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कजरी-लोकगीतों में गूंजा श्यामा प्रसाद का राष्ट्रभाव, नाट्य मंचन ने जीवंत किया संघर्ष और बलिदान



 18/Aug/26

बनारस किला में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष पर सांस्कृतिक आयोजन, राष्ट्र की एकता-अखंडता के संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान

वाराणसी, 17 अगस्त। बाबतपुर स्थित ऐतिहासिक बनारस किला सोमवार को कजरी और लोकगीतों की स्वर लहरियों के बीच राष्ट्रभाव से गूंज उठा। सुप्रसिद्ध भजन एवं लोक गायिका सुमन अग्रहरि ने अपनी लोकधुनों के माध्यम से जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी व्यक्तित्व और विचारों को स्वर दिया। उनके गीत “श्यामा मुखर्जी हउवे देशवा क शान पिया, हउवे बड़ा महान पिया ना...” ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों में राष्ट्रभक्ति का भाव भर दिया।

इसके बाद वाराणसी की ऐतिहासिक नागरी नाटक मंडली के छात्रों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, राजनीतिक संघर्ष, राष्ट्र की एकता-अखंडता के संकल्प और उनके बलिदान पर आधारित नाटक का प्रभावी मंचन किया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से डॉ. मुखर्जी के संघर्षपूर्ण जीवन और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को जीवंत कर दिया।

यह विशेष सांस्कृतिक आयोजन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र द्वारा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पार्चन करके किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा काशी क्षेत्र अध्यक्ष अशोक चौरसिया ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का राष्ट्रवादी चिंतन और देश की एकता-अखंडता के लिए उनका संघर्ष सदैव समाज और युवा पीढ़ी को प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देकर 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35ए का विरोध करते हुए डॉ. मुखर्जी ने बिना परमिट कश्मीर जाने का आंदोलन किया। गिरफ्तारी के बाद उनका निधन हुआ। उनका जीवन राष्ट्रहित के लिए संघर्ष और त्याग की मिसाल है।

अशोक चौरसिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को साकार किया गया। उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि प्रधानमंत्री के प्रयासों से आजादी के 79वें वर्ष में पश्चिम बंगाल, जहां डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म हुआ था, वहां भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने में सफलता मिली है।

उन्होंने कहा कि हम सभी आगे भी देश की एकता और अखंडता के लिए अपना पूरा योगदान देंगे और देश को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और उपस्थित लोगों से देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य करने का आह्वान किया।

राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पूरा जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण और त्याग की गाथा है। महान शिक्षाविद होने के साथ ही उन्होंने देश की स्वतंत्रता, राष्ट्रहित और राष्ट्रीय एकता के लिए निरंतर संघर्ष किया तथा नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एके त्यागी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के 125वें जयंती वर्ष पर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य किया और जम्मू-कश्मीर में धारा 370 का विरोध करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनके विचार आज भी राष्ट्र निर्माण को दिशा देने में महत्वपूर्ण हैं।

भाजपा जिलाध्यक्ष राम सकल पटेल ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक विशिष्ट राष्ट्र निर्माता, प्रख्यात शिक्षाविद और दूरदर्शी नेता थे। उन्होंने अपना जीवन भारत की एकता, गरिमा और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया था। शिक्षा, औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय एकता में डॉ. मुखर्जी का अमिट योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

कार्यक्रम संयोजक एवं भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र के संयोजक विपिन पाठक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है।

नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन प्रख्यात रंगकर्मी सुमन पाठक ने किया। नाट्य प्रस्तुति में डॉ. मुखर्जी के राजनीतिक संघर्ष, राष्ट्र की अखंडता के संकल्प और बलिदान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में विचार परिवार सहित आम लोगों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही। सभी ने कार्यक्रम की मुक्तकंठ से सराहना की।

कार्यक्रम में अशोक चौरसिया, हंसराज विश्वकर्मा, प्रो. एके त्यागी, राम सकल पटेल, विद्यासागर राय, विधायक टी. राम, पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रभात सिंह मिंटू, राकेश शर्मा, नवरतन राठी, संजय सोनकर, संतोष सोलापुरकर, दिनेश कालरा, अमन वर्मा, मिथिलेश पांडे, रोशन पटेल, विकास तिवारी, सुनील पटेल, उदय राज सिंह, विनय कुमार सिंह, अमन श्रीवास्तव, विवेक पाठक, नंदलाल तिवारी, डॉ. अशोक राय, तिलक राज, विनय मोर्या, विजय गुप्ता, निर्मला सिंह पटेल, रानिका जायसवाल, विनिता सिंह, रामप्रकाश दुबे, जेपी दुबे, प्रवीण सिंह गौतम, शैलेष पांडेय, आशा एजुकेशन के प्रबंधक दीपक सिंह, ब्लॉक प्रमुख बड़ागांव रविशंकर सिंह, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि पिंडरा नंदलाल त्रिपाठी, अमरावती इंस्टिट्यूट वाराणसी के प्रबंधक राजेश मिश्र सहित मिथिलेश पांडे, विकास तिवारी आदि मौजूद रहे।


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