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वाराणसी मंडलायुक्त एस राजलिंगम ने किया सेज अगस्त्य वाहन अभियान का भव्य स्वागत



 10/Dec/25

वाराणसी। सेज अगस्त्य वाहन अभियान (SAVE), काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत आयोजित एक ऐतिहासिक कार रैली, आज नौ दिवसीय यात्रा पूर्ण कर काशी पहुँच गई। नमो घाट पर पहुंचने पर वाराणसी के आयुक्त एस.राजलिंगम ने कार रैली के प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया, जिससे इस आयोजन के प्रति उत्साह और सांस्कृतिक ऊर्जा का प्रदर्शन हुआ। यह अभियान, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य भारत की विविध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भाषायी एकता को उजागर करना तथा राज्यों के बीच जागरूकता और गर्व की भावना को सुदृढ़ करना है। लगभग 1520 कारों और लगभग 100 प्रतिभागियों वाली इस रैली ने कुल 2,460 किलोमीटर की दूरी तय की। इस यात्रा में महर्षि अगस्त्य से जुड़ा ऐतिहासिक मार्ग अपनाया गया, जो भारतीय ज्ञान परंपरा में तमिलनाडु के महत्व को रेखांकित करता है।

कार रैली ने तमिल और भारतीय विरासत में निहित प्राचीन सभ्यतागत मार्गों को पुनः खोजने का प्रयास किया, जिससे दोनों क्षेत्रों के सांस्कृतिक एवं पारंपरिक संगम को प्रदर्शित किया जा सके। 2 दिसंबर को प्रारंभ हुई यह रैली बुधवार को काशी पहुंचकर सम्पन्न हुई। इस ऐतिहासिक यात्रा में नौ राज्यों से होकर गुजरने वाले प्रतिभागियों ने इसे अद्भुत और समृद्ध अनुभवबताया। इस पवित्र यात्रा के दौरान टीम SAVE ने काबारतीश्वरर मंदिर, चिदंबरम नटराजार मंदिर के दर्शन किए और शंकरा मठ में विजयेन्द्र स्वामी से आशीर्वाद प्राप्त किया, जिसने उनके आध्यात्मिक अनुभव को और गहरा किया। गाँवों, कस्बों और शहरों से गुजरते हुए लोगों की आत्मीयता, सांस्कृतिक विविधता और उत्साह ने इस यात्रा को अत्यंत अर्थपूर्ण बना दिया।

इसके साथ ही रैली ने सिद्ध चिकित्सा पद्धति, उसके निवारक स्वास्थ्य दृष्टिकोण और समग्र जीवनशैली को बढ़ावा देने पर भी विशेष बल दिया। टीम ने इसे एक प्रेरणादायक और आशीर्वादपूर्ण अभियान बताते हुए भविष्य में भी इस मिशन को जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत काशी और तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए अनेक भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में प्रतिष्ठित संत अगस्त्य वाहन अभियानभी संचालित किया गया, जिसने तेनकासी से काशी तक की ऐतिहासिक यात्रा को पुनर्जीवित किया।

कार रैली ने पांड्य शासक आदि वीर पराक्रम पांडियन की गौरवशाली विरासत को भी नमन किया, जिन्होंने उत्तर भारत तक सांस्कृतिक एकता का संदेश पहुंचाया था और एक शिव मंदिर की स्थापना की, जिसके बाद तेनकासी को दक्षिण काशीकहा गया। इस मार्ग के माध्यम से रैली ने चेरा, चोल, पांड्य, पल्लव, चालुक्य और विजयनगर काल की सभ्यतागत विरासत को भी प्रदर्शित किया। साथ ही, इसने शास्त्रीय तमिल साहित्य, सिद्ध चिकित्सा और साझा सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जन-जागरूकता को भी बढ़ाया। यह अभियान काशी और तमिलनाडु के बीच प्राचीन संबंधों की पुनर्पुष्टि का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ।


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