राहत शिविरों में तीन समय भोजन, चिकित्सा, बिजली और बच्चों-बुजुर्गों के लिए दूध-फल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
जिले में बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की समीक्षा को लेकर प्रदेश के स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने बुधवार को सर्किट हाउस सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को शासन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही राहत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर मुहैया कराई जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।
मंत्री ने राहत शिविरों में रह रहे लोगों के लिए रहने, भोजन और जरूरत के अनुसार चिकित्सा सुविधा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों के लिए दूध, फल आदि की पर्याप्त व्यवस्था कराने को कहा।
रविन्द्र जायसवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार करने की स्थिति में लोगों के बीच भय का माहौल न बनने दिया जाए। प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्रों में भ्रमण करता रहे और लोगों को यह भरोसा दिलाया जाए कि संकट की स्थिति में प्रशासन उनके साथ खड़ा है।
उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब भी रह रहे लोगों के लिए खाद्यान्न के साथ बच्चों के लिए दूध आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। क्षेत्रीय पार्षदों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में बच्चों को दूध वितरित कराने के निर्देश दिए।
मंत्री ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में बिजली की कटौती न हो और वहां निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए पर्याप्त चारे और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं कराने को भी कहा।
उन्होंने बरसात के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों और उनमें बने गड्ढों को दो दिन के भीतर हर हाल में दुरुस्त करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी व्यक्ति के दुर्घटना का शिकार होने की आशंका न रहे।
मंत्री ने यह भी कहा कि बरसात के दौरान किसी भी गली में अंधेरा नहीं होना चाहिए। सभी स्ट्रीट लाइट चालू हालत में रहें। पार्षदों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में इसकी निगरानी करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बाढ़ राहत कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों के लिए तीन समय भोजन और नाश्ते की व्यवस्था की गई है। शिविरों में रहने की समुचित व्यवस्था के साथ सुरक्षा के दृष्टिगत सुरक्षा कर्मियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है।
उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए दूध और फल आदि की भी व्यवस्था कराई गई है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए जिले में 35 नावें लगाई गई हैं। प्रत्येक नाव पर एक पुलिसकर्मी की ड्यूटी टॉर्च के साथ लगाने की व्यवस्था की जा रही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिले में 16 बाढ़ राहत चौकियों पर मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। राहत शिविरों में रह रहे लोगों को आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, अभी तक जिले की एक तहसील के 14 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। पशुओं के लिए आवश्यक दवाओं का वितरण भी किया जा रहा है और अब तक 692 कैंपों के माध्यम से पशु चिकित्सा संबंधी दवाएं वितरित की जा चुकी हैं।
बैठक के बाद मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने जेपी मेहता के राहत शिविर का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों को खाद्यान्न के किट उपलब्ध कराए और शिविर में रह रहे लोगों से उनका कुशलक्षेम पूछा।
उन्होंने प्रभावित परिवारों को आश्वस्त किया कि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और शासन-प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। इस दौरान मंत्री ने बच्चों को चॉकलेट भी वितरित कीं।