वाराणसी। सनबीम इंग्लिश स्कूल, भगवानपुर का परिसर संगीत, संस्कृति और सार्थक कहानी कहने के जीवंत प्रदर्शन के साथ जीवंत हो उठा, क्योंकि किंडरगार्टन से कक्षा 2 तक के छात्रों ने अपने वार्षिक समारोह के लिए केंद्र मंच पर कब्जा कर लिया - स्पार्कलः इल्यूमिनेट! उकसाना! प्रेरित करें। यह दो दिवसीय उत्सव केवल एक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि खुशी, जागरूकता और हार्दिक भावनाओं का एक तमाशा था, जिसने उपस्थित सभी लोगों पर एक अमिट छाप छोड़ी। उत्सव की शुरुआत आरम्भ-दिव्य आशीर्वाद की मांग! के साथ हुई, जहां सबसे कम उम्र के सनबीमियंस ने भावपूर्ण मंत्रों और सिंक्रनाइज आंदोलनों के साथ एक पवित्र स्वर सेट किया। भक्ति की आभा मूल रूप से ‘‘ध्वनि - धुनों का संगम!‘‘ में प्रवाहित हुई, जहाँ एक करामाती संगीत अनुभव बनाने के लिए छोटी आवाजें सामंजस्यपूर्ण थीं। लचीलापन और वीरता की भावना ‘‘अजेय - साधारण लोग, असाधारण कर्म!‘‘ में मनाई गई, क्योंकि युवा कलाकारों ने उन व्यक्तियों को सम्मानित किया जिनके निस्वार्थ कार्यों ने इतिहास को आकार दिया है। ‘‘तृप्ति - एक ऐसी दुनिया जहां कोई भूखा नहीं सोता!‘‘ खाद्य सुरक्षा पर एक शक्तिशाली संदेश दिया, जिसमें सभी से बर्बादी के प्रति सचेत रहने और हर भोजन के लिए आभारी रहने का आग्रह किया गया। ‘‘अन्नोत्सव - फसल का जश्न, इसके पीछे हाथ को संजोना!‘‘ में, छात्रों ने उन किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके परिश्रम से दुनिया को खिलाया जाता है, कृतज्ञता और सम्मान की गहरी भावना को बढ़ावा मिलता है।
दर्शकों को ‘‘शिवोहम-महादेव की महिमा!‘‘ से मंत्रमुग्ध कर दिया गया था, जहां लुभावने प्रदर्शनों के माध्यम से भगवान शिव की शक्ति और शांति को जीवंत किया गया था। स्वास्थ्य और फिटनेस को प्रोत्साहित करते हुए, ‘‘संजीवनी - फिटनेस के खोए हुए सार को पुनर्जीवित करना!‘‘ गतिशील आंदोलनों के साथ मंच को सक्रिय किया, सभी को एक सक्रिय जीवन शैली को अपनाने के लिए प्रेरित किया। ग्रैंड फिनाले, ‘‘कारवाँ-टाइमलेस फैशन, टाइमलेस बॉन्ड्स!‘‘, पीढ़ियों में प्यार के लिए एक हार्दिक श्रद्धांजलि थी, क्योंकि दादा-दादी, शिक्षक और छात्र एक साथ रैंप पर चले गए, हमारे जीवन को परिभाषित करने वाले कालातीत कनेक्शनों का जश्न मनाते हुए।
इस खुशी के अवसर पर चेयरपर्सन डॉ. दीपक मधोक, वाइस चेयरपर्सन श्रीमती भारती मधोक, सहायक निदेशक श्रीमती प्रतिमा गुप्ता और प्रिंसिपल श्रीमती प्रेरणा शर्मा ने छात्रों को उनके आत्मविश्वास, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति की गहराई के लिए सराहना की।
मानद निर्देशक हर्ष मधोक ने युवा कलाकारों की उनकी ऊर्जा, जुनून और सार्थक कथाओं को जीवंत करने की प्रतिबद्धता के लिए सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे ये मूल्य, कम उम्र में पैदा हुए, जिम्मेदार और दयालु व्यक्तियों को आकार देते हैं। जैसे ही इस शानदार उत्सव का समापन हुआ, प्रधानाध्यापिका सुश्री बिभा राय ने ‘‘स्पार्कल‘‘ को एक शानदार सफलता बनाने में छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्कूल नेतृत्व के प्रति उनके अटूट समर्थन के लिए गहरा आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। सिर्फ एक समारोह से अधिक, ‘‘स्पार्कल‘‘ प्रेरणा का एक बीकन था, यह साबित करता है कि यहां तक कि सबसे कम उम्र के दिमाग भी दिलों को रोशन कर सकते हैं, विचारों को प्रज्वलित कर सकते हैं और परिवर्तन को प्रेरित कर सकते हैं।