MENU

काशी तमिल संगमम् 4.0: “समृद्ध महिला, समृद्ध भारत” के विज़न पर केंद्रित शैक्षणिक सत्र का आयोजन



 15/Dec/25

वाराणसी काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत समृद्ध महिला, समृद्ध भारतविषय पर एक शैक्षणिक सत्र का सफल आयोजन किया गया। इस सत्र में भारत के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका पर विशेष बल दिया गया। सत्र का संयोजन डॉ. गौरी बालाचंदर, आईआईटी (बीएचयू), द्वारा किया गया। स्वागत उद्बोधन देते हुए प्रो. आशीष त्रिपाठी, हिंदी विभाग, ने तमिल को भारत की प्राचीनतम जीवंत भाषाओं में से एक बताया। उन्होंने इस सत्र को तमिल और प्राकृत भाषाई परंपराओं का प्रतीकात्मक संगम निरूपित किया। उन्होंने रानी वेलु नाचियार, डॉ. मुत्तुलक्ष्मी रेड्डी, मूवलूर रामामिर्थम, एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी तथा डॉ. इंदिरा नुई जैसी प्रेरणादायी महिला विभूतियों का स्मरण किया, जिन्होंने महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई।

अर्थशास्त्र विभाग की प्रो. मनीषा मेहरोत्रा ने GI टैग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह स्वदेशी उत्पादों के संरक्षण और संवर्धन में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के 70 GI-टैग उत्पादों में से 33 वाराणसी से संबंधित हैं। एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) और लखपति दीदीजैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने गरीबी उन्मूलन और महिला-नेतृत्व उद्यमिता को बढ़ावा देने में इनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी साझा किया कि तमिलनाडु में 33% एमएसएमई व्यवसाय महिलाओं के स्वामित्व में हैं, जो आर्थिक क्षेत्र में महिलाओं की सशक्त भागीदारी को दर्शाता है।

पद्मश्री रजनीकांत (भारत के GI मैन) ने इस अवसर को गर्व और पुण्य का विषय बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकलके दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए इसे हथकरघा और पारंपरिक शिल्प के माध्यम से महिला सशक्तिकरण से जोड़ा। उन्होंने काशी की हजारों वर्षों की निरंतर सभ्यतागत धारा पर प्रकाश डाला तथा बताया कि काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास के बाद पिछले चार वर्षों में लगभग 25 करोड़ श्रद्धालु एवं पर्यटक काशी आए हैं। उन्होंने विरासत-आधारित आजीविकाओं के संरक्षण में GI टैग के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित किया।

प्रख्यात विदुषी एवं संगीतज्ञ श्रीमती शिवश्री स्कंदप्रसाद ने कहा कि काशी और तमिलनाडु के बीच उन्हें कोई सांस्कृतिक दूरी महसूस नहीं होती, क्योंकि दोनों ही गहन आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी हैं। उन्होंने वैदिक काल से मध्यकाल तक महिलाओं की ऐतिहासिक यात्रा पर चर्चा करते हुए कहा कि समृद्धि स्वयं स्त्री तत्व श्रीका प्रतीक है। उन्होंने भक्तिको भारत को क्षेत्रीय और भाषाई भेदों से परे जोड़ने वाली एकीकृत भाषा बताया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से महिलाएँ परिवार की वित्तीय प्रबंधक और भावनात्मक आधार रही हैं। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए श्रीमति स्कंदप्रसाद ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा राष्ट्र को दिशा देती है और अर्थसे पहले धर्मका होना अनिवार्य है। उन्होंने 300 विद्यार्थियों की काशी यात्रा का भी उल्लेख किया, जो तमिल भाषा सीखने हेतु काशी आएंगे।

महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र, सामाजिक विज्ञान संकाय की प्रो. मीनाक्षी झा ने महिला आंदोलनों की जड़ों को औपनिवेशिक काल से जोड़ते हुए बताया कि मद्रास प्रेसिडेंसी महिला संगठनों का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी से प्रेरित सत्याग्रह आंदोलन में तमिल महिलाओं की सहभागिता पर प्रकाश डाला, जिसमें दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी के अनुभवों का भी प्रभाव रहा। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से स्वतंत्र और सशक्त महिलाएँ भारत को मजबूत बनाती हैं और यह रेखांकित किया कि महिलाओं की मुक्ति महिलाओं को दिया गया उपहार नहीं, बल्कि मानवता को दिया गया उपहार है।

सत्र का समापन एकीकृत ग्रामीण विकास केंद्र के डॉ. आलोक पांडेय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। शैक्षणिक सत्र ने काशी तमिल संगमम् 4.0 के मूल संदेश को पुनः स्थापित किया कि भारत की भविष्य की समृद्धि महिलाओं के सशक्तिकरण, गरिमा और नेतृत्व से अविभाज्य रूप से जुड़ी है। कार्यक्रम के अंतर्गत दो पैनल चर्चाएँ भी आयोजित की गईं। ओंकारनाथ सभागार में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) पर आयोजित चर्चा में प्रो. मीनाक्षी झा ने तमिलनाडु से आई महिला प्रतिनिधियों को मुद्रा ऋण योजना एवं उसके विभिन्न घटकों की जानकारी दी। उन्होंने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने और स्वरोज़गार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से योजना की उपलब्धियों के साथ-साथ पीएमईजीपी, पीएमएवाई, स्टैंड-अप इंडिया और आयुष्मान भारत जैसी अन्य केंद्रीय योजनाओं की भी जानकारी दी।

वाराणसी के उप आयुक्त (ग्रामीण विकास) पवन सिंह ने महिला SHG सदस्यों द्वारा अर्जित आय और इसके पारिवारिक एवं उपभोक्ता लाभों पर प्रकाश डाला। अविनाश अग्रवाल ने पीएम विश्वकर्मा योजना और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी दी। लाभार्थी आरती सिंह ने बताया कि इस योजना से उनके बिजली खर्च में कैसे कमी आई। तमिलनाडु की प्रतिनिधि श्रीमती ललिता, श्रीमती राजम्मा और श्रीमती रेवती ने मुद्रा एवं अन्य योजनाओं से संबंधित प्रश्न रखे। सत्र का संचालन एवं अनुवाद सुश्री जगतीश्वरि द्वारा किया गया।

एक अन्य सत्र, जो आइडिएशन, इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन (I-3) सेंटर में आयोजित हुआ, में प्रो. मनोज कुमार मेशराम (फैकल्टी-इन-चार्ज, I-3 सेंटर) ने स्वयं सहायता समूहों की भूमिका और कार्यप्रणाली पर व्याख्यान दिया। तमिलनाडु के प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार SHGs ने उनके जीवनयापन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। इस सत्र में अनुवाद सहयोग डॉ. गौरी बालाचंदर द्वारा प्रदान किया गया।


इस खबर को शेयर करें

Leave a Comment

3910


सबरंग