IMD के Flash Flood Guidance Bulletin में वाराणसी Low to Moderate Risk श्रेणी में, पूर्वी यूपी के कई जिले भी संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में
वाराणसी। लगातार बारिश के बीच वाराणसी में फ्लैश फ्लड को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के Hydromet Division, Flash Flood Guidance Cell की ओर से जारी National Flash Flood Guidance Bulletin के आधार पर जिले में अलर्ट जारी किया है। IMD के 3 सितंबर 2026 के बुलेटिन में वाराणसी को Low to Moderate Flash Flood Risk श्रेणी में रखा गया है। अगले 24 घंटे के दौरान निचले इलाकों में जलभराव और जलनिकासी मार्गों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
IMD के आकलन में वाराणसी के अलावा फतेहपुर, कौशांबी, बांदा, चित्रकूट, मिर्जापुर, प्रयागराज और सोनभद्र समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फ्लैश फ्लड की संभावित परिस्थितियों पर निगरानी की गई है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महोबा, झांसी और ललितपुर तथा मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी संभावित जोखिम का आकलन किया गया है।
मौसम विभाग के आकलन के अनुसार, जिन इलाकों में पहले से पर्याप्त बारिश हो चुकी है और जमीन में नमी अधिक है, वहां आगे होने वाली बारिश का पानी जमीन में कम समाने की स्थिति में तेजी से सतह पर बह सकता है। इसे Surface Runoff कहा जाता है।
यदि कम समय में बड़ी मात्रा में पानी जमा हो जाए और उसकी निकासी पर्याप्त तेजी से न हो सके, तो निचले इलाकों में Inundation यानी जलभराव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में नालों, छोटी नदियों, जलधाराओं और अन्य जलनिकासी मार्गों के आसपास पानी का स्तर तेजी से बढ़ सकता है।
IMD के बुलेटिन में Imminent Flash Flood Threat (IFFT) के तहत पूर्वी उत्तर प्रदेश के बांदा और चित्रकूट को चिन्हित किया गया है। इसका मतलब है कि उपलब्ध वर्षा आकलन और Flash Flood Guidance के आधार पर इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बनने की संभावना पर तत्काल निगरानी जरूरी है।
पूर्वी मध्य प्रदेश के छतरपुर, रीवा, सिंगरौली, सीधी और मऊगंज में भी फ्लैश फ्लड थ्रेट का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा Persistent Flash Flood Threat (PFFT) के तहत भी बांदा और चित्रकूट समेत कई क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। इसका अर्थ है कि पहले से हुई बारिश के कारण फ्लैश फ्लड का खतरा बना हुआ है और यह कुछ समय तक जारी रह सकता है।
IMD का Flash Flood Guidance Bulletin किसी क्षेत्र में हुई और संभावित बारिश, जमीन की नमी तथा जलग्रहण क्षेत्रों की परिस्थितियों के आधार पर अचानक बाढ़ के संभावित खतरे का आकलन करता है। इसमें कई तकनीकी संकेतकों का इस्तेमाल किया जाता है।
Merged Mean Areal Precipitation (MAP): विभिन्न उपलब्ध वर्षा आंकड़ों और अनुमानों को मिलाकर तैयार किया गया वर्षा आकलन।
Flash Flood Guidance (FFG): यह बताता है कि किसी जलग्रहण क्षेत्र में कितनी बारिश होने पर जलधारा में अचानक तेज बहाव और फ्लैश फ्लड की स्थिति बन सकती है।
Imminent Flash Flood Threat (IFFT): जब उपलब्ध वर्षा आकलन और FFG की तुलना तत्काल फ्लैश फ्लड की संभावित स्थिति का संकेत देती है।
Persistent Flash Flood Threat (PFFT): पहले से हुई बारिश के कारण बना हुआ फ्लैश फ्लड का खतरा, जिसके कुछ समय तक जारी रहने की संभावना हो।
Forecast Flash Flood Threat (FFFT): मौसम पूर्वानुमान मॉडल से प्राप्त संभावित बारिश और Flash Flood Guidance के आधार पर भविष्य के खतरे का आकलन।
Flash Flood Risk (FFR): 12, 24 और 36 घंटे की अवधि में Flash Flood Threat के संकेतों के आधार पर संभावित जोखिम का आकलन।
IMD के आकलन में Flash Flood Threat और Risk को तीन प्रमुख स्तरों में समझा जाता है—
High Threat / High Risk — Take Action: खतरा अधिक होने पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता।
Moderate Threat / Moderate Risk — Be Prepared: संभावित खतरे को देखते हुए तैयार रहने की जरूरत।
Low Threat / Low Risk — Be Updated: खतरा अपेक्षाकृत कम, लेकिन लगातार अपडेट लेते रहना जरूरी।
वाराणसी को Low to Moderate Flash Flood Risk श्रेणी में रखे जाने के बाद निचले इलाकों, जलभराव वाले स्थानों, नालों और जलनिकासी मार्गों के आसपास विशेष सावधानी जरूरी है। तेज बारिश के दौरान इन क्षेत्रों में पानी का स्तर अचानक बढ़ सकता है।
लोगों को बारिश के दौरान जलभराव वाले रास्तों से अनावश्यक रूप से गुजरने और तेज बहाव वाले पानी के संपर्क में आने से बचने की सलाह दी गई है।
बुलेटिन में कुछ जलग्रहण क्षेत्रों में अगले 24 घंटे के दौरान भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना को ध्यान में रखते हुए फ्लैश फ्लड रिस्क का आकलन किया गया है। कुछ संबंधित क्षेत्रों के लिए वर्षा की मात्रा 144 मिमी तक पहुंचने की संभावना का उल्लेख है।
हालांकि, यह आंकड़ा पूरे वाराणसी शहर के लिए निश्चित वर्षा पूर्वानुमान नहीं है। यह बुलेटिन में चिन्हित संबंधित जलग्रहण क्षेत्रों के आकलन से जुड़ा है।
फ्लैश फ्लड के जोखिम का आकलन करते समय पहले से हो चुकी बारिश को भी ध्यान में रखा जाता है। यदि जमीन में पहले से नमी या पानी की मात्रा अधिक है, तो अतिरिक्त बारिश का पानी जमीन में कम समा सकता है और सतह पर अधिक तेजी से बह सकता है। इससे अचानक जलभराव और जलधाराओं में पानी बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
वाराणसी को Low to Moderate Flash Flood Risk में शामिल किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि शहर में निश्चित रूप से फ्लैश फ्लड आने वाली है। IMD का यह बुलेटिन संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान और निगरानी के लिए जारी किया जाता है।
वास्तविक स्थिति स्थानीय स्तर पर होने वाली बारिश, जमीन की नमी, जलनिकासी व्यवस्था, जलग्रहण क्षेत्र और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। इसलिए लोगों को IMD और जिला प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
IMD के जारी बुलेटिन के अनुसार अगला बुलेटिन 3 सितंबर 2026 को 11:30 IST के आधार पर जारी किया जाना है। मौसम की स्थिति में बदलाव के साथ Flash Flood Risk का आकलन भी बदल सकता है।
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों, नालों और तेज बहाव वाले पानी के आसपास जाने से बचें। किसी भी अफवाह पर भरोसा करने के बजाय मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं को ही प्राथमिकता दें।