वाराणसी। वर्ष 1998 में वाराणसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा कि काशी में पदभार ग्रहण करने से पहले उन्होंने बाबा विश्वनाथ, काल भैरव और संकट मोचन हनुमान मंदिर में दर्शन किए थे। उन्होंने वाराणसी को सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय सभ्यता की राजधानी बताते हुए कहा कि यहां का वातावरण उन्हें सदैव प्रेरणा देता रहा।
उन्होंने अपने संस्मरण में लिखा कि वाराणसी की गलियों की आध्यात्मिक सुगंध, "सुबह-ए-बनारस" की अलौकिक अनुभूति तथा बाबा विश्वनाथ के प्रति अटूट आस्था ने उन्हें अपने दायित्वों के निर्वहन की शक्ति प्रदान की। उन्होंने काशी नरेश स्वर्गीय विभूति नारायण सिंह को महान विद्वान, सरल और भारतीय संस्कृति का प्रेरक व्यक्तित्व बताते हुए उनके सानिध्य को जीवन का सौभाग्य बताया।
पूर्व एसएसपी ने दावा किया कि कार्यभार संभालने के पहले ही महीने में सारनाथ थाना क्षेत्र में कुख्यात इनामी बदमाश पांचू सिंह और बंसी सिंह पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। इसके साथ ही लगभग 50 लाख रुपये के चर्चित साड़ी लूटकांड का सफल खुलासा कर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी तथा लूटा गया पूरा माल बरामद किया गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद अपराधियों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया गया, जिससे जिले में कानून-व्यवस्था को मजबूत किया गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सत्तापक्ष के एक विधायक को उनके सरकारी आवास से अपनी मौजूदगी में गिरफ्तार कराया और जेल भेजा। उनके अनुसार, कानून के समक्ष सभी समान हैं और पुलिस ने निष्पक्षता के सिद्धांत पर कार्य किया।
पूर्व अधिकारी ने कहा कि गरीब, कमजोर, पीड़ित और शोषित वर्ग की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रही। उन्होंने कहा कि जनता, मीडिया और पुलिस बल के सहयोग से ही यह संभव हो सका तथा उन्हें वाराणसी की जनता का भरपूर विश्वास और स्नेह प्राप्त हुआ।
उन्होंने अपने संस्मरण में लिखा कि उनकी मेज पर हमेशा "भगवद्गीता" रहती थी, जिससे उन्हें कर्तव्यनिष्ठा और निष्पक्ष सेवा की प्रेरणा मिलती थी। उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल का श्रेय पुलिस टीम के समेकित प्रयास, जनता के विश्वास और बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद को देते हुए अंत में "ॐ नमः शिवाय" का उल्लेख किया