विशेष सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन आरोप साबित करने में रहा असफल, वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव वर्मा की पैरवी में सानू उर्फ नाजिम को मिली राहत
वाराणसी। विशेष सत्र न्यायालय/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट, न्यायालय कक्ष संख्या-3, वाराणसी ने उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 3(1) से जुड़े वर्ष 2011 के विशेष आपराधिक वाद संख्या 265/2011 में फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने मुन्नू तिवारी, महेश पुरोहित और सानू उर्फ नाजिम को अभियोजन के आरोपों में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
यह मामला थाना लक्सा, वाराणसी में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 180/2008 से संबंधित था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी गिरोह के सदस्य के रूप में आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त थे, जिसके आधार पर उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पुलिस अधिकारियों सहित चार गवाह न्यायालय में पेश किए गए। अभियोजन ने एफआईआर, गैंगचार्ट, नक्शा और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।
बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि गैंगस्टर एक्ट की धारा 3(1) के तहत अपराध साबित करने के लिए आवश्यक ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं हैं।
सानू उर्फ नाजिम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव वर्मा ने न्यायालय में पैरवी की। बचाव पक्ष ने अभियोजन की विवेचना और गवाहों के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभियुक्तों द्वारा आपराधिक गतिविधियों से आर्थिक अथवा भौतिक लाभ अर्जित करने या अवैध संपत्ति बनाने से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
बचाव पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि अभियोजन के मामले को साबित करने के लिए स्वतंत्र जनसाक्षी का अभाव रहा। पुलिस गवाहों के बयानों के अलावा ऐसा स्वतंत्र साक्ष्य सामने नहीं आया, जिससे अभियुक्तों के कारण आम जनता में भय या आतंक का माहौल होने की बात प्रमाणित हो सके।
अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।
न्यायालय ने आपराधिक न्याय के मूल सिद्धांत के तहत अभियुक्तों को संदेह का लाभ दिया। अदालत के अनुसार जब अभियोजन किसी आरोप को युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित नहीं कर पाता है तो उसका लाभ अभियुक्त को दिया जाना आवश्यक है।
फैसले के अनुसार मुन्नू तिवारी, महेश पुरोहित और सानू उर्फ नाजिम को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 3(1) के आरोप से दोषमुक्त कर दिया गया। अदालत ने आदेश की प्रति नियमानुसार जिलाधिकारी, वाराणसी को भेजने के निर्देश भी दिए।
इस फैसले के बाद वर्ष 2008 के मुकदमे से जुड़े गैंगस्टर एक्ट के इस पुराने मामले में तीनों आरोपियों को राहत मिली है। सानू उर्फ नाजिम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव वर्मा ने बचाव पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की।