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आनंद काशी टाउनशिप में 1.5 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा मियावाकी वन, माह के अंत तक शुरू होगा पंजीकरण



 01/Aug/26

 

वाराणसी विकास प्राधिकरण की बड़ी पहल: आनंद काशी टाउनशिप में 1.5 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा मियावाकी वन, माह के अंत तक शुरू होगा पंजीकरण

वाराणसी विकास प्राधिकरण के *उपाध्यक्ष श्री पुर्ण बोरा द्वारा आज दिनांक 31/07/2026 को तहसील राजातालाब के अंतर्गत मौजा कल्लीपुर में प्राधिकरण की अधिग्रहित भूमि का विस्तृत निरीक्षण* किया गया। निरीक्षण के दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से योजना की *बाउंड्री पर स्थित लगभग 1.5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मियावाकी पद्धति से सघन वन विकसित किए जाने का निर्णय* लिया गया।

यह कार्य *सृजन सामाजिक विकास न्यास* के सहयोग से *संस्था के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार सिंह* के नेतृत्व में कराया जाएगा। वहीं, संस्था के उपाध्यक्ष श्री मदन राम चौरसिया मियावाकी तकनीक, पौधों के चयन एवं वृक्षारोपण से संबंधित आवश्यक तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराएंगे।

उपाध्यक्ष महोदय द्वारा बताया गया कि यह क्षेत्र वाराणसी विकास प्राधिकरण की महत्वाकांक्षी *“आनंद काशी”* समेकित गेटेड टाउनशिप का हिस्सा है, जिसे लगभग 30 वर्षों के उपरांत विकसित की जा रही प्राधिकरण की पहली समेकित गेटेड सिटी परियोजना के रूप में विकसित किया जा रहा है। काशी की सांस्कृतिक एवं वैदिक विरासत की अवधारणा पर आधारित इस योजना में न्यूनतम 15 प्रतिशत क्षेत्रफल को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें मियावाकी वन जैसी पर्यावरणीय पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

*आनंद काशी टाउनशिप में 24, 18, 12 एवं 9 मीटर चौड़ी सड़कों के साथ जलापूर्ति, सीवरेज, विद्युत, वर्षा जल निकासी एवं अन्य आधुनिक आधारभूत सुविधाओं का विकास* विभिन्न चरणों में प्रगति पर है। प्रथम चरण में *लगभग 150 एकड़ क्षेत्र में 1,000 से अधिक आवासीय भूखण्ड* विकसित किए जा रहे हैं। योजना का रेरा पंजीकरण अंतिम चरण में है तथा *इस माह के अंत तक पंजीकरण प्रक्रिया प्रारम्भ किए जाने का लक्ष्य* निर्धारित किया गया है।

 मियावाकी तकनीक से विकसित होने वाला यह सघन वन न केवल आनंद काशी टाउनशिप के निवासियों बल्कि कल्लीपुर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी स्वच्छ वायु, हरित वातावरण एवं बेहतर पर्यावरणीय संतुलन प्रदान करेगा। यह पहल क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने, जैव विविधता को प्रोत्साहित करने तथा भूजल संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।


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