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विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर एपेक्स में शैक्षणिक सत्र, 21वां वार्षिकोत्सव भी मनाया



 08/Sep/26

हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन व पुनर्वास में फिजियोथेरेपी की भूमिका पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

वाराणसी। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस एवं एपेक्स कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी के 21वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर एपेक्स कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एवं एपेक्स हॉस्पिटल एडवांस्ड फिजिकल मेडिकल रिहैब यूनिट के संयुक्त तत्वावधान में शैक्षणिक सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “हृदय संबंधी रोगों एवं स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन और पुनर्वास में फिजियोथेरेपी एवं शारीरिक गतिविधियों की भूमिका” रहा।

एपेक्स के चेयरमैन प्रो. डॉ. एसके सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में मुख्य अतिथि न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुनील कुमार, सम्मानित अतिथि बीएचयू के सेवानिवृत्त वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अयोध्या प्रसाद, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अकदस मुमताज़, ओंको रिहैब विशेषज्ञ डॉ. दिबयेन्दु, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. सौम्या, फिजिकल रिहैब हेड डॉ. यूके सिंह, विशिष्ट अतिथि फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. प्रकाश पुंज, डॉ. आनंद शंकर सिंह, डॉ. एसके मंडल सहित प्रधानाचार्य प्रो. पुनीत जायसवाल और उप-प्रधानाचार्य डॉ. सौरभ आनंद ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

पुस्तक का विमोचन और उत्कृष्टता पुरस्कार

कार्यक्रम के दौरान विश्व फिजियोथेरेपी दिवस की थीम पर परिचर्चा आयोजित की गई। अतिथियों का अभिनंदन करने के साथ ही कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. पुनीत जायसवाल द्वारा लिखित पुस्तक ‘कम्युनिटी फिजियोथेरेपी एंड रिहैबिलिटेशन’ का विमोचन किया गया।

शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए फैकल्टी एवं विद्यार्थियों को एपीआई फाउंडेशन अवॉर्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ताओं ने हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन तथा पुनर्वास में फिजियोथेरेपी एवं नियमित शारीरिक गतिविधियों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

शोध-पत्रों के जरिए साझा की नई जानकारी

शैक्षणिक सत्र में डॉ. पुनीत जायसवाल ने ‘पुनर्वास में ब्लड फ्लो रिस्ट्रिक्शन ट्रेनिंग’, डॉ. कशिश सिंह ने ‘वृद्ध महिलाओं में संतुलन सुधारने के लिए प्रोप्रियोसेप्टिव एवं रिएक्टिव बैलेंस ट्रेनिंग के तुलनात्मक प्रभाव’, डॉ. सुरभि आर्या ने ‘ट्रिगर पॉइंट से राहत में ड्राई नीडलिंग और अल्ट्रासाउंड थेरेपी के तुलनात्मक अध्ययन’ तथा डॉ. रजत सिंह ने ‘भारतीय वयस्कों की संज्ञानात्मक क्षमता पर एरोबिक व्यायाम के प्रभाव’ विषय पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए क्विज, वाद-विवाद और पोस्टर प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का समापन “मूवमेंट जीवन को गति देता है और फिजियोथेरेपी उसे सशक्त बनाती है” संदेश के साथ हुआ। आयोजकों ने कहा कि फिजियोथेरेपी न केवल रोगों के उपचार और पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, बल्कि सक्रिय एवं स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में भी अहम योगदान देती है।


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