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वाराणसी में एलिवेटेड रोड पर मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने की बैठक, NHAI को दिए निर्देश



 21/Aug/26

20 अगस्त को सर्किट हाउस में हुई बैठक, हुकुलगंज रैंप के विकल्प पर विचार के निर्देश

शहर की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रस्तावित करीब 25 हजार करोड़ रुपये की एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर प्रदेश सरकार के स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने गुरुवार को सर्किट हाउस सभागार में बैठक की। बैठक में मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, एनएचएआई के अधिकारी और क्षेत्रीय पार्षद मौजूद रहे।

मंत्री ने एनएचएआई अधिकारियों से कहा कि एलिवेटेड रोड के निर्माण और उसकी डिजाइन तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि स्थानीय लोगों को बिनावजह प्रभावित न होना पड़े। उन्होंने रैंप निर्माण में भी नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

काजीसराय से नमो घाट तक प्रस्तावित है एलिवेटेड रोड

बैठक में एनएचएआई अधिकारियों ने डिजिटल प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजना के प्रस्तावित रूट और निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार एलिवेटेड रोड काजीसराय से शुरू होकर हरहुआ फ्लाईओवर और रिंग रोड को क्रॉस करते हुए कैंट क्षेत्र के ऊपर से फुलवरिया सहित विभिन्न स्थानों से होकर नमो घाट की ओर जाएगी।

परियोजना के अलग-अलग हिस्सों में रैंप बनाए जाने का भी प्रस्ताव है।

हुकुलगंज रैंप के विकल्प पर विचार

बैठक में हुकुलगंज में प्रस्तावित रैंप को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने कहा कि यदि हुकुलगंज में रैंप उतारने से बड़ी संख्या में स्थानीय लोग प्रभावित होते हैं तो इसके विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को हुकुलगंज में रैंप न उतारकर आयुर्वेद कॉलेज के पास रैंप उतारने के विकल्प पर विशेष ध्यान देने को कहा।

‘विकास परियोजनाओं का उद्देश्य जनसुविधा बढ़ाना’

मंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं का उद्देश्य जनसुविधाओं को बढ़ाना है। इसलिए एलिवेटेड रोड की डिजाइन ऐसी होनी चाहिए, जिससे यातायात व्यवस्था बेहतर होने के साथ ही स्थानीय नागरिकों पर परियोजना का न्यूनतम प्रभाव पड़े।

एनएचएआई अधिकारियों ने बताया कि परियोजना में सबसे अधिक समस्याएं रैंप वाले स्थानों को लेकर सामने आ रही हैं। इसी को देखते हुए रैंप के स्थान और डिजाइन को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तय करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

परियोजना पूरी होने के बाद शहर के प्रमुख हिस्सों के बीच आवागमन सुगम होने और यातायात दबाव कम होने की उम्मीद है।

क्लाउन टाइम्स | वाराणसी


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