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केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विश्व धरोहर स्थल सारनाथ का भ्रमण किया



 04/Aug/26

राजदूत विशाल वी. शर्मा ने उत्तर प्रदेश सरकार एवं एएसआई अधिकारियों के साथ बैठक की

वाराणसी। भारत सरकार के केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विश्व धरोहर स्थल सारनाथ का भ्रमण किया। उनके साथ भारत के यूनेस्को में राजदूत एवं स्थायी प्रतिनिधि श्री विशाल वी. शर्मा भी उपस्थित रहे। राजदूत शर्मा ने सारनाथ में उत्तर प्रदेश सरकार तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों के साथ बैठक की।

बैठक में मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा, प्रभागीय वन अधिकारी श्रीमती निधि चौहान, क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अरुण राज टी., अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. बीरी सिंह, सारनाथ सर्किल, एएसआई; श्री दिनेश कुमार, संयुक्त निदेशक (पर्यटन), उत्तर प्रदेश सरकार तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रतीकात्मक एवं रणनीतिक महत्व की यात्रा

राजदूत शर्मा, जो सारनाथ के यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के पश्चात दक्षिण कोरिया के बुसान से सीधे सारनाथ पहुँचे थे, अब फ्रांस के पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय के लिए प्रस्थान करेंगे। अपनी राजनयिक तैनाती पर लौटने से पूर्व सारनाथ में उनकी उपस्थिति इस बात का प्रतीक है कि भारत सरकार इस ऐतिहासिक उपलब्धि को कितनी गंभीरता से ले रही है। यह संपूर्ण राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है।

सारनाथ का महत्व स्वयं गौतम बुद्ध से भी पूर्व का है। यह 2,500 वर्षों से अधिक समय से पूजा, शिक्षा और दर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। इतिहास में इस स्थल को अनेक नामों से जाना गया है—भगवान शिव के नाम पर सारंगनाथ, ऋषिपत्तन, अर्थात वह स्थान जहाँ ऋषियों के अवतरण की मान्यता है; पालि भाषा में इसिपत्तन तथा मृगदाव, अर्थात हिरण वन (डियर पार्क)

बुसान में विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के पश्चात अपने संबोधन में राजदूत शर्मा ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण तथा उत्तर प्रदेश सरकार को इस उपलब्धि में उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। सारनाथ उत्तर प्रदेश की चौथी तथा भारत की 45वीं विश्व धरोहर संपत्ति है। यह राजदूत शर्मा की सारनाथ की पहली यात्रा थी। उल्लेखनीय है कि उनके नाना का पैतृक गाँव वाराणसी के निकट पिंडरा में स्थित है।

विश्व धरोहर संधि के दिशा-निर्देशों के पालन पर बल

बैठक के दौरान राजदूत शर्मा ने स्थल के प्रबंधन एवं संरक्षण में यूनेस्को की विश्व धरोहर संधि के दिशा-निर्देशों के कड़ाई से पालन किए जाने के महत्व पर बल दिया।उल्लेखनीय है कि यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन) की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी और भारत इसका संस्थापक सदस्य है। हिंदी वर्ष 1948 से यूनेस्को की महासभा (जनरल कॉन्फ्रेंस) की आधिकारिक भाषाओं में से एक रही है।

 


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