रियाज़, राग एवं रस-भाव की सूक्ष्मताओं पर छह दिनों तक होगा मंथन, देश के प्रतिष्ठित कला विशेषज्ञ विद्यार्थियों को देंगे प्रशिक्षण
वाराणसी। भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की समृद्ध परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के उद्देश्य से महिला महाविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में छह दिवसीय विशेष कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। महिला महाविद्यालय के गायन, वादन एवं नृत्य विभागों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यशाला 7 से 12 सितम्बर 2026 तक चलेगी।
कार्यशाला का विषय “भारतीय शास्त्रीय गायन, वादन एवं नृत्य की सूक्ष्मताओं का अध्ययन : रियाज़, राग एवं रस-भाव” रखा गया है। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागी विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय गायन, वादन और नृत्य की तकनीकी एवं भावात्मक बारीकियों को समझने और व्यावहारिक रूप से अनुभव करने का अवसर मिल रहा है।
कार्यशाला के प्रारंभिक सत्रों में भरतनाट्यम नृत्य विदुषी माला होम्बल, गायन विधा की विशेषज्ञ प्रो. संगीता पंडित तथा दिल्ली के सितार वादक डॉ. गोपाल कृष्ण शाह ने विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रतिभागियों को भारतीय संगीत, वाद्य एवं नृत्य की विविध सूक्ष्मताओं से अवगत कराया।
महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ शुभारंभ
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र का विधिवत शुभारंभ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पं. मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन किया गया। महाविद्यालय की छात्राओं ने कुलगीत की मधुर प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को गरिमामय बनाया।
अतिथियों का स्वागत करते हुए महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रीता सिंह ने कहा कि छह दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में व्याख्यानों, प्रदर्शन-व्याख्यानों, संवादात्मक सत्रों और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को रियाज़ यानी साधना एवं अभ्यास, राग की स्वरात्मक संरचना, लय-ताल तथा रस-भाव की सौन्दर्यात्मक एवं भावात्मक अभिव्यक्ति के विविध आयामों को समझने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा।
कई प्रतिष्ठित कला विशेषज्ञों की सहभागिता
कार्यशाला में गायन विधा में प्रो. संगीता पंडित एवं प्रो. राम शंकर, सितार वादन में प्रो. राजेश शाह, प्रो. प्रेम किशोर मिश्रा एवं डॉ. गोपाल कृष्ण शाह तथा नृत्य विधा में भरतनाट्यम की विदुषी माला होम्बल की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी विशेषज्ञों को सम्मानित भी किया गया।
कार्यशाला के आयोजन की भूमिका, उद्देश्य एवं उपयोगिता पर वाद्य विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंजलि शर्मा ने प्रकाश डाला।
पद्मश्री पं. राजेश्वर आचार्य ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष, शास्त्रीय गायक एवं जलतरंग वादक पद्मश्री पं. राजेश्वर आचार्य ने विद्यार्थियों को कला साधना के प्रति प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कला का ऐसा अभ्यास करना चाहिए कि उसका प्रदर्शन सहज रूप से, बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के किया जा सके।
उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास, अनुशासन और निरंतर साधना के महत्व को समझाते हुए शास्त्रीय कलाओं में गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
विद्यार्थियों के कलात्मक व्यक्तित्व के विकास में सहायक होगी कार्यशाला
कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. शोभित नाहर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों में शास्त्रीय कलाओं के प्रति अनुशासन, साधना और सौन्दर्यबोध विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर साबित होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आयोजन प्रतिभागियों के कलात्मक व्यक्तित्व को समृद्ध बनाने में सहायक होगा।
कार्यक्रम में प्रो. ऋचा कुमार, प्रो. विधि नागर, प्रो. लयलीना भट्ट, प्रो. सीमा तिवारी, डॉ. हरीश कुमार, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. सतीश, डॉ. प्रीतेश आचार्य सहित अनेक गणमान्यजन एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।
कार्यशाला के संयोजन में डॉ. श्वेता कुमारी का सहयोग रहा, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. रुक्मिणी जायसवाल ने किया।