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ASG आई हॉस्पिटल प्रकरण में NHRC का बड़ा एक्शन: वाराणसी DM व पुलिस आयुक्त से 4 सप्ताह में मांगी ATR



 31/Jul/26

 

7 वर्षीय अन्या रिजवान की कथित चिकित्सीय लापरवाही से मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, निष्पक्ष जांच के

 चर्चित ASG आई हॉस्पिटल में कथित चिकित्सीय लापरवाही के चलते 7 वर्षीय मासूम अन्या रिजवान की मृत्यु के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने वाराणसी के जिलाधिकारी एवं पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर Action Taken Report (ATR) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग ने प्रकरण संख्या 23864/24/72/2025 में 30 जुलाई 2026 को यह आदेश जारी करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।

यह शिकायत अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी द्वारा पीड़िता की माता आफरीन बानो, पत्नी रिजवान की ओर से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दाखिल की गई थी। शिकायत के अनुसार, अन्या रिजवान की ASG आई हॉस्पिटल में नेत्र शल्य चिकित्सा (आई सर्जरी) हुई थी। ऑपरेशन के बाद बच्ची को दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी हालत गंभीर हो गई और उसकी मृत्यु हो गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मामला प्रथम दृष्टया गंभीर चिकित्सीय लापरवाही का प्रतीत होता है, लेकिन घटना के बावजूद अब तक पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

शिकायत में दोनों अस्पतालों के सीसीटीवी फुटेज, संपूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेजों और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित एवं जब्त करने की मांग की गई है। साथ ही मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की गई है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने शिकायत का परीक्षण करने के बाद माना कि इसमें लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन की ओर संकेत करते हैं। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा-12 के तहत मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी एवं पुलिस आयुक्त, वाराणसी को सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत Action Taken Report (ATR) आयोग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित अधिकारी अपनी रिपोर्ट HRCNet Portal के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।

अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने आयोग की इस कार्रवाई को पीड़ित परिवार के न्याय की लड़ाई में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन आयोग के निर्देशों का पूरी पारदर्शिता के साथ पालन करेगा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि यदि जांच में चिकित्सीय लापरवाही अथवा किसी अन्य प्रकार की कानूनी जिम्मेदारी सिद्ध होती है तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने बताया कि इस मामले में अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी, आशुतोष शुक्ला, राजकुमार तिवारी और दीपक वर्मा सहित अधिवक्ताओं की टीम लगातार पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। टीम पूरे प्रकरण की विधिक कार्रवाई पर लगातार निगरानी रखे हुए है तथा आवश्यकता पड़ने पर आगे भी सभी सक्षम न्यायिक एवं वैधानिक मंचों पर प्रभावी पैरवी जारी रखेगी।


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