चेतावनी स्तर से करीब एक मीटर नीचे गंगा, बाढ़ की आशंका के बीच 61 राहत शिविर, 198 नावें और NDRF-PAC की टीमें तैयार
गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच वाराणसी में जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के राजघाट गेज स्टेशन के अनुसार रविवार दोपहर 2 बजे गंगा का जलस्तर 69.26 मीटर दर्ज किया गया और पानी करीब 5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। हालांकि वर्तमान जलस्तर अभी चेतावनी और खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ते पानी को देखते हुए प्रशासन ने राहत एवं बचाव तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है।
राजघाट पर गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का स्तर 71.262 मीटर है। इस लिहाज से वर्तमान जलस्तर चेतावनी स्तर से करीब एक मीटर नीचे है। राजघाट गेज स्टेशन पर गंगा का अब तक का उच्चतम बाढ़ स्तर (H.F.L.) 73.901 मीटर दर्ज किया गया है। रविवार को वाराणसी में 14.4 मिलीमीटर बारिश भी रिकॉर्ड की गई। जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण घाटों और नदी किनारे के इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने जनपद में 61 बाढ़ राहत शिविर चिन्हित किए हैं। इन शिविरों में ठहरने, भोजन, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता, बिस्तर और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
राहत शिविरों में कम्युनिटी किचन के माध्यम से प्रभावित लोगों को प्रतिदिन तीन समय पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। राजस्व, चिकित्सा, पशुपालन, नगर निगम सहित संबंधित विभागों की टीमें भी आवश्यकता के अनुसार शिविरों में तैनात रहेंगी।
संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थानीय स्तर पर निगरानी और तत्काल कार्रवाई के लिए जिले में 21 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। इन चौकियों के माध्यम से जलस्तर, आवागमन और जनसुरक्षा की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी।
राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 198 नावों की व्यवस्था की गई है। आवश्यकता पड़ने पर नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री पहुंचाने का काम किया जाएगा। नावों के संचालन में सुरक्षा मानकों और प्रशिक्षित नाविकों की उपलब्धता का भी ध्यान रखा जाएगा।
आपात स्थिति में त्वरित रेस्क्यू के लिए NDRF, जल पुलिस एवं PAC की टीमें तैयार रखी गई हैं। नदी तटवर्ती और जलभराव वाले क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर इन टीमों को तत्काल भेजकर बचाव अभियान संचालित किया जाएगा।
मानव जीवन के साथ पशुधन की सुरक्षा के लिए भी प्रशासन ने तैयारी की है। संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए पर्याप्त भूसे की व्यवस्था की गई है। पशुपालन विभाग की टीमें उपचार, टीकाकरण और स्वास्थ्य परीक्षण के लिए तैयार रहेंगी।
बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए 24 घंटे बाढ़ नियंत्रण कक्ष संचालित किया जा रहा है। नियंत्रण कक्ष के माध्यम से गंगा के जलस्तर, मौसम और संभावित प्रभावित क्षेत्रों की सूचनाओं की निगरानी की जा रही है। किसी भी आपात सूचना को संबंधित विभागों और अधिकारियों तक तत्काल पहुंचाकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जिला प्रशासन केंद्रीय जल आयोग और मौसम विभाग से प्राप्त अधिकृत सूचनाओं के आधार पर जलस्तर एवं मौसम की स्थिति का लगातार आकलन कर रहा है।
राहत शिविरों में जरूरत के अनुसार चिकित्सा दलों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। आवश्यक दवाओं और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था के साथ बाढ़ के बाद संभावित जलजनित बीमारियों एवं संक्रमणों की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
प्रभावित परिवारों को तत्काल दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए बाढ़ राहत किट भी पर्याप्त मात्रा में तैयार रखी गई हैं।
बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राजस्व, पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य, पशुपालन, सिंचाई, विद्युत, जलकल, खाद्य एवं रसद तथा लोक निर्माण विभाग सहित संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। सभी विभागों को आवश्यक संसाधनों और मानवबल के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य संभावित बाढ़ की स्थिति में जान-माल की सुरक्षा, लोगों की सुरक्षित निकासी, त्वरित रेस्क्यू, राहत सामग्री, भोजन और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि गंगा का जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए नदी, नालों, जलभराव वाले क्षेत्रों और तेज बहाव वाले स्थानों की ओर अनावश्यक रूप से न जाएं। प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन या बाढ़ नियंत्रण कक्ष को सूचना दें।
फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए वाराणसी प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और संभावित बाढ़ की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान चलाने के लिए तैयार है।