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हंसराज ने काशी को सुनाया मेरा भोला है भंडारी...



 05/Nov/25

 गंगा महोत्सव को बनाया यादगार

राजघाट का किनारा और हंसराज रघुवंशी की सूफियाना आवाज। हर चाहने वाला अपने पसंदीदा गायक के हर लय और ताल से ताल मिला रहा था। हंसराज ने राजराजेश्वर शिव की नगरी काशी को जब मेरा भोला है भंडारी, करे नंदी की सवारी...सुनाया तो गंगा की लहरें भी झंकृत हो उठीं। काशी गंगा महोत्सव के चौथे दिन को हंसराज रघुवंशी ने यादगार बना दिया।

मंगलवार की शाम से ही राजघाट की सीढि़यों पर जगह लेने के लिए संगीत प्रेमी पहुंचने लगे थे। पांच घंटे के इंतजार के बाद रात नौ बजे जब हंसराज ने मंच संभाला तो श्रोताओं ने हर-हर महादेव के जयघोष के साथ उनका अभिवादन किया। हंसराज रघुवंशी ने मेरा भोला है भंडारी करे नंदी की सवारी...से शुरूआत की तो श्रोता भी सुर से सुर मिलाने लगे। इसके बाद हंसराज ने शिव समा रहे मुझमें और मैं शून्य हो रहा हूं... के जरिये काशीवासियों को शिवत्व का अहसास कराया। अगली प्रस्तुति में शिव कैलाशों के वासी... और लागी लगन शंकरा... से शिव के प्रति प्रेम का भाव जगाया।

मंगलवार को पर्यटन विभाग की ओर से काशी गंगा महोत्सव के चतुर्थ चरण की शुरुआत अदिति जायसवाल और नेहा चौहान की युगल भरतनाट्यम की प्रस्तुति से हुई। नृत्य की शुरुआत पुष्पांजलि से हुई। इसमें नर्तकियों ने गुरु और देवता के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। इसके उपरांत अर्द्धनारीश्वर रूप के माध्यम से शिव और शक्ति के अद्वैत भाव को अभिव्यक्त किया।
अंत में तिल्लाना की लय, गति और भाव का अद्भुत समावेश हुआ। डॉ. प्रेम किशोर मिश्र ने सितार, पं. सुखदेव मिश्र ने वायलिन और पं. अंशुमान महाराज ने सरोद वादन से सभी का मन मोह लिया। शुरुआत राग बागेश्री में मध्य एकताल की बंदिश अपने गरज पकड़ लीनी बहिया...से हुई। इसके बाद द्रुत तीनताल में निबद्ध रचना और समापन तीनताल के तराने से हुआ।

डॉ. शुभंकर डे ने राग भीम की विलंबित एकताल में जागे मोरे भाग...से गायन आरंभ किया। तबले पर कृष्ण कुमार उपाध्याय, संवादिनी पर संगीत पर हर्षित उपाध्याय ने साथ दिया। राहुल और रोहित मिश्र ने युगल गायन की अविस्मरणीय प्रस्तुति दी। तबले पर आनंद मिश्र और संवादिनी पर आदित्य ने संगति दी। उज्जैन से आईं प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना आयुर्धा विपेंद्र शर्मा ने नृत्य से राजघाट पर श्रोताओं को थिरकने पर विवश कर दिया।
रूपन सरकार समंता और वासुमति बद्रीनाथन ने क्रमवार शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। शिवानी मिश्रा ने अपने समूह के साथ कथक नृत्य से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य ने किया।

 


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