बनास डेरी, गुजरात के 8 गांवों से भारत के 8 राज्यों तक का सफ़र
"बनास डेरी" को गुजरात सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1961 के अंतर्गत 1969 में NDDB के समर्थन से "ऑपरेशन फ्लड प्रोग्राम" के हिस्से के रूप में, गलबाभाई पटेल,हमारे फाउंडिंग चेयरमैन के द्वारा शुरू किया गया था। बनास डेरी अमूल के 18 मिल्क यूनियनों में सेसबसे बडीडेरी है और अमूल के कुलटर्नओवर में इसका लगभग 1/3 हिस्सा है। डेरी बनाने का मुख्य उद्देश्य था कि दूध उत्पादक अपना दूध संगठित रूप से बेचकर उच्चतम मूल्य प्राप्त कर सकें और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिले। वर्तमान प्रधानमंत्री और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने गुजरात में जो विकास किया उसकी बदौलत आज गुजरात का सहकार क्षेत्र उन्नति के पथ पर अग्रसर है। बनास डेरी जैसीसहकारी संस्थाएं किसानों से जुड़ी हुई हैं और किसानों को मुलभुत सुविधाएं जैसे की बिजली, पानी, अच्छी सड़कोंआदि के उपलब्ध होने से गुजरात के सहकार क्षेत्र ने काफी प्रगति की है। इन मुलभूत कारणों से, जिसमें सुदृढ़नेतृत्व शामिल है कि वजह से बनास डेरी ने अपने क्षेत्र में काफी विस्तार किया है और अपनी सेवाओं और उत्पादों को अपने सभी क्षेत्रों में पहुँचाने में सफलता प्राप्त की है।आज यहएशिया की सबसे बडी डेरी है। माननीय चेयरमैन शंकर चौधरी जी के नेतृत्व में बनास डेरी निरंतर लाखों किसानों को आर्थिक रूप से समृद्धि में शामिल करने की दिशा में काम कर रही है। गुजरात के बनासकंठा के अलावा, बनास डेरी ने अपने कार्यों को बढ़ावा देने के लिए भारत के 8 राज्यों- हरियाणा, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, राजस्थान, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश में विस्तार किया है। आज गुजरात में बनास डेरी के साथ 1,765 समितियों में 4.5 लाख दूध उत्पादक और अन्य राज्यों की 5,367 समितियों में, 2.36 लाख दूध उत्पादक जुड़े हैं। 2022-23 के वित्तीय वर्ष में बनास डेरी का कुल टर्नओवर लगभग 18,059 करोड़ रुपये का था।
वर्ष |
दूध संग्रहण (लाख लीटर) |
कीमत (वसा/किलोग्राम) (रुपये) |
लाभांश (करोड़ रुपये) |
मासिक भुगतान (करोड रुपये) |
टर्नओवर (करोड़ रुपये) |
2013-14 |
29.69 |
590 |
430 |
287 |
4687 |
2022-23 |
75.16 |
948 |
1,952 |
1,025 |
18,059 |
बनास डेरी में AMUL ब्रांड के अंतर्गत चीज, पाउच दूध, UHT दूध, दूध पाउडर, मक्खन, घी, आइसक्रीम, साथ ही खाद्य तेल, शहद, और आलू उत्पादों जैसे कई गैर-डेरी प्रोडक्ट का विनिर्माण भी किया जाता है।
बनास डेरी का बनासकांठा मेंविस्तार
बनास डेरी का पालनपुर में संयंत्र है जिसमें तीन दूध प्रसंस्करण इकाइयाँ हैं जिनकी कुल क्षमता 56.5 LLPD है। पालनपुर में बनास डेयरी का भारत में सबसे बड़ा पनीर प्लांट है।पालनपुर के अलावा बनास डेरी का बनासकांठा में एक और संयंत्र हैसनादर प्लांट,जो 30 LLPD दूध प्रसंस्करण क्षमता का है। इस सनादर प्लांट में हम दूध उत्पादों के अलावा चॉकलेट, फ्रेंच फ्राइज़ और आलू विशेष उत्पाद जैसे विभिन्न उत्पादों का उत्पादन करते हैं। इसके अलावा फरीदाबाद 13.5 LLPDक्षमता कादूध प्रसंस्करण प्लांटहै।बनास डेरी के पास उत्तर प्रदेश और बनासकांठा गुजरात के अलावा फ़रीदाबाद में 13.5 LLPD दूध प्रसंस्करण क्षमता के संयंत्र हैं। इस प्लांट में मिल्क पाउच, दही, छाछ और अन्य उत्पाद तैयार करते हैं।
सर्कुलर अर्थव्यवस्था से सस्टेनेबिलीटी तक बनास डेरी का प्रयास
हमारा दूध उत्पादक और किसान ना सिर्फ हमें दूध और कृषि उत्पाद बेचता है बल्कि हमारे द्वारा निर्मित विभिन्न दूध और कृषि के प्रोसेसिंग से उत्पन्नहोने वाले मूल्य-वर्धित उत्पादों और सेवाओं का ग्राहक भी है। यह सर्कुलर इकोनॉमी का एक अच्छा उदाहरण है।बनास डेरी सस्टेनेबिलीटी के लिये सर्कुलर इकोनॉमी पर काम करने के लिए समर्पित है। इस दिशा में बनास डेरी ने निम्नानुसार कार्य करना प्रारंभ किये हैं:
इस संयंत्र की स्थापना वर्ष 2020 में की गई थी और इस प्लांट में 50 व्यक्ति कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की समृद्धि के लिए डेरी सेक्टर को गोबर से गोबरधन बनाते हुये, अतिरिक्त आय का जरिया बनाने का आह्वान किया। इस स्वप्न को सफल बनाने के लिए बनास डेरी ने दामा स्थित Bio-CNG संयंत्र बनाने का एक अनूठा प्रयास किया है। इसके तहत किसानों से गोबर का मूल्य देकर खरीदारी और उस गोबर के प्रशंस्करण से प्रॉम जैसी खाद और गाड़ियों के लिए Bio-CNG जैसा ईंधन और उसके बचे हुए स्लरीको भी लिक्विड फर्टलाइज़र बनाकर मार्केट में लाने का प्रयास किया। इस सफलता से प्रेरित होकर Suzuki जैसी बड़ी कंपनियां डेरी से जुड़ीं और गत मास में बनास डेरी ने Suzuki (R&D Centre) इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच एक तीन-पक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करके एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।इस समझौते से बनास डेरी 4 नए BIO-CNG प्लांटबनासकांठामें बनाएगी। यह परियोजना भारत को स्वच्छ बनाने और किसानों को उनके पशुपालन व्यवसाय के उप-उत्पादों से अतिरिक्त आय अर्जित करने में मदद करने पर केंद्रित है। Bio-CNG की इस स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग ग्रीन हाइड्रोजन के साथ-साथ ग्रीन ऊर्जा स्रोतों के रूप में तरल बायो मीथेन (एलबीएम) के उत्पादन के लिए किया जाऐगा जिस पर प्रयोग हो चुकाहै।बनास डेरीइस दिशा में कई प्रयास कर रही है।
Bio-CNG संयंत्रकी क्षमताएं:
उत्पाद |
गोबरप्रोसेसिंग |
गोबर गैस उत्पादन क्षमता |
BIO-CNG क्षमता |
प्रॉम |
कम्पोस्ट(FOM) |
संजीवनी तरल उर्वरक (LFOM) |
उत्पादनक्षमता |
40 Ton/Day |
2,000 M3/Day |
600 Kg/Day |
10 Ton/Day |
2 Ton/Day |
3,000 liter/Day |
मिट्टी बचाओ(Save Soil) अभियान सद्गुरु द्वारा शुरू किया गया एक वैश्विक अभियान है। इसके तहत बनासकांठा में ईशा फाउंडेशन के सहयोग से 40 गांवों में पायलट सतर पर यह मिट्टी बचाओ का अभियान शुरू किया गया है। इस परियोजना में किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य, खेती की पद्धतियां और उसकी शैलियोंमें परिवर्तन करने के लिए भूमित्रों के द्वारा मिट्टी के ऑर्गेनिक कार्बन में बढ़ोतरी का प्रयास शुरू किया है। इस परियोजना से एक सफल पायलट तैयार होगा जिससे न सिर्फ किसानों की आय में वृद्धि होगी बल्कि मिट्टी स्वस्थ और पुनर्जीवित होगी और इस मॉडल से जिले और देश के दूसरे क्षेत्रों में ऐसी परियोजनायेंविस्तृत तरीके से शुरु की जा सकेंगी।
बनास डेरी गुजरात के बनासकांठा जिले में भुमि सुधार से जुडींनिम्नलिखित परियोजनाओं को भी बढ़ावा और समर्थन दे रही हैः
सैनिक स्कूल
बनास डेरी ने राष्ट्रीय सेवा के क्षेत्र में कार्य करने के लिए एक सैनिक स्कूल स्थापितकिया है। इससे बनास डेरी, दूध उत्पादकों के बीच सैनिक स्कूल मेंप्रवेश पाने की प्रक्रिया के बारे में जिला प्रशासनके साथ मिलकर जागरूकता पैदा करने का काम कर रही है। सैनिक स्कूल नई पीढ़ी में कम उम्र से ही राष्ट्रीय सेवा की भावना विकसित करने की एक बेहतरीन पहल है।
बनास डेरी पहली सहकारी संस्था है जिसका अपना मेडिकल कॉलेज है - एक ऐसा मेडिकल कॉलेज जिसके मालिक दूध उत्पादक हैं। इस मेडिकल कॉलेज में 200 सीटें हैं। जिले और राज्यों के सुदूर पिछडे इलाकों में जहां योग्य डॉक्टरों की कमी है, वहां मेडिकल कॉलेज का निर्माणऔर गरीब गोपालकों किसानों के बच्चों को फीस में छूट,चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक नयी पहल है।
बनास सिविल अस्पताल
बनास डेरी सिविल अस्पताल, पालनपुर में गुजरात सरकार के सहयोग से काम कर रही है। इस सिविल अस्पताल में बनास डेरी जनता जनार्दनको स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्धता करानेके लिए काम कर रही है। 840 बिस्तरों की सुविधा से लैस इस संस्थानेCOVID-19 के समय में ऑक्सीजन तथा मरीजों की चिकित्सा में अप्रतिम योगदान दिया था।
उमंग मॉल-शहरों की सुविधा को गाँवो में लाने की पहल
पशुपालन को आकर्षक बनाए रखने के लिए हमें अपने गावों में शहरों जैसी सुविधाओं को लेकर आना होगा जिनमें सड़कें पानी बिजली के अलावा सारी जरूरत की चीजों की उपलब्धता और अच्छी मॉल जैसे वातावरण में शॉपिंग की सुविधाएं शामिल हैं। इस दिशा में उमंग मॉल, शहरों जैसा शॉपिंग का अनुभव को गावों में लाने की पहल है। रिलायंस और डी मार्ट जैसे बड़े दुकानों की तर्ज पर उमंग मॉल के ब्रांड में बनास डेरी ने अब तक बनासकांठा और निकटवर्ती जिलों और राज्यों में 38 उमंग मॉल चालू किए हैं और 300 से अधिक उमंग मॉल शीघ्र ही खोलने का प्लान है। ये उमंग मॉल अब धीरे-धीरे काफी लोकप्रिय हो चले हैं और इनमें बाजार से कम कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण वस्तुएं, कैशलेस जैसी सुविधाओं के साथ उपलब्ध हैं। उमंग मॉल में पशुपालन तथा कृषि में उपयोग होने वाले सामान भी उपलब्ध हैं और सर्कुलर इकोनामी की दिशा में यह एक नवीन उदाहरण है। बनास डेरी के इस प्रयास से कई रोजगार भी उत्पन्न हो रहे हैं।
वृक्षारोपण
बनास डेरी बनासकांठा में वन संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय है। 2020 के मानसून से शुरू होकर पिछले 4 वर्षों में बनास डेरी ने सीडबाल रोपण और वृक्षारोपण के कई कार्यक्रमों का आयोजन किया है जिसमें दूध उत्पादक स्वयंसेवकों की भागीदारी से चार करोड़ से अधिक सीड बाल बनाकर अंबाजी और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में हाथ से या ड्रोन की मदद से गिराए गए। अब तक 3 करोड़ से अधिक पौधे उगाए जा चुके हैं। हमने10 सालों में 10 करोड़ से अधिक वृक्ष लगाने का लक्ष्य लिया है।
बनास डेरी किसानों और दूध उत्पादकों के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत तलाशने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इस दिशा में बनास डेरी ने अगले 5 वर्षों में बनासकांठा जिले में 1 करोड़ चंदन के पेड़ उगाने का लक्ष्य रखा है। इसमें हम किसानों को प्रतिव्यक्ति को 10-100 चंदन के पेड़ उगाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वर्तमान में बनास डेरी ने 7 लाख से अधिक चंदन के पेड़ उगाए हैं।
बनास डेरी बनासकांठा में जल संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रही है और इसके लिए गांवों में तालाबों के नव-निर्माण एंव पुनर्निर्माण का कार्य किया है। इस प्रयास से बनास डेरी ने 245 तालाबों का कायाकल्प लोकभागीदारी के साथ किया है जो जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
दूधवानीएक रेडियो चैनल है जो बनास डेरी द्वारा जन-जन तक पहुंचने की एक पहल है। इस रेडियो स्टेशन के माध्यम से बनास डेरी पशुओं के बारे में जानकारी और दूध उत्पादकों के फायदे से जुड़ी बातें सांझा करती है।
बनास डेयरी के इस प्लांट में हम माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के स्वर्णिम क्रांति के सपने पर काम कर रहे हैं। इस संयंत्र में हमारे पास शहद प्रसंस्करण सुविधा है जो पूरी तरह से स्वचालित है और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं से सुसज्जित है। इस प्लांट में हम किसानों को मधुमक्खी पालन के बारे में प्रशिक्षण देते हैं और उन्हें अतिरिक्त आय के लिए ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।इसके अलावा इस प्लांट में आधुनिक आटा प्लांट, टेक होम राशन (THR) प्लांट, चाय पैकेजिंग और तेल पैकेजिंग की सुविधाएं हैं।
उत्पाद |
THR |
ऑयल पैकेजिंग |
आटा |
शहद प्रोसेसिंग |
कोल्ड स्टोरेज |
चाय की पैकिंग |
सरसों और मूंगफली के लिए तेल मिल (प्रस्तावित) |
उत्पादनक्षमता |
200 MTPD |
200 MTPD |
50 MTPD |
50 Kg/Hr |
10,000 MT |
1 MTPD |
100 MTPD |
पशु आहार संयंत्र
बनास डेरी के पालनपुर और कातरवामें दो पशु चारा संयंत्र हैं।कातरवा में एशिया का सबसे बड़ा पशु आहार संयंत्र है। बनास डेरी केइन संयंत्रों की क्षमता 3100 MTPD पशु आहार उत्पादन करने की है। बनास डेरी नेइन संयंत्रों में बेहतर स्वास्थ्य, प्रजनन और गुणवत्ता वाले दूध के उत्पादन को बनाए रखने के लिए डेरी पशुओं को विभिन्न श्रेणियों का खनिज मिश्रण प्रदानकरने के लिए60 MTPD खनिज मिश्रणखनिज मिश्रण संयंत्र स्थापित किया है। बनास डेयरीइन संयंत्रोंमें निम्नलिखित उत्पादों का गाय दान, बनास भेंस दान, बनास सागरभा दान, बनास काफ स्टार्टर, बनास मिक्स आहार, बनास सुपरफैट, बनास क्षीरवृद्धि + (तरल कैल्शियम), बनास समृद्धि, जैसे विभिन्न पूर्ण पशु आहार वेरिएंटउत्पादन कर रही है।
बनास डेरी के इस संयंत्र की स्थापना वर्ष 2009 में की गई थी।बनास डेरी का यह वीर्य स्टेशन, दामा में 17 एकड़ जमीन पर स्थितहै और यहां 55 लोग काम करतेहैं।बनास डेरी वीर्य स्टेशन में उत्तमनस्लवाले 159 पशु हैं जिसमे मेहसाणा, बन्नी, बफ़ेलो, क्रॉस ब्रीड और कांकरेजनस्ल शामिल हैं। बनास डेरी देशी नस्लों को सुधारने पर जोर दे रही है। मेहसाणी में PT (Progeny Testing) कार्यक्रम, कांकरेज में PS (Pedigree Selection) कार्यक्रम और क्रॉस ब्रीड में दूध प्रतियोगिता के माध्यम से सांडों का चयन किया जाता है। स्थानीय कांकरेज गाय नस्ल के बैल, भैंस और क्रॉस नस्ल के पशुओं का पालन किया जाता है और वीर्य एकत्र करसंसोधित किया जाता है और जमे हुए वीर्य की खुराक तैयार की जाती है।इस संयंत्र में हमारी उत्पादन क्षमता 20 लाखवीर्य खुराक प्रति वर्ष है। बनास डेरी का लक्ष्य प्रति वर्ष 30 लाखवीर्य खुराक के उत्पादन का है। इस दिशा में बनास डेरी वीर्य स्टेशनके सुदृढ़ीकरण की योजना बना रही है जिसमें बनास डेरीअच्छी नस्लवाले सांडो की संख्या भी बढायी जायेगी। बनास डेरी सेक्स सॉर्टेड वीर्य उत्पादन की भी योजना बना रही है।
खुराक का विवरण |
संख्या (प्रति वर्ष) |
कांकरेज गायों की वीर्य की खुराक उत्पादन |
2,30,710 |
मेहसानी भैंसों की वीर्य की खुराक उत्पादन |
8,99,710 |
एचएफ क्रॉस गायों की वीर्य की खुराक उत्पादन |
6,16,935 |
बनी भैंसों की वीर्य की खुराक उत्पादन |
5,145 |
कुल वीर्य का खुराक उत्पादन |
17,52,500 |
इस वर्ष वीर्य का खुराक उत्पादन |
25,00,000 |
बनासडेरीकाउत्तरप्रदेशमेंसफलताकासफर
बनास डेरी, ने उत्तर प्रदेश के दुग्ध क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान किया है। कानपूर और लखनऊ में मौजूदा प्लांट्स के साथ, बनास डेरी किसानों के लिए समर्थन का स्तम्भ और उपभोक्ताओं के लिए गुणवत्ता युक्त दूध उत्पादों का स्रोत है। इस वर्ष बनास डेरी ने उत्तर प्रदेश के 1.26 लाख दुग्ध उत्पादकों को 101 करोड़ रुपये का बोनस वितरित किया है।
कानपुर प्लांट नवंबर 2016 में स्थापित किया गया था। यह 40 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इस प्लांट में 168 लोग कार्यरत हैं।यहप्लांटकानपुर देहात, जालौन, औरईया, फरूखाबाद, मैनपुरीऔर इटावाके जिलों के 1,314 समितीयों के50,142 दूध उत्पादकों सेकुल 1.1करोड़ लाख लीटर दूध प्राप्त करता है।आज हम 6 जिलों से दूध संग्रह कर रहे है जो अगले साल तक 10 जिलों तक विस्तारित हो जाएगा।
संयंत्र की क्षमताएं: