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बाबू जगत सिंह कोठी में क्रांतिकारी पंचांग 2026 का लोकार्पण हुआ, और पद्मभूषण राम बहादुर राय ने बाबू जगत सिंह को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की वकालत की



 20/Dec/25

वाराणसी। शुक्रवार को बाबू जगत सिंह कोठी में मातृभूमि सेवा संस्था द्वारा तैयार सातवां वार्षिक क्रांतिकारी पंचांग 2026 का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती शिशु मंदिर की छात्राओं द्वारा वंदे मातरम गीत से हुई।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि पद्मभूषण राम बहादुर राय ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि बाबू जगत सिंह की कोठी को राष्ट्रीय स्मारक बनाया जाए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि इतिहास वर्तमान को अतीत से जोड़ता है और भविष्य की दृष्टि देता है। स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री ने उन अनाम क्रांतिकारियों को खोजने का आह्वान किया था, जिनका योगदान स्वतंत्रता संग्राम में रहा।

राम बहादुर राय ने कहा कि 1799 में काशी में स्वतंत्रता का युद्ध लड़ा गया और बाबू जगत सिंह ने अपने क्रांतिकारी साथियों के साथ पूरी बहादुरी से अंग्रेजों का सामना किया। उनकी गिरफ्तारी में अंग्रेजों को दो महीने का समय लगा, जो उनके प्रभाव का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सारनाथ की खुदाई में मिले मंजूषा को भारत सरकार को सुरक्षित करना चाहिए।

मातृभूमि सेवा संस्था के संस्थापक एवं राष्ट्रीय सचिव राकेश कुमार ने कहा कि अनाम क्रांतिकारियों के शोध और खोज के लिए उनके घरों तक पहुंचना आवश्यक है। बाबू जगत सिंह के इतिहास को प्रदीप नारायण सिंह ने अपनी छठवीं पीढ़ी तक खोजकर समाज के समक्ष रखा।

विशिष्ट अतिथि के रूप में रविंद्र जायसवाल, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने आयोजन की सराहना की और योगदान का आश्वासन दिया।

इतिहासकार और बाबू जगत सिंह पुस्तक के लेखक डॉ हामिद आफाक कुरैशी ने कहा कि बाबू जगत सिंह सर्वगुण संपन्न व्यक्तित्व थे और उनके अन्य पहलुओं पर शीघ्र ही पुस्तक प्रकाशित करने का प्रयास किया जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सारनाथ के भंते डॉ के सिरी सुमेध थेरो ने कहा कि अपनी मातृभूमि स्वर्ग से भी बड़ी है और बौद्ध ग्रंथों में काशी के अनेक राजाओं का उल्लेख मिलता है।

संस्था के न्यासी चंद्रकांत ने बताया कि हर वर्ष मातृभूमि सेवा संस्था द्वारा प्रकाशित क्रांतिकारी पंचांग की डिजाइनिंग में राष्ट्रीय संयोजक संजय कुमता का योगदान अतुलनीय है।

अतिथियों का स्वागत प्रदीप नारायण सिंह ने किया और कार्यक्रम का संचालन डॉ (मेजर) अरविंद कुमार सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन राजेंद्र कुमार दूबे ने किया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें डॉ नागेंद्र पांडेय, अशोक आनंद, पद्मश्री चंद्रशेखर सिंह, केदारनाथ सिंह, विक्रमा राय, डॉ राम सुथार सिंह, प्रोफेसर उपेंद्र मणि त्रिपाठी, प्रोफेसर ध्रुव कुमार, प्रोफेसर अरविंद जोशी, प्रोफेसर प्रवेश भारद्वाज, डॉ राजकुमार सिंह, प्रेम कपूर, परमजीत सिंह अहलूवालिया, श्रीमती अंकिता खत्री, गोकुल शर्मा, केदार तिवारी, नरेंद्र नाथ मिश्रा, हिमांशु उपाध्याय, डॉ कविंद्र नारायण, पुरुषोत्तम मिश्रा, आचार्य दिनेश पांडे, महेश चंद्र अवनीधर, अरविंद सिंह (एडवोकेट), चित्रकार मनीष खत्री, उपेंद्र गुप्ता, चार्टर्ड अकाउंटेंट शिशिर बाजपेई, व्यापार मंडल के संजय सिंह बिल्लू, शमीम, विकास यादव, एहसान अहमद, नीची बाग गुरुद्वारा के मुख्य ग्रंथी शामिल रहे।


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