकाश पाठक उर्फ लल्ली, विकास सिंह नरवे और अंकित कुमार श्रीवास्तव शामिल हैं। ये तीनों लंबे समय से फरार थे और देश छोड़कर नेपाल भागने की फिराक में थे। सर्विलांस सेल और साइबर सेल से प्राप्त सूचनाओं और मुखबिर की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने उन्हें 27 जनवरी 2026 को सिद्धार्थनगर से गिरफ्तार किया। इनके खिलाफ थाना कोतवाली में दर्ज मामला में धारा 26 डी एनडीपीएस एक्ट के साथ-साथ बढ़ोत्तरी धारा 61(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस और धारा 8/21/29 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है।
पूछताछ में अभियुक्तों ने खुलासा किया कि वर्ष 2022 से वे शुभम जायसवाल के साथ मिलकर न्यूफैंसिडिल कफ सिरप और अन्य कोडीनयुक्त कफ सिरप का अवैध व्यापार कर रहे थे। उन्होंने अपने-अपने फर्मों के माध्यम से फर्जी ई-वे बिल, जीएसटी इनवॉइस और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए, जिससे दवा की आपूर्ति दिखाते हुए इसे विहार, बंगाल, त्रिपुरा और बांग्लादेश तक भेजा गया। इस अवैध व्यापार से उन्होंने हवाला के माध्यम से करोड़ों रुपये कमाए।
आकाश पाठक ने बताया कि शुरुआत में न्यूफैंसिडिल की दैनिक बिक्री लगभग 500 बोतल तक थी। इसके बाद उन्होंने शुभम जायसवाल, उनके पिता भोला प्रसाद जायसवाल और कई अन्य व्यापारियों के साथ मिलकर इस व्यापार को बड़े स्तर पर बढ़ाया। प्रारंभ में दवा को विहार और बंगाल के रास्ते तस्करी किया जाता था। बाद में शैली ट्रेडर्स नामक फर्म रांची, झारखंड के माध्यम से व्यापार को और संगठित किया गया।
विकास सिंह ने बताया कि 2022 में सप्तसागर मंडी में उनकी शुभम जायसवाल से मुलाकात हुई। इसके बाद उन्होंने न्यूफैंसिडिल कफ सिरप की अधिक कमाई के लिए अपनी फर्म देवनाथ फार्मेसी खोली। उन्होंने स्वीकार किया कि शैली ट्रेडर्स से वाराणसी के लिए सप्लाई होने वाला माल केवल कागज पर था और वास्तविक माल हवाला के माध्यम से बांग्लादेश और अन्य राज्यों में भेजा जाता था। उन्होंने अपनी फर्म की पूरी जिम्मेदारी अंकित कुमार श्रीवास्तव को सौंपी, जिन्होंने जौनपुर में पूर्वांचल एसोसिएट्स नामक फर्म के माध्यम से भी तस्करी की।
अंकित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि वह विकास सिंह की फर्म के लिए फर्जी ई-वे बिल और जीएसटी इनवॉइस बनाता था। उन्होंने जौनपुर में अपनी फर्म के माध्यम से कई बार न्यूफैंसिडिल कफ सिरप की तस्करी की। तीनों अभियुक्तों ने यह भी खुलासा किया कि इस अवैध व्यापार से उन्होंने करोड़ों रुपये कमाए और आलीशान जीवन जी रहे थे।
गिरफ्तार अभियुक्तों में आकाश पाठक और विकास सिंह के नाम पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित था। अंकित कुमार श्रीवास्तव पूर्व में जौनपुर में दर्ज मामले में वांछित था।
गिरफ्तारी में शामिल पुलिस टीम की सूची इस प्रकार है:
• दया शंकर सिंह, प्रभारी निरीक्षक थाना कोतवाली, वाराणसी
• विकास पाण्डेय, सदस्य एस.आई.टी.
• अंकित सिंह, थाना कोतवाली/एस.आई.टी.
• मनीष सिंह, सदस्य एस.आई.टी.
• अजीत मौर्य, सदस्य एस.आई.टी.
• अमन सिंह, थाना कोतवाली/एस.आई.टी.
• अखिलेश कुमार, थाना कोतवाली/एस.आई.टी.
• नीरज मौर्या, सदस्य एस.आई.टी.
• सुमित शाही, सदस्य एस.आई.टी.
• अश्विनी सिंह, सर्विलांस सेल, वाराणसी
• विराट सिंह, साइबर सेल, वाराणसी
पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने बताया कि अवैध व्यापार के दौरान सभी फर्मों से नकदी और आरटीजीएस के माध्यम से भारी रकम जमा की गई और तय कमीशन के अनुसार वितरित की गई। उन्होंने स्वीकार किया कि इस प्रक्रिया में उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की और लक्ज़री लाइफस्टाइल जी रही थी।
वाराणसी पुलिस ने इस गिरफ्तारी को अवैध दवा तस्करी और हवाला के माध्यम से करोड़ों रुपये कमाने वाले गिरोह पर बड़ी चोट बताया। पुलिस ने कहा कि यह गिरफ्तारी उस अभियान का हिस्सा है जो अपराधों की रोकथाम, चोरी-लूट की घटनाओं के अनावरण और फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए लगातार चलाया जा रहा है।
गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और पुलिस ने इस मामले में समाज और कानून व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण सफलता करार दी है।
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