वाराणसी। साइबर अपराध के खिलाफ कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस ने पिछले एक वर्ष में व्यापक अभियान चलाकर साइबर गैंग, अवैध कॉल सेंटर और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार इस दौरान 58 साइबर गैंग का पर्दाफाश कर 277 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। वहीं राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की 16,982 शिकायतों का निस्तारण किया गया।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने 14 सितंबर 2026 को साइबर थाना और साइबर सेल का निरीक्षण कर साइबर अपराध संबंधी शिकायतों और पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न साइबर पोर्टलों का अवलोकन करने के साथ कंप्लेंट रजिस्टर में दर्ज शिकायतों, लंबित मामलों और उनके निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली। शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
साइबर थाना और साइबर सेल पर शिकायत दर्ज कराने वाले पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए समर्पित शिकायत सहायता कक्ष (Dedicated Help Desk) स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां तैनात पुलिसकर्मी शिकायत पंजीकरण की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और उपलब्ध विधिक एवं तकनीकी सहायता के संबंध में शिकायतकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे।
पुलिस के अनुसार डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 5 अभियोगों में 36 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इनके कब्जे से संबंधित मामलों की करीब 1.20 करोड़ रुपये की धनराशि, मोबाइल फोन, चार पहिया वाहन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल उपकरण बरामद किए गए।
पिछले एक वर्ष में साइबर क्राइम पुलिस ने 15 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया और इनमें शामिल 175 आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में निवेश पर अधिक रिटर्न का लालच देकर साइबर ठगी, विदेशी नागरिकों को अमेजन और फ्लिपकार्ट से संबंधित PPC Services उपलब्ध कराने के नाम पर खुद को Federal अथवा American Officials बताकर ठगी और नौकरी दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, GST फीस सहित अन्य शुल्क वसूलने वाले नेटवर्क का खुलासा हुआ।
NCRP की 16,982 शिकायतों का निस्तारण करते हुए साइबर अपराध से संबंधित करीब 25 करोड़ रुपये की धनराशि होल्ड कराई गई। पुलिस के अनुसार आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद साइबर अपराध के पीड़ितों को 4.5 करोड़ रुपये उनके बैंक खातों में वापस कराए गए।
साइबर अपराध में इस्तेमाल किए गए 10,176 मोबाइल नंबरों और उनसे संबंधित 8,262 मोबाइल डिवाइसों के IMEI नंबर ब्लॉक कराए गए। पुलिस के अनुसार इस कार्रवाई से इन नंबरों और उपकरणों के दोबारा साइबर अपराध में इस्तेमाल की संभावना को रोकने में मदद मिली।
साइबर अपराध से जुड़े मामलों में गिरफ्तार आरोपियों में से 21 के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार इसका उद्देश्य संगठित साइबर अपराध में शामिल अपराधियों और उनके नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को विभिन्न प्रलोभनों और झांसे में लेकर मल्टीलेवल मार्केटिंग सहित अन्य साइबर अपराधों में शामिल किए जाने के मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की। इस दौरान 550 लोगों को साइबर अपराधियों के चंगुल से मुक्त कराकर रेस्क्यू किया गया। आवश्यकता के अनुसार उनके परिजनों और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर सुरक्षित सुपुर्दगी और पुनर्वास की कार्रवाई की गई।
इसके अलावा साइबर अपराध में इस्तेमाल किए गए 17 चार पहिया वाहन भी बरामद किए गए।
साइबर अपराध से बचाव के लिए कमिश्नरेट पुलिस ने व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया। विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों, कैंपों, सार्वजनिक स्थलों और प्रमुख चौराहों पर जाकर 25 हजार से अधिक लोगों को साइबर अपराध के तरीकों और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। इस दौरान साइबर सुरक्षा से संबंधित पंपलेट और पुस्तिकाएं भी वितरित की गईं।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने लोगों से बैंक खाते की गोपनीय जानकारी जैसे PIN, CVV, OTP, इंटरनेट बैंकिंग यूजर आईडी और पासवर्ड किसी से साझा नहीं करने की अपील की है। उन्होंने बिना परीक्षा भर्ती, घर बैठे मोटी कमाई, आसान नौकरी और कम समय में अधिक आय जैसे भ्रामक ऑफरों से सावधान रहने को कहा।
पुलिस ने संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने और अनजान APK, एप्लीकेशन या SMS Forwarder डाउनलोड अथवा इंस्टॉल नहीं करने की सलाह दी है। ऑनलाइन सट्टेबाजी, जुआ और त्वरित लाभ का लालच देने वाले संदिग्ध प्लेटफॉर्म से भी दूर रहने को कहा गया है।
ऑनलाइन वित्तीय ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस के अनुसार जितनी जल्दी शिकायत दर्ज की जाएगी, ठगी की रकम को होल्ड कराने और उसकी रिकवरी की संभावना उतनी ही अधिक रहती है।
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और साइबर अपराध के प्रति जागरूक बनें।