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अनाया रिजवान मौत मामला : वाराणसी कोर्ट के FIR आदेश के बाद मचा हड़कंप, हॉस्पिटल के प्रचार को भी मिली लीगल नोटिस



 11/Dec/25

वाराणसी। ASG Eye Hospital, वाराणसी में 7 वर्षीय बच्ची अनाया रिजवान की रेटिना सर्जरी के दौरान हुई मौत के मामले में माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी द्वारा FIR दर्ज करने के आदेश के बाद प्रकरण ने गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। अदालत ने धारा 173(4) बी.एन.एस.एस. के तहत थाना भेलूपुर को प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना शुरू करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। न्यायालय के अनुसार, 14 अक्टूबर 2025 को बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में ASG Eye Hospital में भर्ती कराया गया था। सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद उसकी स्थिति अचानक गंभीर हो गई। बिना स्पष्ट कारण बताए बच्ची को Matcare Hospital महमूरगंज स्थानांतरित किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अदालत ने एनेस्थीसिया की खुराक, ऑक्सीजन सप्लाई, पोस्टऑपरेटिव देखरेख और समय पर रेसुसिटेशन न दिए जाने को गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही माना है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ऑपरेशन से संबंधित एनेस्थीसिया चार्ट, ICU रिकॉर्ड, ऑपरेशन नोट्स और CCTV फुटेज जानबूझकर उपलब्ध नहीं कराए गए। डॉक्टरों के बयानों में भी गंभीर विरोधाभास पाए गए। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर विधिवत विवेचना कराना आवश्यक बताया। आदेश के बाद थाना भेलूपुर में FIR दर्ज करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

विवेचना में अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी को स्वतंत्र सहयोगी के रूप में शामिल करने की मांग की। पीड़ित परिवार ने अपने प्रार्थना-पत्र में यह भी मांग की थी कि विवेचना की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उनके अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी को स्वतंत्र सहयोगी (Independent Assistant/Observer) के रूप में जांच में शामिल किया जाए, ताकि साक्ष्यों की सुरक्षा बनी रहे और किसी प्रकार का पक्षपात न हो।

इस मामले में अब एक और अहम कानूनी पहलू भी जुड़ गया है। डॉ. प्रत्युष रंजन द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को लेकर स्वयं अनाया रिजवान की मां आफरीन रिजवान ने ही माननीय न्यायालय में अलग परिवाद पत्र दाखिल किया है। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि डॉक्टर ने अपने सोशल मीडिया बयानों में उन सभी सामाजिक वर्गोंपत्रकारों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पुलिसकर्मियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकोंपर गंभीर आरोप लगाए, जो अनाया को न्याय दिलाने की लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं।

आफरीन का कहना है कि इन पोस्टों के माध्यम से न्याय की लड़ाई लड़ रहे लोगों की छवि धूमिल करने और दबाव बनाने की कोशिश की गई, जिसे लेकर उन्होंने न्यायालय में विधिक कार्रवाई की मांग की है।

प्रकरण से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि डॉ. प्रत्युष रंजन द्वारा सरकार की विभिन्न योजनाओं का प्रचार अपने निजी अस्पताल और व्यावसायिक गतिविधियों में योजना मॉडलकी तरह किया जा रहा था। इसे लेकर उन्हें लीगल नोटिस भी भेजी गई, जिसमें सरकारी योजनाओं के नाम के कथित दुरुपयोग और व्यावसायिक लाभ से जोड़ने पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। हालांकि, अब तक इस नोटिस पर डॉक्टर की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया गया है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।

पीड़ित परिवार ने वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी जो कि देश के प्रधानमंत्री हैं तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज पर पूरा विश्वास व्यक्त किया और कहां मुझे पूरा विश्वास है कि वाराणसी पुलिस इस मामले में निष्पक्ष विवेचना कर कठोर कार्रवाई करेगी जो समाज में एक नजीर बने, और डॉक्टर लापरवाही करने से पहले 100 बार सोचें किस समाज में न्याय की लड़ाई लड़ने वाला एक बड़ा वर्ग अन्याय के खिलाफ अत्याचार और दमन के खिलाफ खड़ा होगा।

अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी, अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी, अधिवक्ता आशुतोष शुक्ला, अधिवक्ता राजकुमार तिवारी, अधिवक्ता आशुतोष सक्सेना अधिवक्ता दीपक वर्मा तथा उनकी टीम के अधिवक्ता साथियों के सहयोग से आज एक बड़ी जीत तक पहुंची है। अनाया की मां आफरीन बानो ने यह भी कहा कि आगे भी अधिवक्ताओं, पत्रकार बंधुओ समाज के प्रतिनिधि गण नेताओं व पुलिसकर्मियों का पूरा साथ मिलेगा और यह संघर्ष न्याय की अंतिम मंजिल पहुंचने  तक जारी रहेगा।


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