वाराणसी। हिंदी तिथि पौष कृष्ण अष्टमी के अनुसार आज दिनांक 12 दिसंबर को भारतरत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी का जन्मोत्सव काशी हिंदू विश्वविद्यालय महामना प्रतिमा के समक्ष विश्वनाथ मंदिर परिसर में मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन मालवीय मिशन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, महामना परिवार एवं का.हि.वि.वि. घुमक्कड़ संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन करने के पश्चात हुआ।
कार्यक्रम के दौरान अपने अध्यक्षीय भाषण में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मालवीय मिशन एवं पूर्व कुलपति, केन्द्रीय विश्वविद्यालय गुजरात, प्रो रमाशंकर दूबे ने उपस्थित जन को संबोधित करते हुए कहा कि आज ही के दिन १८६१ को प्रयागराज में महामना का जन्म हुआ था। लेकिन उन्होंने भगवान शंकर के त्रिशूल एवं मां गंगा के तट पर बसी ज्ञान और अध्यात्म की नगरी सनातन संस्कृति की राजधानी बुद्ध, कबीर, रैदास, तुलसी, के तप से तापित काशी को अपना कर्म भूमि चुना , और यहां काशी हिंदू विश्वविद्यालय का स्थापना किया।
जब हमारा देश गुलाम था और 1834 में मैकाले भारत भ्रमण के लिए आया था। वापस जाकर ब्रिटिश पार्लियामेंट के अपने संबोधन में कहा था ,इस देश की भाषाएं एवं संस्कृति अलग हो सकती है। लेकिन पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकता इतनी मजबूत है और देश के लोग अपने देश से इतना प्रेम करते हैं। ऐसे देश पर शासन करना संभव नहीं है। हम भारत पर तभी शासन कर सकते हैं, जब वहां की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता को ध्वस्त कर सके। उनकी शिक्षा व्यवस्था को हम बदलें और पाश्चात्य शिक्षा लाकर साबित करने की कोशिश करें कि पाश्चात्य शिक्षा पद्धति श्रेष्ठ शिक्षा है। इसी क्रम में अंग्रेजों द्वारा 1857 में तीन विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई। जिनमें मद्रास, मुंबई और कोलकाता विश्वविद्यालय रहे। 1882 में पंजाब विश्वविद्यालय लाहौर की स्थापना की गई।1885 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। यहां साइंस टेक्नोलॉजी की पढ़ाई कम से कम पढ़ाया जाता था ,अंग्रेजी के साथ-साथ अंग्रेजीयत इतना हावी होने लगा हम अपनी संस्कृति और भाषा को भूलने लगे । ऐसी विषम परिस्थिति में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने निर्णय लिया की भारत के अंदर युवा लोगों को पढ़ने के लिए हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना भारत की सांस्कृतिक राजधानी काशी में होनी चाहिए। जहां पढ़ाई के साथ-साथ टेक्नोलॉजी भी हो धर्म भी हो संस्कृति भी हो। विशिष्ट अतिथियों का स्वागत माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र द्वारा प्रो हीरालाल पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम का संचालन विजय नाथ पाण्डेय राष्ट्रीय सचिव, मालवीय मिशन एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो प्रभाकर उपाध्याय ने किया। प्रमुख उपस्थित लोगों में प्रमील पाण्डेय जिला उपाध्यक्ष भारतीय मजदूर संघ, प्रो शैलेन्द्र गुप्ता उपाध्यक्ष मालवीय मिशन, प्रो राज कुमार मिश्र, प्रो रामानंद राय, प्रो बीरेंद्र सिंह, प्रो अनिल त्रिपाठी, डा दीनानाथ सिंह, ई दीनानाथ सिंह, डा संजय पाण्डेय, प्रो के एन त्रिपाठी, मनोज गुप्ता, नरेश पाण्डेय, बहादुर यादव, ताराचंद मेहरोत्रा, श्याम धर पाण्डेय, विनोद सिंह, विजय सिंह, अरुण मिश्रा, डा सुधाकर त्रिपाठी, प्रभाकर पाण्डेय, रमाशंकर राय, दिनेश चंद्र त्रिपाठी, डा गिरीशचंद्र त्रिपाठी, नरेंद्र त्रिपाठी, विकास जी, गुड्डू राय, मोहन पाण्डेय, एल बी यादव, परमानंद पाण्डेय, बीबी सिंह, जय शंकर पाण्डेय, डा ओपी तिवारी, सूरज प्रजापति, आर पी सिंह, आर पी राय, विद्यासागर सिंह, जगदीश शर्मा आदि रहे।