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काशी तमिल संगमम् 4.0 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिद्धा प्राचीन चिकित्सा पद्धति से कर रहा है नि:शुल्क उपचार



 12/Dec/25

प्रतिदिन 200–300 रोगी इन स्टॉलों पर उपचार के लिए पहुंच रहे हैं

वाराणसी। काशी तमिल संगमम् 4.0 में पहली बार नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिद्धा, चेन्नई की ओर से स्टॉल संख्या 67 और 68 पर प्राचीन चिकित्सा पद्धति 'सिद्धा' के जरिए नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। जहां प्रतिदिन 200 से 300 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। यह संस्थान मिनिस्ट्री ऑफ आयुष के अधीन कार्यरत है। स्टॉल पर आने वाले सभी मरीजों को मुफ्त औषधियां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन दोनों स्टॉलों पर कुल 7 डॉक्टर, 1 फार्मासिस्ट और 1 अटेंडर तैनात हैं। उपस्थित सभी डॉक्टर वर्तमान में अपने एमडी ( मास्टर इन सिद्धा मेडिसिन) की पढ़ाई कर रहे हैं। स्टॉल पर डॉ. अरुणेश, डॉ. अरिहरि कृष्णन, डॉ. एस. बग्गियावेलन सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं।

डॉ. अरुणेश के अनुसार, प्रतिदिन 200–300 रोगी इन स्टॉलों पर उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, जो सिद्धा चिकित्सा पद्धति की लोकप्रियता को दर्शाता है।

सिद्धा चिकित्सा दक्षिण भारत की प्राचीन धरोहर

सिद्धा दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु की अत्यंत लोकप्रिय और प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। यह भारत में कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त 5 प्रमुख चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। इस प्रणाली की शुरुआत 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व मानी जाती है और इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथ थोल्काप्पियममें भी मिलता है।

सिद्धा चिकित्सा का कार्य-तंत्र आयुर्वेद से मिलते-जुलते तत्व रखता है, लेकिन इसे विशिष्ट बनाता है नाड़ी परीक्षण, जिसके माध्यम से न केवल वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति बल्कि संभावित भविष्य के स्वास्थ्य जोखिमों का भी आकलन किया जाता है।

रोगियों की प्रतिक्रिया

सिद्धा स्टॉल पर लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा है। कई रोगी अपनी सकारात्मक प्रगति साझा कर रहे हैं। एक रोगी पिंटू सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले उनका हाथ टूटा था, और सिद्धा चिकित्सा लेने के बाद अब वह पूरी तरह ठीक है। अब वह अपनी माँ के लिए दवा लेने पहुंचे। संस्थान के अनुसार, उनके केंद्रों में कैंसर के शुरुआती चरणों के लिए भी ओपीडी संचालित होती है। वहीं, डायबिटीज ओपीडी में प्रतिदिन 300–400 मरीजों का इलाज किया जाता है।

 


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