भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति एवं भारत की नदियों को समर्पित रहा वार्षिकोत्सव
नर्सरी से कक्षा 6 तक के 380 से अधिक विद्यार्थियों की मंच प्रस्तुति बना आकर्षण का केंद्र
वाराणसी के प्रतिष्ठित विद्यालय सनबीम लहरतारा के प्रांगण में विद्यालय के वार्षिकोत्सव रेनबो 2025 का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष का वार्षिकोत्सव भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति एवं आविष्कारकों को समर्पित रहा। महान गणितज्ञ आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य, व्याकरण एवं उपकरणविद् पाणिनी, प्राचीन भारत के चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा के जनक चरक, सुश्रुत, नाट्यविद्या,भाव एवं रस के अधिष्ठाता भरतमुनि एवं भारतीय नीतिशास्त्र के अपराजेय गुरु चाणक्य को समर्पित इस कार्यक्रम में भारतीय प्राचीन शिक्षा पद्धति की अक्षुण्ण परम्परा को उजागर किया गया। प्रस्तुति में आत्मालाप के माध्यम से बच्चों ने उक्तलिखित किरदारों को जीवंत किया और दर्शकों तक यह बात पहुंचायी कि भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति हमेशा से सबसे वैज्ञानिक, आधुनिक और प्रयोगशाली रही है। भारत ने विज्ञान और समकालीन उपकरणों की नींव तब रखी जब विश्व के अन्य देश इससे अनाभिज्ञ थे। इसके अलावा विद्यार्थियों ने ब्रह्मपुत्र, कावेरी और भागीरथी समेत देश की महत्वपूर्ण नदियों और उनके किनारे बसी सभ्यता एवं लोककला को वाचन एवं नृत्य के माध्यम से उजागर किया। इस सम्पूर्ण कार्यक्रम में नर्सरी से कक्षा 6 तक के 380 से भी अधिक विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की।
वार्षिकोत्सव का शुभारंभ सनबीम शिक्षण समूह के अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक, उपाध्यक्ष श्रीमती भारती मधोक, निदेशिका श्रीमती अमृता बर्मन, सह-निदेशिका श्रीमती प्रतिमा गुप्ता एवं मानद निदेशक श्री हर्ष मधोक ने तुलसी वेदी पर दीप प्रतिस्थापना कर किया।
कार्यक्रम में सबसे पहले वर्षपर्यंत जिला, प्रदेश, राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर के विभिन्न क्षेत्रों में विजयी एवं पुरस्कृत हुए छात्र छात्राएं अपने पुरस्कार लेकर मंच पर प्रस्तुत हुए। जिससे सनबीम लहरतारा के छात्रों के वार्षिक पुरस्कार गौरव की छवि दर्शकों से सामने प्रस्तुत हुई।
इसके बाद विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती परवीन कैसर, विद्यार्थी एवं शिक्षकों ने विद्यालय का वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत किया। इस रिपोर्ट में सनबीम लहरतारा के राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सफल प्रतिभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
विद्यालय के संगीत एवं वाद्य विभाग के अंश अग्रवाल , दियान बोस, अमायरा शाह , अरिजीत चक्रवर्ती , अवंतिका मिश्रा , अपरिमिति गुप्ता , अन्मेश कुमार , युवराज लाहा , कियान अरोरा , सार्थक , श्लोक , आरूष, ऋषभ , समृद्ध एवं सृजन वर्मा समेत 83 विद्यार्थियों ने भारतीय राष्ट्रगीत वंदेमातरम् के 150 वर्षपूर्ति के अवसर पर मनमोहक प्रस्तुति दी।
इसके बाद के0 जी0 सेक्शन की ओर से अनिरुद्ध कुमार, दर्शन वाधवानी, विहान अग्रवाल , विराज रस्तोगी , आद्या सिंह , समृद्धि गोंड , तृषिका पाठक, यशिका अग्रवाल, सार्थक सिंह , वियान कोठरी, सार्थक सिंह, पाविका अग्रवाल, आद्विक दासगुप्ता, मानविक खोसला, निकित सेठ, हितार्थ सिंह, कुनीषा, परिधि कारवा, वैदिक यादव समेत 75 विद्यार्थियों ने तैत्तिरीय उपनिषद में लिखित पंचकोश पर केंद्रित नृत्य की प्रस्तुति की। नृत्य के माध्यम से अन्नमय कोष, मनोमय कोष, प्राणमय कोष , विज्ञानमय कोष एवं आनंदमय कोष के महत्त्ता पर प्रकाश डाला गया।
इसके बाद के0 जी0 सेक्शन की ओर से ही गीतिशा चौधरी वामिका जालान , गीतिका चौधरी, विराज सोनावाला, श्रीशा वर्मा , एकांशी गुजराती नंदिनी महेश्वरी , हुनर खन्ना , शिवाय पांडे , रिदान शाह , ग्रंथ लखमानी , आरव सिंह, तन्मय मोटवानी समेत ३३ विद्यार्थियों ने लीडरशिप अफर्मेशन मार्च के माध्यम से जीवन के 6 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लीडर बनने के गुण पर प्रकाश डाला।
सनबीम लहरतारा इस्तेमाल किये हुए फूलों से अगरबत्ती बनाने के जैविक कार्य में सक्रिय है। विगत कई महीनो से इजी लाइफ फाउंडेशन से साथ मिलकर इस्तेमाल किये हुए फूलों को इकठ्ठा कर उनसे सुगन्धित अगरबत्ती बनवा रहा है और इसके माध्यम से पर्यावरण को साफ रखने के साथ साथ गाँव की ज़रूरतमंद महिलाओं को रोज़गार प्रदान करने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसके प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से पेटल्स टू प्रेयर नाम के नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दीत्या गोयल, दर्श कुमार, विराज अग्रवाल, सुखमीत कौर, रीतिशा वाधवानी, श्रीजिता गुप्ता, श्रेया शुक्ल, इशानी मौर्या, नाविका शाह, अरण्या अरोरा, अदिति सिंह एवं लावण्या समेत 65 विद्यार्थियों ने मिलकर दी।
भारत नदियों का देश है। यहाँ नदियां सिर्फ पानी का स्रोत नहीं बल्कि देवी और देवता के रूप में पूजे जाते हैं। इसी तर्ज़ पर भागीरथी, ब्रम्हपुत्र, कावेरी समेत पंजाब के पांचों नदियों को नमन करते हुए, इन नदियों के किनारे बसी सभ्यता और लोक कला का दर्शन श्रोताओं और दर्शकों को कराया गया। असम, छत्तीसगढ़, पंजाब, तमिलनाडु एवं उत्तराखंड के लोक नृत्यों के माध्यम से इन जगहों से साथ इन नदियों की आत्मीयता को उजागर किया गया। आशी दीक्षित, विदुषी सिंह, अवनि खेतान, दर्श अग्रवाल, यशोदा बनर्जी, देवांश गुप्ता, शिवांश रस्तोगी, खुश लखमानी, हर्षवर्धन सिंह, अथर्व भाटिया, मिश्का अग्रवाल, उद्भव, मिहिरा, युवान समेत 63 विद्यार्थियों ने इस भावपूर्ण प्रस्तुति को मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम की अगली प्रस्तुति में थे टाइटंस ऑफ़ इंडियंस विस्डम - ए जर्नी थ्रू टाइम की प्रस्तुति दी गयी। इस नृत्य नाटिका में माध्यम से भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति के जनक एवं आचार्यों को एवं उनके कृत्यों को याद किया गया। महान गणितज्ञ आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य, व्याकरण एवं उपकरणविद् पाणिनी, प्राचीन भारत के चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा के जनक चरक, सुश्रुत, नाट्यविद्या,भाव एवं रस के अधिष्ठाता भरतमुनि एवं भारतीय नीतिशास्त्र के अपराजेय गुरु चाणक्य को समर्पित इस प्रस्तुति के माध्यम से लोगों में भारत की प्रतिभा और काबिलियत को लोगों तक पहुंचाने और उनमे पुनर्जागरण लाने का प्रयास किया गया। इस प्रस्तुति में सार्थक पांडेय , अक्षत गुप्ता , पीताम्बर खत्री, जानवी केशरी, भूमिका कुमारी, रितिका जालान, जागृति जायसवाल समेत 22 विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की।
कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति में भारत की अपराजेय युद्ध कौशल और क्षत्रिय क्षमता की झांकी दिखी। विख्यात लेखक आमिष त्रिपाठी की पुस्तक चोला टाईगर्स - राइज ऑफ़ सदर्न वारियर्स में लिखित विश्वविख्यात चोला साम्राज्य द्वारा सोमनाथ समेत कई मंदिरों के पुनरुद्धार एवं संरक्षण की कहानी को नृत्य नाटिका के माध्यम से उजागर किया गया। जिसमे ओमकार शर्मा , उत्सव मोदी , अंकित राज , विराट सिंह, सक्षम कुमार , सिद्धार्थ , कृष्णा वासुदेव , आदित्य सोनकर , उज्जवल कुमार , अनन्या जायसवाल , गीतिका चौरसिया , तूलिका , एवं समृद्धि बनर्जी समेत 32 विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की।
सनबीम लहरतारा पूरे देश भर में अपने अभिनव प्रयोग के लिये लोकप्रिय है और इसी के अंतर्गत वार्षिकोत्सव में भाग ले रहे विद्यार्थियों को विषयों पर केंद्रित कक्षाएं दी गयीं और रिफ्लेक्शन शीट के ज़रिये उन्होने जो सीखा उसका दस्तावेजीकरण कराया गया।
अभिभावकों का स्वागत करते हुए समूह की निदेशिका श्रीमती अमृता बर्मन ने कहा कि सारे अभिभावक बधाई के पात्र है। बच्चों ने कार्यक्रम की प्रस्तुति के दरम्यान जो कुछ सीखा, जिन विभूतियों के जीवन के बारे में जाना वो आजीवन उनकी स्मृति पटल पर अंकित रहेगा। यह महज कोई कार्यक्रम नहीं बल्कि सीखने का बहुत सफल मार्ग है। इस अवसर पर सनबीम शिक्षण समूह की सह-निदेशिका श्रीमती प्रतिमा गुप्ता ने कहा कि जब खेल-खेल में आप बच्चों को जीवन की पढ़ाई पढ़ा सके तब आप मानिए कि आपकी शिक्षा पद्धति आधुनिक है और सांस्कृतिक भी। सनबीम ऐसी ही शिक्षा पद्धति में यकीन रखता है और ऐसे ही शिक्षा पद्धति का निर्वहन करता है।
इसके बाद सनबीम शिक्षण समूह के मानद निदेशक श्री हर्ष मधोक ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि सनबीम लहरतारा एक विद्यालय से अधिक एक चिंतन और मंथन का केंद्र बन गया है। यहां के बच्चे साल भर देश के सभी प्रतिष्ठित विद्यालयों एवं विदेश के भी प्रतिष्ठित विद्यालयों में आयोजित समारोह या समागम में सम्मिलित होने जाते हैं। यह जिले के साथ-साथ पूरे सूबे में किसी भी विद्यालय के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।
समूह की उपाध्यक्ष श्रीमती भारती मधोक ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सनबीम अपने उद्देश्य कि ओर हर रोज़ बिना रुके आगे बढ़ता है और उसकी वजह है सनबीम के बच्चे और अभिभावक। हमारे हर वार्षिकोत्सव में अभिभावक हमारे विशेष अतिथि होते है और बच्चे हमारे विशेष प्रस्तोता। हमें ख़ुशी है कि हम आप दोनों के बीच के वो सेतु है जो बच्चो को तराशने का और उनके भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे है। हम आश्वस्त है कि सनबीम लहरतारा ऐसे ही प्रगतिशील कार्य करता रहेगा।
इतनी सुंदर प्रस्तुति देखने के पश्चात सनबीम शिक्षण समूह के अध्यक्ष डॉ दीपक मधोक ने विद्यार्थियों और प्रशिक्षकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमें खुशी है कि बच्चों को इतने महत्वपूर्ण विषय पर कार्यक्रम करवाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण दिया गया और सिर्फ प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया उन्हें समय-समय पर विषयागत लोगों के सानिध्य में भी लाया गया।
इस कार्यक्रम का सफल संचालन अनिका पांडेय, शुभ अग्रवाल, विशिष्ठ, रिश्ता, श्रीजिता, आरोही, त्रिशाली, अनय गाभावाला एवं निष्का समेत 13 विद्यार्थियों ने किया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती परवीन कैसर ने विद्यार्थियों, अविभावकों , प्रेस बंधुओं एवं सभी अतिथियों के प्रति धन्यवाद् ज्ञापित किया ।