नई दिल्ली। प्रभात प्रकाशन द्वारा 3 मार्च 2025 को संविधान क्लब, नई दिल्ली के स्पीकर हॉल में ‘संपूर्ण समाधान’ पुस्तक का भव्य विमोचन किया गया। यह पुस्तक राजेंद्र गोयनका द्वारा लिखित एक दूरदर्शी कृति है, जो भारत के ज्वलंत सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर व्यावहारिक और नीति-निर्माण योग्य समाधान प्रस्तुत करती है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में नीति-निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों, प्रशासकों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया और भारत की प्रमुख चुनौतियों तथा उनके समाधान पर गहन विचार-विमर्श किया। पुस्तक का औपचारिक विमोचन केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल जी द्वारा किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने नीतिगत सुधारों और समावेशी विकास की दिशा में इस पुस्तक की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह राजेंद्र गोयनका ने समाज के विविध समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया है, उसी तरह हर जागरूक नागरिक को आगे आकर समाज की समस्याओं के हल निकालने के लिए सहयोग देना चाहिए। मुझे विश्वास है कि यह पुस्तक नीति-निर्माताओं का ध्यान आकर्षित करेगी और भारत के भविष्य को दिशा देने में सहायक सिद्ध होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मभूषण राम बहादुर राय ने की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों में बदलाव लाने की क्षमता रखती है और भारत की नीति-निर्माण प्रक्रिया में इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश डिज़ाइन एंड रिसर्च संस्थान की अध्यक्ष श्रीमती क्षिप्रा शुक्ला और पूर्व सांसद एवं अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विजय सोनकर शास्त्री भी उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि, अर्थव्यवस्था, न्याय प्रणाली और शासन सुधारों से संबंधित इस पुस्तक में निहित महत्वपूर्ण विचारों पर प्रकाश डाला।
‘संपूर्ण समाधान’ भारत के सामाजिक-आर्थिक सुधारों का एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसमें अर्थव्यवस्था, प्रशासनिक सुधार, कृषि विकास, कर नीति, न्याय प्रणाली, शिक्षा के आधुनिकीकरण और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर गहन शोध और ठोस रणनीतियाँ दी गई हैं। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नई के पूर्व कुलपति प्रो. राममोहन पाठक जी ने पुस्तक के प्रमुख निष्कर्षों को साझा करते हुए इसके व्यापक प्रभावों पर चर्चा की।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर लेखक राजेंद्र गोयनका ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि समस्याएँ जीवन में निराशा लाती हैं, जबकि समाधान उत्साह को जन्म देते हैं। इस दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका हल न हो। महत्वपूर्ण यह है कि हम समस्या की जड़ तक पहुँचें और सकारात्मक सोच के साथ समाधान खोजें। हमारा प्रयास हमेशा समस्या का हिस्सा बनने की बजाय समाधान का हिस्सा बनने का होना चाहिए।
इस अवसर पर नीति-निर्माण, अर्थशास्त्र, प्रशासनिक सुधार और कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। चर्चा का फोकस पुस्तक के प्रमुख विषयों और भारत के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में उनके व्यावहारिक सार्थकता पर रहा।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. विजय सोनकर शास्त्री (पूर्व सांसद एवं पूर्व अध्यक्ष, अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग), डॉ. नितिन रमेश गोकरण (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी), डॉ. विनय सहस्रबुद्धे (पूर्व सांसद और आईसीसीआर के पूर्व अध्यक्ष), कैप्टन एस. के. द्विवेदी (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी), विक्रम सिंह (उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक), प्रदीप राय (पूर्व उपाध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल), प्रो. वी. उपाध्याय (अर्थशास्त्री), डॉ. केसी बंसल (कृषि वैज्ञानिक), रवि पटोदिया (कार्पेट निर्यातक), सुधीर अग्रवाल (पूर्व सीईओ, ज़ी ग्रुप), अजय सिंह (अध्यक्ष, वल्ड हिंदू फ़ेडरेशन), रंजन द्विवेदी (पूर्व डी.जी., उत्तर प्रदेश) मौजूद रहे।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भी अपनी महत्वपूर्ण सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम के संयोजक आलोक पारिख और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव व तमिलनाडु तथा लक्षद्वीप के प्रभारी अरविंद मेनन ने नीति और सुशासन पर अपने विचार साझा किए, जिससे चर्चा और अधिक गहन एवं प्रभावी बन गई। प्रशासनिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिकारियों ने किया, जिनमें गोकुल पटनायक (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और कटरा ग्रुप के निदेशक), सत्यकाम मिश्रा (दिल्ली के पूर्व मुख्य आयकर आयुक्त), भरत भूषण गर्ग (गुरुग्राम के आयकर आयुक्त) और कमलेश प्रकाश (पूर्व अतिरिक्त आयुक्त, जीएसटी), रमन कांत त्यागी, (भारतीय नदी परिषद के अध्यक्ष) शामिल थे। इन सभी ने आर्थिक प्रशासन और कर नीति के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।श्री शिखर ओझा (आरटीओ वाराणसी), ने परिवहन और आधारभूत संरचना पर अपना अहम नज़रिया प्रस्तुत किया। वहीं, मीडिया परिदृश्य और जनमत निर्माण में इसकी भूमिका पर प्रमुख हस्तियों ने अपने विचार रखे, जिनमें राणा यशवंत (ग्रुप एडिटर, न्यूज नेशन), अशोक शर्मा (हेड ऑफ़ रेवेन्यू, स्ट्रेटजी, प्लानिंग एंड बिज़नेस रिलेशनशिप्स, अमर उजाला), अकु श्रीवास्तव (संपादक, पंजाब केसरी समूह) डॉ. अनिल कुमार रस्तोगी (डायरेक्टर, आविष्कार मीडिया ग्रुप), संजय रॉय (सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, डिस्ट्रीब्यूशन, एबीपी न्यूज) और रघवेंद्र चड्ढा (न्यूज़ एडिटर, दैनिक जागरण, उत्तराखंड) शामिल थे। चर्चा में उद्यमिता और औद्योगिक नवाचार पर भी महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए गए, जिसमें ओमेगा सेकी मोबिलिटी के संस्थापक और एंग्लियन ओमेगा ग्रुप के अध्यक्ष श्री उदय नारंग ने अपना दृष्टिकोण साझा किया। वहीं, कला और सांस्कृतिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व प्रख्यात अभिनेता, निर्माता एवं उत्तर प्रदेश की भारतेंदु नाटक अकादमी के अध्यक्ष डॉ. रति शंकर त्रिपाठी ने किया। उन्होंने संस्कृति और आर्थिक प्रगति के आपसी संबंधों पर प्रकाश डाला। इसके अलावा, अखिल भारतीय व्यापार मंडल के सचिव आर.के. गौड़ और कोषाध्यक्ष राजेश्वर पैनुली, प्रो. गुरमीत सिंह, कुलपति पांडिचेरी विश्वविद्यालय ने व्यापारिक हितों की वकालत और भारत के व्यापार एवं वाणिज्य क्षेत्र की चुनौतियों पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। विभिन्न क्षेत्रों की सामूहिक विशेषज्ञता ने चर्चा को समृद्ध बनाया। इससे भारत के सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर बहुआयामी दृष्टिकोण उभरकर सामने आया और पुस्तक के मूल संदेश—समस्याओं के समाधान हेतु सक्रिय पहल—को और मज़बूती मिली।
पुस्तक में सुझाए गए नीतिगत सुधारों और समाधान आधारित दृष्टिकोण पर चर्चा के दौरान पैनलिस्टों ने प्रभावी शासन, आर्थिक स्थिरता, कृषि नवाचार, न्याय प्रणाली में सुधार और समावेशी सामाजिक नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया।
इस आयोजन में नीति-निर्माताओं, प्रशासकों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के नेताओं की सक्रिय भागीदारी रही। उपस्थित लोगों ने पुस्तक की गहन शोध-आधारित नीतियों और राष्ट्र की प्रगति में इसके संभावित योगदान की सराहना की। ‘संपूर्ण समाधान’ मूल रूप से हिंदी में प्रकाशित हुई है और 2025 के अंत तक इसे अंग्रेज़ी और अन्य भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह पुस्तक अब प्रभात प्रकाशन की आधिकारिक वेबसाइट, अमेज़न स्टोरफ्रंट और प्रमुख ऑनलाइन एवं ऑफलाइन बुकस्टोर्स पर उपलब्ध है।
राजेंद्र गोयनका एक दूरदर्शी विचारक और अनुभवी उद्योगपति हैं, जिन्होंने छह दशकों तक व्यावसायिक विकास और सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे प्रमुख व्यापार संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े रहे हैं और वल्ड हिंदू फ़ेडरेशन के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। उनकी पुस्तक ‘संपूर्ण समाधान’ भारत की प्रमुख सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों पर केंद्रित है और नीति-निर्माण, सामाजिक उत्थान और राष्ट्रीय विकास के लिए शोध-आधारित नीतियाँ प्रस्तुत करती है। उनका लेखन व्यावहारिक समाधान-प्रधान दृष्टिकोण पर केंद्रित है, जिससे यह पुस्तक उन सभी के लिए अत्यंत उपयोगी है जो भारत के भविष्य को संवारने में योगदान देना चाहते हैं।
यह आयोजन केवल एक पुस्तक विमोचन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक राष्ट्रीय संवाद की शुरुआत थी। ‘संपूर्ण समाधान’ एक ऐसी पुस्तक है जो नीति-निर्माताओं, विचारकों और जागरूक नागरिकों को समाधान-प्रधान सोच की दिशा में प्रेरित करती है। भारत के समावेशी विकास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में यह पुस्तक एक मजबूत आधारशिला रखेगी।