वाराणसी। पैथालॉजी कर्मी से रंगदारी मांगने के बहुचर्चित मामले में आरोपी बीएचयू छात्र नेता को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम द्वितीय) पूनम पाठक की अदालत ने जंसा निवासी बीएचयू छात्र नेता प्रशांत गिरी को 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें एवं बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया।
आरोपी की ओर से अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव के साथ नरेश यादव, चंद्रबली पटेल एवं संदीप यादव ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा, जिसके बाद कोर्ट ने जमानत मंजूर की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी मुकदमा शिवेन्द्र प्रताप सिंह ने 22 नवंबर 2025 को लंका थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। वादी का आरोप था कि वह डॉक्टर लाल पैथलैब्स, वाराणसी में कार्यरत है और आरोपी प्रशांत गिरी पिछले 30 दिनों से उससे बीएचयू परिसर व लंका क्षेत्र में मिलकर रंगदारी की मांग कर रहा था।
डर के कारण वादी ने एक-दो बार आरोपी को पैसा भी दिया। आरोप है कि 18 नवंबर 2025 को बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में आरोपी ने उससे 50 हजार रुपये की रंगदारी मांगी और लगातार फोन कर दबाव बनाया।
वादी के अनुसार, 21 नवंबर 2025 को बीएचयू स्थित आईएमएस के पास कैन्टीन पर जलपान के दौरान आरोपी ने उसके साथ गाली-गलौज की, मारपीट की और डंडे से जानलेवा हमला किया। साथ ही धमकी दी कि यदि अगली सुबह तक पैसा नहीं दिया गया तो जान से मार देगा।
इस मामले में लंका पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रंगदारी, मारपीट और जान से मारने की धमकी सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।