गोकर्ण पर आधारित अब तक का सबसे विस्तृत शोधकाव्य, Lord Shiva’s Abodes: Gokarn Across Bharat (2nd Edition), गोवा के पार्थगली मठ में हुए एक विशेष समारोह में लोकार्पित किया गया। यह अवसर मठ की 550वीं वर्ष-जयन्ती के पावन उत्सव के दौरान मिला। इस लोकार्पण समारोह को और भी ऐतिहासिक बना दिया सरस्वती परंपरा के दो तेजस्वी मठाध्यक्षों श्रीमद विद्याधीश तीर्थ स्वामीजी और श्रीमद संयमिंद्र तीर्थ स्वामीजी जिन्होंने अपने कर-कमलों से इस ग्रंथ को आशीष प्रदान किया।
यह Full-Colour Collector’s Edition 12 भागों और 82 अध्यायों में विस्तृत है, जिसमें यात्राओं और स्थल-अध्ययन का अद्वितीय संगम, प्राचीन ग्रंथों, पुराणों और महाकाव्यों की संदर्भ–दीप्त व्याख्याएँ, इतिहास, तीर्थ-परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर का विस्तृत मानचित्र और 20 पृष्ठों की विशद ग्रंथ-सूची है। इस पुस्तक को गोकर्ण पर अब तक का सबसे व्यापक शोध-ग्रंथ बनाती है।
कैलाश से लेकर श्रीलंका तक—एक दीर्घ आध्यात्मिक यात्रा, ग्रंथ में गोकर्ण की कथा अनेक परतों में खुलती है, रावण द्वारा आत्मलिंग लाने की प्राचीन परंपरा से, रामायण–महाभारत और भागवत के संदर्भों तक, परशुराम, आदि शंकराचार्य, कदंब, राष्ट्रकूट, होयसला, विजयनगर युगों की ऐतिहासिक छवियों तक के बारे में जानकारी मिलेगी। लेखक ने तिब्बत, नेपाल, कश्मीर, हरियाणा, काशी, ओडिशा, तमिलनाडु से लेकर श्रीलंका के प्राचीन गोकर्णेश्वर मंदिर तक—भारत और बाहर फैले गोकर्ण-सम्बंधित स्थलों का सजीव दस्तावेज़ प्रस्तुत किया है।
समारोह के दौरान दोनों मठाध्यक्षों द्वारा प्रदान किया गया आशीर्वाद लेखक के लिए समय के ठहर जाने जैसा क्षण रहा। मठ के वातावरण में आध्यात्मिकता, परंपरा और अनुसंधान का यह संगम दर्शकों को लंबे समय तक स्मरण रहेगा।