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मणिकर्णिका घाट का पुनर्विकास काशी की आत्मा को दे रहा नया स्वरूप : डॉ. दयाशंकर मिश्र "दयालु" राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार



 21/Jan/26

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ₹17.56 करोड़ की लागत से मणिकर्णिका घाट का गरिमामयी पुनर्विकास किया जा रहा है। आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु ने स्पष्ट किया कि सभी मूर्तियाँ, शिल्पकृतियाँ और मंदिर पूर्णतः सुरक्षित हैं तथा कार्य पूर्ण होने के बाद आकृतियाँ यथास्थान पुनः स्थापित की जाएंगी।

वाराणसी, 20 जनवरी। मणिकर्णिका घाट को लेकर हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर उठे विवादों पर प्रदेश के आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में काशी आज अपने दिव्य और भव्य स्वरूप के कारण पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही है। वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 7.26 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आगमन के साथ वाराणसी ने नया इतिहास रचा है।

उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के बाद अब मणिकर्णिका घाट का समग्र और गरिमामयी पुनर्विकास काशी की आध्यात्मिक आत्मा को और अधिक सशक्त बना रहा है। मोक्ष के इस पावन द्वार को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु हितैषी बनाने के उद्देश्य से ₹17.56 करोड़ की लागत से रैंप, वुड प्लाजा, व्यूइंग एरिया, बेहतर एक्सेस पाथ, रूफटॉप एवं वीआईपी सीटिंग जैसी आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।

आयुष मंत्री ने बताया कि इस परियोजना की नींव वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी गई थी और इसे वर्ष 2026 तक पूर्ण किया जाना है। परियोजना का क्रियान्वयन रुपा फाउंडेशन द्वारा अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) प्रतिबद्धताओं के अंतर्गत किया जा रहा है, जो पिछले एक वर्ष से निरंतर प्रगति पर है।

उन्होंने कहा कि पुनर्विकास कार्य के अंतर्गत दाह-संस्कार से जुड़ी व्यवस्थाओं जैसे चिता प्लेटफॉर्म, लकड़ी भंडारण एवं विक्रय क्षेत्र, पूर्व-क्रिया स्थल, मुंडन क्षेत्र, आगंतुकों के बैठने की सुविधा, शौचालय और पेयजल व्यवस्था को बेहतर और सुव्यवस्थित किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं और परिजनों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

जनसंपर्क अधिकारी गौरव राठी द्वारा जारी विज्ञप्ति में मंत्री ने स्पष्ट किया कि घाट की सीढ़ियों पर चल रहे पुनर्निर्माण कार्य के दौरान ‘मढ़ी’ की दीवारों पर स्थापित कुछ आकृतियाँ और शिल्पकृतियाँ अस्थायी रूप से अपनी जगह से हट गई थीं। इन सभी मूर्तियों और शिल्पकृतियों को सुरक्षित रूप से एकत्र कर संरक्षण में रखा गया है और कार्य पूर्ण होते ही उन्हें उनके मूल स्थान और स्वरूप में पुनः स्थापित किया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मणिकर्णिका घाट पर स्थित मसानेनाथ मंदिर, महाकाल मंदिर, तारकेश्वर महादेव मंदिर सहित सभी मंदिर पूर्णतः सुरक्षित हैं और उन्हें किसी प्रकार की कोई क्षति नहीं पहुंचाई गई है। सोशल मीडिया पर मंदिरों को नुकसान पहुंचाए जाने के जो दावे किए जा रहे हैं, वे भ्रामक और तथ्यहीन हैं।

डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार माँ गंगा, पावन घाटों और सनातन परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वर्षों तक मणिकर्णिका घाट की उपेक्षा करने के बाद अब भ्रम फैलाकर विरोध की राजनीति की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जो मणिकर्णिका घाट कभी अव्यवस्था और गंदगी का प्रतीक था, वही आज विश्वस्तरीय सुविधाओं और आध्यात्मिक गरिमा के साथ वैश्विक पहचान की ओर बढ़ रहा है। आज काशी केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि आस्था, विरासत और विकास के संगम के रूप में विश्व पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रही है।


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