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दिल्ली में भव्य 'सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव' का होगा आयोजन, संत-महंत, लोकप्रिय प्रतिनिधियों एवं धर्मनिष्ठों की उपस्थिति में सुरक्षा, संस्कृति व शौर्य का महासंगम



 05/Dec/25

वाराणसी। भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' से लेकर चौथी वैश्विक आर्थिक महाशक्ति तथा विविध तकनीकी क्षेत्रों में विश्वस्तरीय सफलता प्राप्त की है; किंतु हाल ही में दिल्ली में हुए बम विस्फोट एवं देशव्यापी फैले आतंकवादियों के जाल ने आंतरिक सुरक्षा को गंभीर संकट उत्पन्न किया है। देश-विरोधी विदेशी शक्तियां, डीप स्टेट, विघटनकारी ताकतें, नक्सलवाद, लव जिहाद, लैंड जिहाद, हलाल जिहाद आदि विविध माध्यमों से भारत को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे समय में केवल दिखावटी धर्मनिरपेक्षता पर्याप्त नहीं, बल्कि भारतभूमि में पुनः प्रभु श्रीराम, श्रीकृष्ण, छत्रपति शिवाजी महाराज की क्षात्रतेज की नितांत आवश्यकता है। देश में पुनः सुरक्षा, संस्कृति एवं शौर्य का जागरण हो, इसके लिए भारत को विश्वकल्याणकारी 'सनातन राष्ट्र' के रूप में उभरना अत्यावश्यक है। इसी संदेश को देशभर पहुंचाने हेतु 'सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन' द्वारा प्रस्तुत एवं सनातन संस्था द्वारा आयोजित भव्य 'सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव' 13 एवं 14 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली (इंद्रप्रस्थ) स्थित 'भारत मंडपम्' में आयोजित होगा, ऐसी जानकारी सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव स्वागत समिति के सदस्य सदुरु निलेश सिंगबाळजी ने पराडकर स्मृति भवन में हुई पत्रकार परिषद में दी। इस समय सनातन संस्था के संजय सिंह, प्राच्यम के संस्थापक प्रवीण चतुर्वेदी, वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा भी उपस्थित थे।

सनातन संस्था के संजय सिंह ने कहा कि सनातन संस्था के रजत महोत्सव एवं विश्वकल्याण के लिए कार्यरत सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बालाजी आठवले के जन्मोत्सव अवसर पर गोवा में हुए प्रथम 'शंखनाद महोत्सव' में 23 देशों के 30,000 से भी अधिक भक्तों ने सहभागिता की थी। अनेक साधु-संतों, गोवा के मुख्यमंत्री तथा केंद्र व राज्य मंत्रियों की उपस्थिति से वह महोत्सव अत्यंत सफल रहा। अब दिल्ली का यह महोत्सव राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक होने जा रहा है।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ.आठवले ने रामराज्य समान आदर्श 'सनातन राष्ट्र' की स्थापना का पवित्र संकल्प लिया है। महाभारत युद्ध से पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने जैसे धर्मयुद्ध का शंखनाद किया था, वैसे ही यह महोत्सव धर्मनिष्ठ समाज की आत्मशक्ति को जागृत कर धर्मसेवा व राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देगा। यह केवल एक कार्यक्रम न होकर राष्ट्ररक्षा, सामाजिक एकता और संस्कृति को नवचैतन्य देने वाले नवयुग का आरंभ सिद्ध होगा।

प्रवीण चतुर्वेदी ने बताया कि OTT, सोशल मीडिया, मिशनरी गतिविधियां और विचारात्मक अतिक्रमण के कारण सांस्कृतिक संकट गहराता जा रहा है। इनका प्रतिकार केवल कानूनों या घोषणाओं से संभव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक व नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना से होगा। 'सनातन राष्ट्र' का सिद्धांत व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के स्तर पर इन मूल्यों का पुनर्निर्माण करता है। दो दिवसीय इस महोत्सव में 'सनातन संस्कृति संवाद', 'सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन', राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद-नक्सलवाद की पृष्ठभूमि, रक्षा नीति और राष्ट्रबल दृढ़ करने के उपाय जैसे विषयों पर विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे। दूसरे दिन 'विश्वकल्याणकारी सनातन राष्ट्र' विषय पर विशेष सत्र रखा गया है।

अजीत सिंह बग्गा ने कहा कि 13 से 15 दिसंबर तक भारत मंडपम के प्रदर्शनी हॉल क्रमांक 12 में ऐतिहासिक तथा शिवकालीन शस्त्रों का अनूठा प्रदर्शन, साथ ही सनातन संस्कृति, राष्ट्र, कला और अध्यात्म से संबंधित भव्य प्रदर्शनी भी आयोजित होगी। इस प्रदर्शनी में पहली बार छत्रपति शिवाजी महाराज की 'भवानी तलवार' प्रत्यक्ष दर्शन के लिए उपलब्ध होगी। पारंपरिक युद्धकलाओं के शौर्य बढानेवाले प्रदर्शन भी इस महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगा। उत्तरप्रदेश के अनेक हिंदू संगठन, आध्यात्मिक संस्था, गीता प्रेस, अधिवक्ता, उद्योगपति, जन प्रतिनिधि तथा विचारकों को इस महोत्सव में आमंत्रित किया गया है। इस महोत्सव में उत्तर प्रदेश से विविध संगठनों के 270 से भी अधिक सनातन राष्ट्र के समर्थक उपस्थित रहेंगे।

महोत्सव में अनेक संत-महंत, मान्यवर और विविध क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहेंगी। इनमें श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कोषाध्यक्ष प.पू. स्वामी गोविंददेवगिरी महाराज, मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के प.पू. डॉ. नरेशपुरीजी महाराज, हिंदू जनजागृति समिति के मार्गदर्शक सदुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे, तथा सनातन संस्था की उत्तराधिकारी श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे।

साथ ही केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, केंद्रीय उर्जा राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक, दिल्ली के संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा, छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज सांसद छत्रपति उदयनराजे भोसले, भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश उदय लळित, रक्षा मंत्रालय के पूर्व प्रधान सलाहकार लेफ्टनंट जनरल विनोद खंडारे, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानुनगो, 'सेव कल्चर सेव भारत' के अध्यक्ष एवं भारत के पूर्व सूचना आयुक्त उदय माहूरकर, प्राच्यम् ओटीटी के संस्थापक कैप्टन प्रवीण चतुर्वेदी, काशी-मथुरा मुक्ति आंदोलन के प्रमुख अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन तथा सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके उपस्थित रहेंगे। संतों की आध्यात्मिक शक्ति और इन मान्यवरों के सामाजिक-राष्ट्रीय योगदान का त्रिवेणी संगम यही महोत्सव होगा। महोत्सव की अधिक जानकारी SanatanRashtraShankhnad.in वेबसाइट पर उपलब्ध है।


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