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ब्रेथ ईजी चेस्ट सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, अस्सी, वाराणसी द्वारा “ब्रेथ ईजी सेमिनार कांफ्रेंस हॉल” में आयोजित एक “पेशेंट्स एजुकेशन प्रोग्राम” में डॉ. एस.के पाठक (वरिष्ठ श्वांस, एलर्जी, फेफड़ा रोग विशेषज्ञ) ने मरीजों को बताया कि “फरवरी के इस महीने में मौसम बदलने के साथ बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है, इस समय मौसम में बदलाव तेजी से हो रहा है, दिन भर नार्मल टेम्परेचर जबकि सुबह और शाम में ठंड होती हैं । ऐसे में बच्चों और उम्रदराज लोगो को गर्म पकड़े पहनाएं, सुबह शाम में बाहर कम निकलने दें। जरा सी लापरवाही से सर्दी के साथ बुखार और खांसी शुरू हो जा रही है। अगर समय से इलाज नहीं हो रहा है तो निमोनिया के शिकार हो जा रहे हैं । यह मौसम श्वांस रोगियों के लिए विशेष एहतियात बरतने का है। सांस, दमा रोगियों को तैलीय खाद्य पदार्थों से परहेज रखना चाहिए । डॉ. पाठक ने मरीजों को अस्थमा के लक्षण के बारे में भी बताया जिसमे सांस लेने में परेशानी होना, दम घुटना, सांस लेते समय आवाज होना, सांस फूलना, छाती में कुछ जमा हुआ सा या भरा हुआ सा महसूस होना, बहुत खांसने पर चिकना-चिकना कफ आना, मेहनत वाले काम करते समय सांस फूलना आदि होते हैं।“
डॉ.पाठक ने मरीजों को आगे बताया कि “बदलते हुए मौसम में एलर्जी व अस्थमा के मरीजों को दिक्कतें ज्यादा बढ़ जाती हैं, इसलिए उनके चिकित्सक द्वारा बताए गए इन्हेलर/ नेसल स्प्रे को उन्हें नियमित इस्तमाल करना चाहिए व एलर्जी के मरीजों को इस दौरान एलर्जी टेस्ट करवाकर उसके अनुरूप दवा पुन: लेना चाहिएI अस्थमा के मरीजों को मौसम के अचानक बदलाव से सावधान रहना चाहिए, खास तौर पर सुबह के वक्त बिस्तर से उठकर एकदम खुली हवा में नहीं जाना चाहिए, बल्कि थोड़ा इंतजार करें। अस्थमा बढ़ाने वाले एलर्जी के तत्व बदलते हुए मौसम में ज्यादा होने की वजह से दमा के मरीजों को ज्यादा तकलीफ होती है, ऐसे में अस्थमा के रोगियों को विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। उन्हें जल्दी-जल्दी गर्म और सर्द तापमान में नहीं जाना चाहिए। इसके अलावा इस मौसम में स्वस्थ रहने के लिए अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना बेहद अहम है। जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक होती है, उन्हें सर्दी-जुकाम आदि जैसी समस्याएं आसानी से नहीं होती।
डॉ.पाठक ने यह भी बताया कि “एलर्जी के इलाज के लिए बाजार में कई सारे दवाईयां उलब्ध है, जो लेने पर तुरंत आराम तो देती हैं पर जैसे ही दवा का असर खत्म हो जाता हैं तो समस्या फिर से खड़ी हो जाती हैं, इसका स्थायी इलाज सिर्फ एकमात्र इम्युनोथेरेपि (वैक्सीन) ही हैं, जिसके द्वारा भविष्य में एलर्जी की संभवना कम हो जाती हैं, और वैक्सीन से शरीर का इम्यून सिस्टम नियंत्रित हो जाता हैं, जिससे शरीर में एलर्जी रोग लड़ने की क्षमता स्वत: हो जाती हैं एवं मरीजो को एलर्जी रोग से छुटकारा मिलने की संभवना बढ़ जाती हैं I यदि किसी व्यक्ति को एलर्जी की समस्या है तो इसकी जाँच एलर्जी टेस्टिंग द्वारा की जाती है, जिसके द्वारा एलर्जी के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त हो जाती हैं I एलर्जी जाँच एवं इम्युनोथेरेपि (वैक्सीन) दोनों की सुविधा ब्रेथ ईजी चेस्ट सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, अस्सी, वाराणसी पर उपलब्ध हैं I समय रहते एलर्जी की जाँच कराये, और यदि एलर्जी की बीमारी पाई जाती हैं तो इम्युनोथेरेपि (वैक्सीन) के द्वारा इलाज कराये, जिसके द्वारा भविष्य में होने वाले अस्थमा जैसे घातक रोग से बचा जा सकता हैं I