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उत्तर प्रदेश की महिला किसानों को कालानमक चावल मूल्यवर्धन और लघु उद्योग पर प्रशिक्षण



 20/Mar/25

वाराणसी। डीबीटी (जैव-प्रौद्योगिकी विभाग), भारत सरकार के सहयोग से इरी द्वारा महिला किसानों को सशक्त करने के लिए चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। 18-21 मार्च को वाराणसी स्थित आइसार्क में आयोजित इस पहल का उद्देश्य महिला किसानों को कालानमक चावल—एक पारंपरिक, सुगंधित और पोषण से भरपूर चावलको लाभकारी मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना है, जिससे उनकी आर्थिक संभावनाओं को बढ़ावा मिले।
कालानमक चावल उत्तर प्रदेश की एक पारंपरिक, सुगंधित और पोषण से भरपूर चावल की प्रजाति है, जिसे बौध धर्म में प्रसाद के रूप में भी ग्रहण किया जाता है| हालांकि इसकी मांग दिन-व-दिन बढ़ रही है, लेकिन किसानों को इसके उत्पाद एवं मूल्य-संवर्धन में सीमित प्रसंस्करण ज्ञान, संकुचित विपणन अवसर और अपर्याप्त उद्यमिता कौशल जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम व्यावहारिक ज्ञान और विशेषज्ञों द्वारा दिए गए व्याख्यान और उत्पाद विकास, ब्रांडिंग और व्यवसाय रणनीतियों में परामर्श के माध्यम से इन अवरोधों को कम करने का प्रयास करता है। प्रतिभागियों को कुकीज और चावल के फ्लेक्स जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों को विकसित करने और गुणवत्ता मानकों और सुदृढ़ व्यावसायिक मॉडलों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
यह कार्यक्रम भारत सरकार के द्वारा चलाई गयी "एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी)" पहल के साथ संरेखित है, जो कि ग्रामीण आर्थिक विकास और महिलाओं के उद्यमिता को बढ़ावा देता है। 
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए आइसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने महिला किसानों के आजीविका को मजबूत करने में मूल्यवर्धन और उद्यमिता की परिवर्तनकारी क्षमता पर बल दिया। उन्होंने कहा, "कृषि में महिलाओं को सशक्त करना केवल उत्पादकता बढ़ाने के बारे में नहीं है; यह सुदृढ़ बाजार संचालित ग्रामीण उद्यम बनाने के बारे में है। पारंपरिक, जैविक और उच्च-गुणवत्ता वाले स्थानीय चावल की प्रजातियों जैसे कि कालानमक आदि के लिए बाज़ार में बढती मांग के चलते, हमारे किसानों के लिए क्षमतावर्धन और सफल कृषि व्यवसाय उद्यम स्थापित करने का यह उत्तम समय है| 
विशिष्ट अतिथि, आईसीएआर-आईएआरआई की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरिता बोल्लिनेदी ने सतत कृषि में कालानमक चावल के महत्व पर प्रकाश डाला और क्षमता विकास की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "महिला किसान कृषि समुदायों की रीढ़ हैं, फिर भी उन्हें अक्सर महत्वपूर्ण ज्ञान और संसाधनों तक पहुंच का अभाव होता है। यह प्रशिक्षण उन्हें आवश्यक तकनीकी कौशल और बाजार का दृष्टिकोण प्रदान करेगा ताकि वे चुनौतियों को अवसरों में बदल सकें और महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमिता की नई लहर को बढ़ावा दे सकें।"
प्रतिभागियों को प्रशिक्षण में तकनीकी जानकारियों का लाभ उठाने और काला नमक पर आधारित खेती की विधि, कटाई और प्रसंसकरण तकनीक एवं इससे जुड़े उत्पादों के लिए बाजार अवसरों के बारे में जानकारी उपलब्ध करायी जा रही है| साथ ही, महिला किसानों को तकनीकी ज्ञान और उद्यमिता के कौशल दिए जा रहे हैं, जिससे वे अपने खुद के छोटे व्यवसाय स्थापित कर सकें और प्रदेश में पारंपरिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण काला नमक चावल की विरासत को संरक्षित रखने में मदद मिल सके|


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