पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में निजीकरण हेतु बड़े पैमाने पर हटाए जा रहे हैं संविदा कर्मी
मई 2017 के पॉवर कारपोरेशन के आदेश के विपरीत 48% तक संविदा कर्मियों की छटनी से बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा : निजीकरण के विरोध में आंदोलन जारी
वाराणासी । विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0 के बैनर तले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय के विरोध में लगातार 372वें दिन से आंदोलनरत बिजली कर्मियों ने आज भी बनारस सहित प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
संघर्ष समिति, के सभा को संबोधित करते हुये वक्ताओ ने आरोप लगाया है कि निजीकरण की दृष्टि से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छटनी की जा रही है।जिसमे सर्वप्रथम पूर्वांचल के 8 मंडल में लगभग एक हजार संविदाकर्मियों की छटनी होनी है ।
वक्ताओ ने बताया कि आज कज्जाकपुरा स्थित अधिशासी अभियंता कार्यालय पर निजीकरण का विरोध करते हुये संविदाकर्मियों की छटनी को लेकर कज्जाकपुरा के अधिशासी अभियंता से बिजलीकर्मियों ने अपना जमकर विरोध भी दर्शाया। संविदाकर्मियों का आरोप है कि पूरी जवानी बिजली विभाग में दे दिया अब कौन सी जगह हमलोगों को काम मिलेगा ये हमलोगों के साथ घोर अन्याय है। हम सभी लोग माननीय प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी को अपनी जीविका बचाने का आग्रह करेंगे।
संघर्ष समिति ने चार्ट जारी करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में पॉवर कॉरपोरेशन द्वारा निर्धारित मानक की तुलना में 48 % तक संविदा कर्मी कम किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के लिए उतावलेपन में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन हजारों की तादाद में संविदा कर्मियों को हटाकर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतार देने पर आमादा है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने नगरीय एवं ग्रामीण विद्युत उपकेंद्रों के लिए नियमित कर्मचारियों और संविदा कर्मियों की तैनाती का मानक वर्ष 2017 में तय किया था। इस संबंध में पॉवर कॉरपोरेशन ने 15 मई 2017 को आदेश जारी किया था। संघर्ष समिति ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन ने इस आदेश में आज तक कोई संशोधन नहीं किया है और आज भी यही आदेश प्रभावी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि मई 2017 के आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में एक उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र में एक उप केंद्र पर 20 कर्मचारी निर्धारित किए गए हैं। अब मनमाने ढंग से बड़े पैमाने पर संविदा कर्मी हटाए जा रहे हैं और शहरी क्षेत्र में 36 कर्मचारियों के स्थान पर 18.5 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 कर्मचारियों के स्थान पर 12 कर्मचारी प्रति उप केंद्र पर रखे जा रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंधन ने मई 2017 के आदेशों की अवहेलना करते हुए बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छटनी के आदेश जारी कर दिए हैं।
नए तैनाती आदेशों के अनुसार संविदा कर्मचारियों को 22% से 48% तक कम किया जा रहा है जिससे अत्यन्त अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मी भुखमरी के कगार पर आ गए हैं।
संघर्ष समिति ने बताया कि इसके पहले मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में भी इसी प्रकार से हजारों संविदा कर्मियों को हटाया गया। राजधानी लखनऊ में लेसा में रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर हजारों संविदा कर्मी हटाए जा चुके हैं। अब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में भी हजारों की संख्या में संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि निजीकरण के नाम पर हजारों की तादाद में अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों को हटाया जाना तत्काल बंद न किया गया तो बिजली कर्मी इस अन्याय के विरोध में आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
सभा को सर्वश्री ई. मायाशंकर तिवारी, ई. विजय सिंह,अंकुर पाण्डेय,राजेन्द्र सिंह,संदीप कुमार, राजेश सिंह,रविन्द्र यादव,मनोज जैसवाल,इकबाल,आदि ने संबोधित करते हुये संविदाकर्मियों के छटनी को लेकर अधीक्षण अभियंता द्वारा लिए गये समय के उपरांत बड़ा प्रदर्शन करने का किया एलान।