वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ट्रॉमा सेंटर में नवंबर 2025 में हुई 62 नियुक्तियां अब जांच के घेरे में हैं। तत्कालीन प्रोफेसर इंचार्ज (पीआई) प्रो. सौरभ सिंह के कार्यकाल में हुई इन नियुक्तियों को लेकर आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार के समक्ष तीन अलग-अलग शिकायतें पहुंचीं। शिकायतों में नियुक्ति प्रक्रिया में निर्धारित योग्यता और मानकों की अनदेखी के साथ कुछ अभ्यर्थियों के कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त होने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतों के बाद आईएमएस बीएचयू के निदेशक ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। समिति नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया, निर्धारित मानकों, अभ्यर्थियों की योग्यता, दस्तावेजों और नियुक्तियों के लिए ली गई स्वीकृतियों समेत अन्य बिंदुओं की पड़ताल करेगी। जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट आईएमएस बीएचयू के निदेशक को सौंपेगी।
जानकारी के अनुसार, नवंबर 2025 में बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में रेडियोग्राफर, ओटी टेक्नीशियन, लैब टेक्नीशियन सहित विभिन्न पदों पर कुल 62 लोगों की नियुक्ति की गई थी। ये नियुक्तियां तत्कालीन प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. सौरभ सिंह के कार्यकाल में हुई थीं।
इन नियुक्तियों को लेकर बाद में तीन अलग-अलग लोगों ने आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार से शिकायत की। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि नियुक्तियों के दौरान निर्धारित योग्यता और चयन के मानकों को नजरअंदाज किया गया। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ऐसे लोगों की नियुक्ति हुई, जो निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते थे।
कुछ नियुक्तियों में फर्जी या गलत दस्तावेजों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इनकी वास्तविकता जांच समिति की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट होगी।
लगातार तीन शिकायतें मिलने के बाद आईएमएस बीएचयू के निदेशक ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की। समिति को नियुक्तियों से जुड़े सभी रिकॉर्ड और शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
जांच समिति की अध्यक्षता ट्रॉमा सेंटर के पूर्व प्रोफेसर इंचार्ज एवं सर्जरी विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. संजीव गुप्ता करेंगे।
समिति में न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्रा, सर्जरी विभाग के प्रो. शशि प्रकाश मिश्रा, ईएनटी विभाग के प्रो. विश्वंभर सिंह और ट्रॉमा सेंटर के एआर शारदूल चौबे को सदस्य बनाया गया है।
नियुक्तियों को लेकर शिकायत सामने आने के बाद पहले भी प्रो. संजीव गुप्ता की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई थी। हालांकि, उस समय प्रो. संजीव गुप्ता ने समिति में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
इसके बाद दोबारा जांच समिति गठित की गई। इस बार प्रो. संजीव गुप्ता समिति की अध्यक्षता की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हो गए। अब उनकी अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति पूरे मामले की जांच करेगी।
समिति यह जांच करेगी कि 62 पदों पर नियुक्ति के दौरान निर्धारित नियमों और मानकों का पालन किया गया था या नहीं। इसके साथ ही नियुक्त अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और अन्य पात्रताओं की भी पड़ताल होगी।
नियुक्ति के समय जमा किए गए दस्तावेजों की सत्यता भी जांची जाएगी। यदि किसी अभ्यर्थी के दस्तावेज फर्जी या गलत पाए जाते हैं तो उसे जांच में चिन्हित किया जाएगा। इसके अलावा नियुक्तियों के लिए सक्षम उच्च प्राधिकारी से आवश्यक स्वीकृति ली गई थी या नहीं, इसकी भी जांच होगी।
जांच समिति शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज कर सकती है। इसके बाद शिकायतों में लगाए गए आरोपों और नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
समिति तत्कालीन प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. सौरभ सिंह का बयान भी दर्ज कर सकती है, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े उनका पक्ष भी जांच में शामिल किया जा सके। इसके अलावा 62 नियुक्तियों से संबंधित रिकॉर्ड, चयन प्रक्रिया, योग्यता प्रमाणपत्र, दस्तावेज और प्रशासनिक स्वीकृतियों की भी पड़ताल की जाएगी।
अब पूरे मामले में जांच समिति की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। समिति की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवंबर 2025 में हुई 62 नियुक्तियों में निर्धारित नियमों और मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आती है तो समिति अपनी रिपोर्ट में उसका उल्लेख करेगी। वहीं, यदि नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेज नियमों के अनुरूप पाए जाते हैं तो शिकायतों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। जांच के निष्कर्ष और रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई को लेकर तस्वीर साफ होगी।