मणिकर्णिका घाट का पुनर्निर्माण: नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने उठाए आरोपों पर रखा पूरा सच
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पुनर्निर्माण को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। कुछ लोग इसे लेकर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरी स्पष्टता के साथ कहा है कि यहां किसी भी तरह की मनमानी या तोड़फोड़ नहीं हो रही। नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में चल रहे इस ऐतिहासिक परियोजना के उद्देश्य और सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। घाट की पवित्रता और श्रद्धालुओं की आस्था को बनाए रखते हुए किया जा रहा विकास, अब हर आरोप को पीछे छोड़ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्थित विश्व प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर पुनर्निर्माण कार्य को लेकर उठे सवालों और तोड़फोड़ के आरोपों पर उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास मंत्री एके शर्मा का बड़ा बयान सामने आया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि मणिकर्णिका घाट पर जो भी कार्य किया जा रहा है वह परंपरा, आस्था और धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखकर पूरी तरह नियोजित तरीके से किया जा रहा है।
नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने कहा कि मणिकर्णिका घाट केवल एक घाट नहीं बल्कि सनातन संस्कृति और मोक्ष की परंपरा का केंद्र है। यहां किसी भी प्रकार की मनमानी या अवैध तोड़फोड़ नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुनर्निर्माण के नाम पर जो कार्य चल रहा है उसका उद्देश्य घाट की मूल पहचान को सुरक्षित रखते हुए सुविधाओं का विकास करना है।
मंत्री एके शर्मा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं वाराणसी के विकास को लेकर बेहद संवेदनशील हैं और हर परियोजना में स्थानीय परंपराओं, पुरातात्विक महत्व और धार्मिक भावनाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। मणिकर्णिका घाट पर चल रहा कार्य भी इसी सोच के तहत किया जा रहा है।
उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि कुछ लोग बिना तथ्य जाने भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य घाटों को स्वच्छ, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना है, न कि उनकी पवित्रता या परंपरा से खिलवाड़ करना।
नगर विकास मंत्री ने भरोसा दिलाया कि मणिकर्णिका घाट पर किसी भी प्रकार का ऐसा कार्य नहीं होगा जिससे उसकी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को नुकसान पहुंचे। सभी निर्माण और पुनर्विकास कार्य विशेषज्ञों की निगरानी में और नियमों के अनुसार किए जा रहे हैं।
योगी सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि बनारस के सभी घाटों का विकास प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप किया जा रहा है, जिसमें आस्था और आधुनिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाए रखना प्राथमिकता है।