वाराणसी। कला प्रकाश एवं संगीत एवं मंच कला संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में महान तबला सम्राट पद्म विभूषण उस्ताद ज़ाकिर हुसैन को समर्पित श्रद्धांजलि कार्यक्रम “Echoes of Laya” का आयोजन मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को सायं 4.00 बजे, पं. ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह, बीएचयू में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के आरंभ में दिवंगत उस्ताद ज़ाकिर हुसैन को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उनके जीवन, व्यक्तित्व एवं संगीतिक अवदान पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
इसके पश्चात आयोजित संवाद सत्र में मुख्य वक्ता उस्ताद फ़ज़ल क़ुरैशी ने अपने भ्राता उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के व्यक्तित्व, साधना, अनुशासन, वैश्विक दृष्टिकोण तथा भारतीय ताल परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने में उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उस्ताद ज़ाकिर हुसैन को केवल एक महान कलाकार ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणास्रोत, आदर्श व्यक्तित्व एवं सच्चे साधक के रूप में स्मरण किया।
संवाद सत्र के उपरांत उस्ताद फ़ज़ल क़ुरैशी द्वारा पंजाब घराने की पारंपरिक बंदिशों के साथ तबला एकल प्रस्तुति दी गई। उनकी प्रस्तुति में उस्ताद अल्ला रक्खा खाँ द्वारा रचित रचनाओं के साथ-साथ पंजाब घराने की विशिष्ट संरचनाएँ सम्मिलित रहीं। सशक्त लयकारी, स्पष्ट बोल-विन्यास एवं गहन ताल-बोध ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर हारमोनियम संगत में श्री प्रेम चंद ने अत्यंत सधी हुई संगति प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में कला प्रकाश के अध्यक्ष अशोक कपूर, संगीत एवं मंच कला संकाय की प्रमुख प्रो. संगीता पंडित, वाद्य संगीत विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश शाह, प्रो. प्रविण उद्धव, संयोजक अभिजीत अग्रवाल, सचिव अनिल नगर, डॉ. अनुराधा रातुरी एवं डॉ.आशीष कुमार जायसवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस संगीतमय संध्या में बनारस की संगीत परंपरा से जुड़े अनेक विशिष्ट कलाकार एवं विद्वान उपस्थित रहे, जिनमें पं. पूरन महाराज (पं. किशन महाराज के सुपुत्र), पं. कन्हैया लाल मिश्र, पं. भोलनाथ, पं. सुखदेव मिश्र, किशोर मिश्र, ललित कुमार, प्रो. वीरेंद्र नाथ मिश्र, प्रेम नारायण जी, अनुप मिश्र सहित प्रदर्शन कला संकाय के शिक्षकगण, कर्मचारी, विद्यार्थी, शोधार्थी तथा वाराणसी के अनेक संगीतप्रेमी शामिल रहे।
यह कार्यक्रम उस्ताद ज़ाकिर हुसैन की स्मृति को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ-साथ भारतीय ताल परंपरा एवं पंजाब घराने की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण सिद्ध हुआ।