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सेठ एम.आर. जैपुरिया स्कूल्स बनारस बाबतपुर कैम्पस के छात्र-छात्राओं ने हिन्दी साहित्य के पुरोधा मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया। इस अवसर पर कक्षा 8 के विद्यार्थियों ने वाराणसी के लमही स्थित प्रेमचंद स्मारक एवं जन्मस्थली का भ्रमण कर माल्यार्पण किया और उनके जीवन एवं साहित्यिक योगदान को जाना।
हिन्दी विभाग के शिक्षकों ने विद्यार्थियों को प्रेमचंद की जीवन यात्रा, उनके द्वारा रचित उपन्यासों एवं कहानियों की सामाजिक महत्ता से अवगत कराया। स्मारक में प्रदर्शित चित्रों और मूर्तियों ने बच्चों को प्रेरित किया और उनके साहित्य में निहित संवेदनाओं को समझने का अवसर प्रदान किया।
चेयरमैन दीपक कुमार बजाज ने अपने संदेश में कहा, "मुंशी प्रेमचंद केवल एक लेखक नहीं, बल्कि समाज के सजग द्रष्टा थे। उनकी कहानियाँ आज भी हमें यह सिखाती हैं कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की सशक्त धारा है। ऐसे साहित्य को पढ़ना बच्चों को संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनाता है।"
प्रधानाचार्या सुधा सिंह के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने बैलो की कथा, बूढ़ी काकी और मंत्र कथा पर आधारित नुक्कड़ नाटक एवं चित्राकारी का मंचन किया। विद्यालय पुस्तकालय में विशेष सत्र आयोजित किया गया जिसमें बच्चों ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों और उपन्यासों के अंश पढ़े और उस समय के समाज, वर्गभेद, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं पर चर्चा की।
कक्षा 8 के विद्यार्थियों में हर्षित सेठ, शुभम सिंह, सत्यम मिश्रा, सोनी सिंह आदि ने प्रेमचंद की कहानियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए और यात्रा के अनुभव साझा किए।
हिन्दी विभाग की शिक्षिकाओं गरिमा रुंगटा, प्रीति उपाध्याय, वर्षा ठाकुर, वंदना सिंह और चेतना ने प्रेमचंद जी के हिन्दी साहित्य के विकास में योगदान पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर आयोजित अंतर-विद्यालयी निबंध लेखन प्रतियोगिता में हर्षित यादव और अंकुर सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं मोनो एक्ट प्रतियोगिता में शुभ्रा त्रिपाठी ने अपने प्रभावी अभिनय से प्रथम पुरस्कार जीता।